दुमका : होली के पावन अवसर पर आयोजित मिलन समारोह में बढ़-चढ़कर चित्रांशों ने लिया भाग - Live Aaryaavart

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बुधवार, 20 मार्च 2019

दुमका : होली के पावन अवसर पर आयोजित मिलन समारोह में बढ़-चढ़कर चित्रांशों ने लिया भाग

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दुमका (अमरेन्द्र सुमन) बुराई पर अच्छाई की जीत व आपसी रंजिशों व कटुताओं को दरकिनार कर हिन्दुओं का पवित्र त्योहार होली पूरे भारत वर्ष में पूरे उत्साह व  हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने वाला त्यौहार है। हमारे देश की  बहुसांस्कृतिक समाज के जीवंत रंगों का प्रतीक इस पर्व की अपनी महत्ता व उपयोगिता है। हमारी संस्कृति और सभ्यता के मूल सहिष्णुता और सौहार्द की भावना को बढ़ावा देने वाले इस पर्व में देश के  नागरिकों द्वारा  साम्प्रदायिक भावना से ऊपर उठकर  एक दूसरे के दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए देश में शांति, सौहार्द, समृद्धि व खुशहाली कायम हो सके।अखिल भारतीय कायस्थ महासभा, दुमका के तत्वावधान में दिन बुधवार (20 मार्च 2019) को धूमधाम के साथ चित्रांशों ने होली मिलन समारोह में भाग लिया। वरीय नागरिक  दयानंद श्रीवास्तव की अध्यक्षता में  सत्येन्द्र नारायण प्रसाद (ललन बाबू) के निवास पर आयोजित होली मिलन समारोह में  उपस्थित  चित्रांश / चित्रांशियों ने आपस में रंग / गुलाल लगाकर एक दूसरे को शुभकामनाएँ दी और लजीज व्यंजनों का आनंद उठाया।  फगुआ गीत गाकर चित्रांशों ने एक दूसरे को गले भी लगाया।  अरूण कुमार  सिन्हा ने इस  समारोह में गीत, गजल एवं कविता का गायन कर समा बांध दिया। प्रदेश द्वारा प्राप्त निदेश के अनुसार दुमका में अभाकाम के प्रमंडलीय बैठक आहूत करने हेतु तिथि का निर्धारण आगामी बैठक में किया जाएगा। इस समारोह में महासचिव विनय कुमार, शान्तनु सरकार, निशिकांत बरियार, राजीव कुमार श्रीवास्तव, वरीय पत्रकार  व मीडिया प्रभारी अभाकामहा के  जय कुमार घोष, मनोज कुमार घोष, समीर कुमार सिन्हा, अरूण कुमार सिन्हा, रमन कुमार वर्मा, शैलेन्द्र नारायण प्रसाद, अमन श्रीवास्तव, आस्था सिन्हा, सुमित सिन्हा, अक्षिता सिन्हा, अनुभा सिन्हा, सोनम सिन्हा, एकता सिन्हा, आयशी, दिव्यांश सिन्हा, नीरज कुमार सिन्हा, वन्दना सिन्हा, वीणा श्रीवास्तव, किरण प्रसाद, अनिल कुमार सिन्हा, बाॅबी सिन्हा, सत्येन्द्र नारायण प्रसाद, शीतल सिन्हा, राजीव रंजन श्रीवास्तव, राजाराम, आलोक कुमार, अमरेन्द्र कुमार, अजय कुमार सिन्हा, प्रणय कुमार श्रीवास्तव, खुशी श्रीवास्तव, शिप्रा श्रीवास्तव, अर्चना दास एवं अनेक चित्रांश उपस्थित हुए। वक्ताओं ने इस अवसर पर कहा कि  होली के दूसरे दिन चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपद़ा को धुलेंडी यानी कि खेलने वाली होली मनाई जाती है। धुलेंडी के दिन लोग एक दूसरे को सुबह उठकर गुलाल लगाने जाते हैं। इस दिन छोटे अपने बड़ों से गुलाल लगाकर आशीर्वाद लेते हैं। इस दिन लोग एक दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि फेंकते हैं और पारम्परिक रूप से होली मनाते हैं। इस दिन घर-घर जा कर लोगों को रंग लगाया जाता है। धुलेंडी के दिन भारत देश के गली मोहल्लों में ढोल बजा कर होली के गीत गाये जाते हैं और नाच-कूद किये जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि होली के दिन लोग अपने गले-शिकवे और आपसी कटुता भूल कर एक दूसरे से गले मिलते हैं और पुनः दोस्त बन जाते हैं। रंगों से होली खेलने और नाचने-गाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद लोग नहा-धोकर थोड़ा विश्राम करने के पश्चात् नए कपड़े पहन कर सांझ में एक दूसरे के घर मिलने जाते हैं। लोग अपनी कटुता भुलाकर गले मिलते हैं और एक दूसरे को होली पर पारम्परिक रूप से बनायी जाने वाली गुजिया और अन्य मिठाइयां खिलाते हैं।

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