कालीन निर्यात वृद्धि में आ रही हर बाधा को करेंगे दूर: मोदी - Live Aaryaavart

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सोमवार, 22 अक्तूबर 2018

कालीन निर्यात वृद्धि में आ रही हर बाधा को करेंगे दूर: मोदी

2022 तक निर्यात दर दस हजार करोड़ से बढ़ाकर 25 हजार करोड़ यानी दुगुना करने का टारगेट 
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वाराणसी (सुरेश गांधी )। मशीनी युग में बेलबूटेदार कलात्मक रंगों के जरिए पूरी दुनिया के बाजारों में अपनी धाक बरकरार रखने वाले कारपेट इंडस्ट्री के इतिहास में रविवार की शाम एक नया अध्याय उस वक्त जुड़ गया जब इंडिया कार्पेट एक्‍सपो-2018 का पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने शुभारंभ किया। मोदी के ही प्रयास से निर्मित ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर में आयोजित इस कारपेट एक्‍सपो में देशभर से आए निर्यातकों व 38 देशों के खरीदारों समेत बुनकरों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के जरिए संवाद किया। इस दौरान मोदी ने कालीन उद्योग को और ऊंचाई देने के लिए निर्यातकों को जहां 2022 तक निर्यात दर दस हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 25 हजार करोड़ यानी दुगुना करने का टारगेट दिया, वहीं इसे पूरा करने में आ रही हर रुकावटों को दूर करने का भरोसा भी दिया। कहा, निर्यातकों से लेकर बुनकर व उसके परिवार को सरकार की ओर से हर संभव मदद के लिए सरकार प्रयासरत है। 

श्री मोदी ने भारतीय जीवन दर्शन में चरखे का महत्‍व बताते हुए कहा कि वाराणसी की जितनी पहचान संत कबीर से है उतनी ही हस्‍तशिल्‍प से है। सूत कातने वाला चरखा जीवन दर्शन से जुड़ा है। क्योंकि कबीर ने जुलाहा के रूप में कर्म का संदेश दिया तो अपने जीवन दर्शन से अध्यात्म भी समझाया। कालीन जैसे हस्तशिल्पों के माध्यम से हम यह बात भी दुनिया को बताना चाहते हैं कि भारत में छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा कालीन बनाने की क्षमता है। यही हमारी खूबी भी है। और यही वजह भी है कि भारतीय हस्तशिल्प कला इस समय पूरी दुनिया में धूम मचा रही है। इसके लिए हाल के वर्षों में सरकार की ओर से किए गए प्रयास सराहनीय है। यह सरकार का प्रयास ही है कि अब पूर्वी भारत टेक्‍सटाइल्‍स के ग्‍लोबल हब के रूप में या यूं कहें मेड इन इंडिया ब्रांड पूरी दुनिया में तेजी से उभरा है। दुनिया में हमारे निर्यात का योगदान 35 फीसद है जिसे हम वर्ष 2022 तक 50 प्रतिशत तक ले जाएंगे। लेकिन यह तभी संभव हो पायेगा जब कारोबारी फार्म, फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्‍ट्री, फैक्‍ट्री टू फैशन, फैशन टू फॉरेन का फार्मूला अपनाएंगे। क्योंकि कालीन कारोबार में फाइव एफ का काफी महत्व है। इसमें किसान, बुनकर, डिजाइनर, कारोबारी सभी समाहित हैं। इस फार्मूले से कालीन से लेकर पूरी टेक्‍सटाइल्‍स इंडस्‍ट्री को न सिर्फ नई पहचान मिलेगी, बल्कि लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि बनारस के सांसद के नाते वे एक्‍सपो में आए आयातकों, निर्यातकों का स्वागत करते है। खासकर बनारस और यूपी के बुनकरों के लिए यह मौका दोहरी खुशी का है। ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर में कार्पेट एक्‍सपो के आयोजन से बुनकरों को अपनी कला को अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर दिखाने का मौका मिला है। प्रधानमंत्री ने सभी को धनतेरस और दीपावली की अग्रिम बधाई देने के साथ ही ज्यादा मेहनत के लिए हौसला भी बढ़ाया। दशहरे के बाद उन्हें पहली बार टेक्नोलॉजी के माध्यम से वराणसी से जुड़ने का मौका मिला है। बोले, यह समय सबसे अधिक व्यस्तता वाला होता है। काम अधिक, मांग अधिक होता है और इसी समय श्रम व कला का पुरस्कार मिलता है। जिन लक्ष्यों को लेकर संकुल का निर्माण किया गया उनकी तरफ तेजी से हम बढ़ रहे हैं। कहा कि इस आयोजन से उत्पाद का दुनियाभर में प्रचार होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के 50 प्रतिशत कालीन बाजार पर अधिकार प्राप्त करने के लिए हम जल्द ही कालीन उद्योग से जुड़े व्यापारियों, बुनकरों और उनके परिजनों के बारे में विस्तृत कार्ययोजना लाने वाले हैं। पीएम ने कहा कि कालीन उद्योग में लाखों बुनकर काम करते हैं। उनके बच्चों को स्कूली व कॉलेज शिक्षा मुहैया कराने के लिये सरकार ने 75 फीसदी फीस का खर्च उठाने का फैसला किया है। उनकी उच्च शिक्षा के लिए इग्नू के माध्यम से विशेष योजना बनाई जा रही है। कालीन निर्यातकों को ऐसे बुनकर परिवारों की पहचान करने में सरकार की सहायता करनी होगी। उन्होंने कहा कि कालीन बुनकरों का जीवन स्तर सुधारने और उन्हें अत्याधुनिक तकनीक से परिचित कराने का भी काम किया जाएगा। 

