विदिशा (मध्यप्रदेश) की खबर 12 नवंबर - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 12 नवंबर 2019

विदिशा (मध्यप्रदेश) की खबर 12 नवंबर

खुशियों की दास्तां : देवी सिंह को पीपीओ की द्वितीय प्रति तीन दिन में मिली 

सेवानिवृत्त शिक्षक देवी सिंह दूसरो की गलतियों से इतने हताश हो गए थे कि प्रशासन के प्रति उनका विश्वास कम होने लगा था देवी सिंह ने जब जन सुनवाई में अपना आवेदन दिया तब वस्तुस्थिति से अवगत होने के उपरांत कलेक्टर की विशेष पहल पर जिला कोषालय के माध्यम से सेवानिवृत्त शिक्षक देवी सिंह को तीन दिवस के भीतर पीपीओ की द्वितीय प्रति ही नही मिली बल्कि पेंशन मिलना शुरू हो गई है। ग्राम बरखेडाजागीर की शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से तीस नवम्बर 2018 को शिक्षक पद से रिटायर्ड हुए देवी सिंह अपनी पेंशन को शुरू कराने के लिए तमाम दस्तावेंज  पीपीओ सहित जारी किए गए थे किन्तु भारतीय स्टेट  बैंक शमशाबाद शाखा से पीपीओ गुम जाने के कारण पीपीओ की द्वितीय प्रति जारी करने के लिए देवी सिंह आए दिन मशक्कत में लगे हुए थे और करीब एक साल तक उन्हें पीपीओ की द्वितीय प्रति प्राप्त नही होने के कारण पेंशन से वंचित हो रहे थे। हताश होकर जब कही काम नही बना तो उन्होंने जनसुनवाई को अपना सहारा मानते हुए कलेक्टर को अपनी वस्तुस्थिति से अवगत कराया। कलेक्टर की पहल पर देवी सिंह को तीन दिन में ही पीपीओ की द्वितीय प्रति संभागीय पेंशन अधिकारी कार्यालय भोपाल के द्वारा जारी की गई है। उपरोक्त कार्य में जिला कोषालय अधिकारी के द्वारा किए गए प्रयासों के फलस्वरूप सेवानिवृत्त शिक्षक देवी सिंह को पीपीओ की द्वितीय प्रति सुगमता से मिल पाई है। द्वितीय प्रति मिल जाने के उपरांत देवी सिंह का कहना है कि जहां मैं पहले पढ़ाते समय बच्चों को प्रेरित करता था सेवानिवृत्ति के बाद जहां मुझे आर्थिक संकटापन एवं शारीरिक क्षमता की शिथिलता के कारण हताश हो रहा था ऐसे समय प्रशासन के द्वारा किए गए प्रयासों से मुझे पुनः स्पूर्तिवान बनाया है और मेरा विश्वास जागृत किया है। 

खुशियों की दास्तां :  खेलों के क्षेत्र में कुमारी खुशी ने रचा इतिहास

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स्कूलों में लगातार बेहतर खेल सुविधाएं मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों की शैक्षणिक संस्थाओं में अध्ययरनत विद्यार्थी खेल विधाओं के माध्यम से अब राष्ट्रीय स्तर पर अपना हुनर दिखा रहे है। बासौदा के शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 11वीं में अध्ययनरत छात्रा खुशी मलैया ने खेलों के क्षेत्र में जिले का नाम गौरवान्वित करते हुए इतिहास रचा है। खेल सुविधाओं का लाभ लेकर लगातार अभ्यास कर खुशी ने राष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता में प्रदेश की टीम में अपना स्थान पक्का किया है।  संस्थान के खेल प्रभारी शिक्षक अभय शर्मा के मार्गदर्शन में लगातार अभ्यास करने के फलस्वरूप राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने हेतु प्रदेश स्तर पर चयनित छात्रा खुशी का कहना है कि तीन बहनों में मैं ही खेलों में ज्यादा रूचि लेती हूं आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की होने के बावजूद शिक्षक द्वारा मुझे सदैव खेल के क्षेत्र में प्रोत्साहित किया गया है। जिसका परिणाम है कि प्रदेश की टीम में मुझे आलराउण्डर के रूप में चयनित किया गया है। नौ दिन की प्री नेशनल कोचिंग  में भाग लेने हेतु रवाना हुई खुशी का कहना है कि खेलो के क्षेत्र में जिले का नाम नीचे नही होने दूंगी। 

बिजली फाल्ट एवं बिल शिकायते सुगमता से दर्ज कराएं

बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतो की त्वरित प्राप्ति हेतु ऊर्जा विभाग द्वारा किए गए नवाचार से उपभोक्तागण लाभांवित हो रहे है और उनकी बिजली फाल्ट एवं बिल संबंधी शिकायते सुगमता से दर्ज ही नही हो रही बल्कि उनका निदान भी त्वरित हो रहा है। मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के उप महाप्रबंधक श्री अवधेश त्रिपाठी ने बताया कि बिजली फाल्ट एवं बिलों की शिकायतों के लिए उपभोक्तागण टोल फ्री नम्बर 1912 और 0755-2551222 के साथ ही मोबाइल एप उपाय पर भी शिकायते दर्ज कराने की सुविधाएं प्रदान की गई है। एप से उपभोक्ता अपनी शिकायते सीधे कॉल सेन्टर में दर्ज करा सकते है। कंपनी के आईटी विभाग द्वारा इस एप के जरिए उपभोक्ताओं को बिजली बिल भुगतान के अलावा विद्युत अवरोध एवं बिलिंग संबंधी शिकायते दर्ज कराने की सुविधाएं उपलब्ध कराई है। इसके अलावा वाट्सअप नम्बर 6267437536 पर अपना नाम, सर्विस क्रमांक, पता, फोन नम्बर आदि के साथ संक्षिप्त शिकायत भी उपभोक्ता भेज सकते है। 

