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गुरुवार, 21 मार्च 2019

बिहार : गांव की आवाज उठाने में सहायक है एमआईएस, आईजीएसएसएस से क्षमता निर्माण का समर्थन

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पटना,21 मार्च। सबसे पहले इंडो ग्लोबल सोशल सर्विस सोसाइटी (आईजीएसएसएस) को धन्यवाद दिया जा सकता है। जो सीमित संसाधन के बल पर सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देने में सफल रहा। एमआईएस प्रशिक्षण में जिला और प्रखंड स्तर के कार्यकर्ताओं को शामिल किया। इसके बाद वर्क रिव्यू कार्यक्रम में जिला स्तर के प्रतिनिधि और लेखापाल को शामिल किया। दोनों कार्यक्रम में सहयोग प्राप्त करने वाली संस्था के प्रतिनिधयों को बहुत लाभ मिला। उनके लिए कार्यक्रम सार्थक साबित हो रहा है। समयाभाव के कारण फोलोअप नहीं हो सका। जो अहितकर साबित नहीं हुआ। अगर फोलोअप होता तो स्पीड बना रहता। कोई बात नहीं है। इस साल उम्मीद है कि आपके द्वारा क्षमतावर्द्धक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। आपके आग्रह पर यह प्रस्ताव आपके समक्ष प्रस्तावित है। यह जरूरत है कि सबसे पहले लीडरशीप कार्यक्रम रखा जाए। यह तीन दिवसीय हो। इसमें जिला और प्रखंड स्तरीय कार्यकर्ता को शामिल किया जा सकता है। इसका विषयवस्तु सामाजिक एवं आर्थिक विषय रखा जाए। इसमें विशेष तौर पर विश्लेषण करते हुए कार्यक्रम को आगे की ओर बढ़ा जाए। इस तरह का कार्यक्रम महानगर में न हो। राज्य अथवा जिला में ही आयोजित हो। किसी सहयोगी संस्था को संचालन करने का दायित्व सौंपा जाए। प्रतिभागियों को सुनिश्चित किया जाए कि वे निश्चित समय पर कार्यक्रम में आए और कार्यक्रम के समापन पर ही जाए। ऐसी ही व्यवस्था होनी चाहिए। कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों की भाषा के अनुसार ही ट्रेनर की व्यवस्था किया जाए। ऐसा करने से ट्रेनिंग देने वाले व ट्रेनिंग लेने वाले प्रतिभागियों को विषय की अच्छी जानकारी मिलेगी और तब बेहतर ढंग से विषय ग्रहण करके जा सकेंगे। ऐसा करने से नेतृत्व क्षमता विकसित होगा। प्रशिक्षण लेने के बाद नया विचार प्राप्त होगा। इसको लेकर पूर्ण जोश से कार्य क्षेत्र में लागू करेंगे। जो आईजीएसएसएस और संस्था के उद्धेश्य को लागू करने में मदद मिलेगी।यहां से ट्रेनिंग लेकर कार्यक्षेत्र में आकर लोगों का नेतृत्व अच्छी तरह से कर सकेंगे। 

दस्तावेज प्रशिक्षण
जिसे आईजीएसएसएस के द्वारा सहयोग मिल रहा है। उससे सहयोग करने वाले अपेक्षा रखते हैं कि बेहतर ढंग से रिपोर्ट मिले। तो जरूरी है कि बेसिक और आधुनिक रूप से दस्तावेज तैयार करने की जानकारी दी जाए। यह प्रशिक्षण से ही संभव है। इसके आलोक में प्रशिक्षण दिया जाए। इसमें किस तरह से रिपोर्ट तैयार हो और क्यों तैयार करें पर ही केन्द्रित हो। उसे सहयोग करने वाले को किस तरह से प्रस्तुत करें।एक दस्तावेज तैयार करने में क्या क्या जरूरी है? इन दस्तावेज से कैसे केस स्ट्डी तैयार किया जा सकता है। फोटो दस्तावेज के बारे में भी जानकारी दिया जाए। दूसरे पाठ में एडवोकेशी को भी शामिल किया जाए। एक ही प्रशिक्षण के दरम्यान दस्तावेज व एडवोकेशी पर ट्रेनिंग दिया जा सकेगा। पांच दिनों का ट्रेनिंग हो। इसमें संस्था के सचिव व जिला स्तर पर प्रतिनिधित्व करने वाले शामिल हो सकते हैं। दो भाषीय ट्रेनर हो सकते हैं। ऐसा करने से कार्य में निखार आ जाएगा। इसमें भाग लेने वाले अपना अनुभव पेश करेंगे। इसके लिए दस्तावेज साथ में लेकर आ सकते हैं।

