पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यरत सिटिजन फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सीएफएसडी) का कहना है कि विगत 60 वर्षो में आदि गंगा कही जाने वाली गोमती दो तिहाई जल खो चुकी है तथा अवशेष एक तिहाई जल को समाप्त होने में मात्र 30 वर्ष लगेगा। संगठन 5 मार्च से 11 दिवसीय गोमती नदी अध्य्यन एवं तटवासी जनजागरण पदयात्रा निकालेगा। अध्ययन दल, मारकण्डेय महादेव, गंगा-गोमती संगम, गाजीपुर से शुरू होकर जौनपुर, सुल्तानपुर, फैजाबाद, बाराबंकी होते हुए लखनऊ पहुंचेगा। अध्ययन के दौरान अध्ययन दल लगभग 300 किलोमीटर की यात्रा करते हुए, 200 गांवों में जनसंवाद स्थापित करेगा। यात्रा अवधि में 25 गोष्ठियां की जाएगी। संगठन ने कहा है यदि गम्भीर प्रयास नहीं किए गए तो वैदिक नदी सरस्वती की तरह गोमती भी काल के गाल में समा जाएगी।
सिटिजन फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट सोसाइटी गंगा, यमुना, घाघरा, गोमती एवं सई नदी प्रणाली का बीते आठ वर्षो से परीक्षण, विश्लेषण तथा अवलोकन कर रहा है। अध्ययन के दौरान संस्था के सामने कई अहम तथ्य आए, जिनके आधार पर भारत सरकार तथा अन्य सम्बन्धित संस्थाओं से मांगें की जा रही हैं। संगठन ने मांग की है कि सीवेज को नदी में प्रवेश करने से रोकते हुए सीवेज को उपचार संयंत्रों के माध्यम से शत प्रतिशत उपचारित करके जल खेती के लिए किसानों को उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही श्मशान घाटों को पूरी तरह से विद्युतीकृत शवदाह गृहों में रूपान्तरित किया जाये तथा प्रतीक रूप में ही राखो का विसर्जन नदी में करने की मांग की है।
इसके अलावा जल पुलिस का गठन करने, प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली के संस्थागत रूप को और प्रभावी बनाने तथा नदी में प्रदूषण करने के अपराध के लिए आजीवन कारावास का प्रावधान व पर्यावरणीय अपराधों के लिए पर्यावरणविदों की विशेष न्यायालय बनाये जाने की मांग की है।
1 टिप्पणी:
सार्थक जानकारी भरी पोस्ट .आभार सौतेली माँ की ही बुराई :सौतेले बाप का जिक्र नहीं आप भी जानें हमारे संविधान के अनुसार मोहपाश को छोड़ सही रास्ता दिखाएँ .
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