बिनकारी कला को और विकसित करने की जरुरत 
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में हस्तशिल्प कला की लंबी परंपरा है। इसके बढ़ावा के लिए सरकार संकल्पित है। हमारी कोशिश है महिला कारीगर मुद्रा योजना का अधिक से अधिक लाभ लें। तकनीक से कुटीर उद्योग को जोडऩे का हम लोग पूरा प्रयास कर रहे हैं। आज मेड इन इंडिया कारपेट दुनिया में प्रतिष्ठित ब्रांड बन गया है, हमें इसे और आगे ले जाना है। सरकार विभिन्न क्षेत्रों में गोदाम और शोरूम बनाने की प्रक्रिया में भी कदम उठा रही है। किसानों को भी दुनिया से जोडऩे का काम चल रहा है ताकि उनका जीवनस्तर ऊपर हो सके। भदोही-मिर्जापुर व जम्मू-कश्नीर में कालीन का मेगा क्लस्टर बनाया जायेगा। वहां आधुनिक लूम लगाए जाएंगे। बुनकरों को दुनिया के कालीन जगत के बारे में प्रशिक्षण और आधुनिक डिजाइन की जानकारी दी जायेगी। उन्होंने भदोही और श्रीनगर में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पेट टेक्नोलॉजी को और समृद्ध बनाने और ‘जीरो इफेक्ट और जीरो डिफेक्ट’ के लिए प्रयास करने की बात कही।

प्रवासी भारतीयों से होगा उद्यमियों को लाभ 
प्रधानमंत्री ने कहा अगले वर्ष 21 से 23 जनवरी तक बनारस में प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जा रहा है और इससे भी भारतीय हस्तकला को लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री ने सभी उद्यमियों, व्यापारियों, बुनकरों व हस्तशिल्पियों को प्रवासी भारतीय सम्मेलन के मद्देनजर तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कला का प्रदर्शन करने का बड़ा अवसर आने वाला है। सम्मेलन में दुनियाभर से आने वाले व्यापारी काशी व आसपास के हस्तशिल्प के साथ-साथ हमारी सांस्कृतिक समृद्धि और ‘बदलती काशी’ का आनंद ले पाएंगे।

अमेरिका में भी खुलेगा वेयरहाउस: स्मृति ईरानी 
वस्त्र मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बुनकरों से जुड़ी विकास योजनाओं पर प्रकाश डाला। साथ कार्पेट इंडस्ट्री के विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्धता जाहिर की। कहा, पंडित दीनदयाल का हमेशा से प्रयास रहा कि अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति का विकास किया जा सके। सीईपीसी के साथ मिलकर इसे साकार करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बुनकरों से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी बुनकरों, शिल्पियों को मिल सके इसके लिए एक प्रमोशन कार्यक्रम सीईपीसी के साथ मिलकर करेंगे। साथ ही चीन की तर्ज पर अमेरिका में भी वेयरहाउस खोलने का भरोसा जताया। इसके अलावा मुद्रा योजना, पहचान पत्र, मेगा क्लस्टर योजना, स्किल डेवलपमेंट के प्रोग्राम के साथ-साथ आईआईसीटी भदोही में बीटेक कार्यक्रम शुरू करने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कारपेट को आधुनिक तकनीकी से जोडऩा आवश्यक है। हमारा प्रयास है कि महिला बुनकरों को अधिक प्रशिक्षित किया जाए ताकि उनका हुनर सिर चढ़ कर बोले। बीपीएल, अनुसूचित जाति और जनजाति, दिव्यांगों के शिक्षा के लिए सरकार 75 प्रतिशत तक धन खर्च करेगी। इसके बाद भदोही के सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त व विधायक रवीन्द्रनाथ त्रिपाठी ने भदोही के विकास व जरूरतों के बारे में बताया। डेविड समद ने 2019 से जुड़े कलर ट्रेंड की जानकारी के साथ ही बाजार की मांग के अनुरूप कालीन निर्माण के सूत्र बताए।
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