लाइवलीहुड पर प्रशिक्षण
इसमें लैंड और नन लैंड को लेकर प्रशिक्षण दिया जाए। जिनके पास लैंड नहीं है। वे लोग किस तरह से आजीविका के साधन उपलब्ध करा सकते हैं। विस्तार से आजीविका कार्य शुरू करने से परिणाम आने अंत तक प्रशिक्षण का प्रशिक्षण दिया जाए। उसी तरह जिनके पास लैंड है वे कैसे आजीविका का साधन उत्पन्न कर सकते हैं। सरकार से प्राप्त अनुदानों को किस तरह से प्राप्त कर सकते हैं। जैविक खेती कैसे करेंगे। जैविक खेती करने से लाभ को विस्तार से जिक्र किया जाए। दोनों स्तर के कार्य में किस तरह से लोगों को जोड़ा जा सकता है। इसमें महिला, पुरूष और युवाओं को 365 दिन रोजगार दिया जा सकें। लोगों को कैसे सामाजिक सुरक्षा योजना से लाभ दिलवाया जा सकता है।  इस पर विस्तार से जानकारी देंगे। बचत समूह कैसे निर्माण हो? सामूहिक खेती कैसे हो? घर बाजार में अपने निर्मित उत्पाद को कैसे बेच सकते हैं। बकरी पालन, गाय पालन, सुआर पालन आदि पर भी जानकारी दिया जाए। किचन गार्डेन को विस्तार करने के उपाय भी बताया जा सकता है।मनरेगा के बारे में भी जानकारी देंगे। ऐसा करने से हर स्तर के रोजगारों को लोगों को जोड़ा जा सकेगा। इससे लोग खुद्दार होंगे। दैनिक आहार में भी सुधार होगा। ग्रामीण क्षेत्र के महाजन, वकील,पुलिस,पुजारी और नेता के चंगुल से मुक्त होंगे।ं इसमें जिला और प्रखंड स्तर के कार्यकर्ताओं शामिल होंगे। इनके साथ गांवघर में गठित सामुदायिक आधारित संगठन सीबीओ के प्रतिनिधि। उन सीबीओ से एक-दो लीडर को भी शामिल किया जा सकता है। जो यहां से प्रशिक्षण लेकर घर जाएंगे। सीबीओ की बैठक में लोगों को बता सकते हैं। इसमें प्रखंड कार्यकर्ता भी सहयोग करेंगे। दो स्तर के अन्य लोगों को प्रशिक्षण या बैठक में बता सके। 

एमआईएस
आईजीएसएसएस के द्वारा एमआईएस पर प्रशिक्षण दिया गया। इसका समय के अभाव में फोलोअप नहीं किया जा सका। यह एक नवाचार था एमआईएस का प्रशिक्षण। इसका बेहतर ढंग से संचालन नहीं हो सका। इसमें व्यवधान उत्पन्न हो जा रहा था। इसमें आये व्यवधान को दुरूस्त करने की जरूरत है। यह इस साल जरूरी है कि फोलोअप किया जाए। ताकि एमआईएस का बेहतर ढंग से इस्तेमाल कर सके। दुबारा सीख जाने से स्पीड पकड़ा जा सकता है। ऐसा करने से प्रतिभागी सहजता से सामग्री को एमआईएस में अपलाॅड करने लगेंगे। सहयोग देने और सहयोग लेने वाली संस्था के लिए बेहद लाभप्रद टूल्स है। सही मायने में यह बहुत ही अच्छा टूल्स है। जो संस्था की क्रियाकलाप को डाला जा सकता है। एक क्लिक में लोग क्रियाकलाप को देख सकेंगे। यह टूल्स कार्य को पारदर्शिता बनाने में सक्षम है। इसे देखकर लोग सबक ले सकते हैं। कुछ सुझाव भी दे सकते हैं। किये गए कार्य को व्यवहार में परिणत भी कर सकते हैं। इस लिए जरूरी है कि टूल्स को अप टू डेट करके रखा जाए। यह तब जी संभव है जब एमआईएस चालू रहे। यह विश्वास किया जाता है कि आईजीएसएसएस के द्वारा फोलोअप ट्रेनिंग की व्यवस्था करायेगी। इससे गांव के लोगों को भी बेहद लाभ होगा। उनकी आवाज को ग्लोबल बनाया जा सकता है। उनकी आवाज पर सुनवाई भी संभव है।  

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