नसबंदी पखवाडा आयोजन पूर्व प्रशिक्षित हुआ स्वास्थ्य अमला

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महिलाओ की फैमिली प्लानिंग संबंधी कार्यो को सुव्यवस्थित रूप से सम्पन्न कराने हेतु स्वास्थ्य विभाग के अमले को प्रशिक्षित किया जा रहा है। गत दिवस इस प्रकार का प्रशिक्षण लटेरी के सीएससी में आयोजित किया गया था जहां बीएमओ डॉ बघेल के द्वारा विकासखण्ड के समस्त सुपरवाईजर, एएनएम, एमपीडब्ल्यू एवं समस्त स्टाफ, आशा सहयोगी एवं आशा कार्यकर्ताओं को एनएसव्हीटी पखवाडा के सफल क्रियान्वयन हेतु प्रशिक्षित कर मार्गदर्शन दिया है। 

जिले के लिए एलटीटी सर्जन उपलब्ध हुए

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ केएस अहिरवार की पहल पर जिले के लिए चार एलटीटी सर्जन क्षेत्रीय संचालक के द्वारा नाम दर्ज ड्यूटी लगाए जाने का आदेश जारी किया गया है।   चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ अहिरवार ने बताया कि विदिशा जिले में कोई भी एलटीटी सर्जन उपलब्ध नही होने के कारण नसबंदी सेवा प्रदायगी नही हो पा रही थी जिससे विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पत्राचार कर अवगत कराया गया तदोपरांत स्वास्थ्य सेवाएं क्षेत्रयी संचालक के द्वारा विदिशा में नसबंदी सेवा प्रदायगी हेतु जिन एलटीटी सर्जन की ड्यूटी लगाई गई है उनमें भोपाल जिले की एलटीटी सर्जन डॉ ज्योति खरे तथा डाक्टर परवेज खॉन के अलावा जय प्रकाश चिकित्सालय भोपाल के शल्य क्रिया विशेषज्ञ डॉ आरके बड़वे तथा रायसेन जिले के एलटीटी सर्जन डॉ दिनेश खत्री शामिल है।

टीकाकरण सत्र का निरीक्षण 

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स्वास्थ्य विभाग के द्वारा ग्राम स्तर पर किए जाने वाले टीकाकरणों के कार्यो की क्रास मानिटरिंग जिले में की जा रही है। उपरोक्त कार्य में महिला एवं बाल विकास विभाग के अमले का भी सहयोग लिया जा रहा है। आंगनबाडी कार्यकर्ता एएनएम, आशा सहायिका के स्वास्थ्य संबंधी कार्यो का खासकर टीकाकरण की उपलब्धियों का परीक्षण निरीक्षण जारी है।

आशा को प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान 

राष्ट्रीय वाहक जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में डेंगू एवं चिकुनगुनिया (लार्वा सर्वे, लार्वा विनिष्टकरण संबंधी कार्य) के क्रियान्वयन में सहयोग करने वाली तथा मरीजो की देखभाल हेतु आशाओं को प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के उप संचालक के द्वारा ततसंबंध में दिशा निर्देश जारी किए गए है।  मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ केएस अहिरवार ने ई वित्त साफ्टवेयर में आवंटित राशि एवं दिशा निर्देशानुसार कार्यवाही करने के निर्देश स्थानीय स्तरों पर प्रसारित किए है ताकि संबंधितों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान समय सीमा में किया जा सकें। ज्ञातव्य हो कि प्रत्येक आशा को तीन सौ रूपए प्रति मरीज के अनुसार राशि देय होगी। 

समेकित बाल संरक्षण योजनाओं की समीक्षा बीस को  

 जिले में क्रियान्वित समेकित बाल संरक्षण योजनाओं की समीक्षा बैठक 20 नवम्बर को भोपला में आयोजित की गई है कि जानकारी देते हुए विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री बृजेश शिवहरे ने बताया कि उक्त बैठक में दत्तक ग्रहण योजना, बाल देखरेख संस्थाओं की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा जिला स्तर पर मानिटरिंग एवं ब्लाक तथा ग्राम स्तर पर गठन के कार्यो के साथ-साथ योजनाओं के प्रचार प्रसार हेतु किए गए नवाचार, किशोर न्यायनिधि इत्यादि शामिल है। 

बाल रंग मेले का आयोजन 14 को

14 नवम्बर बाल दिवस को महिला एवं बाल विकास विभाग के द्वारा परियोजना स्तर एवं आंगनबाडी केन्द्रों पर बाल रंग मेले के रूप में आयोजन किया जाएगा। ततसंबंध में विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी के द्वारा आवश्यक दिशा निर्देश के साथ-साथ आयोजन हेतु किए जाने वाले प्रबंधों से संबंधितों तक सूचनाएं संप्रेषित की गई है।

शाला त्यागी किशोर बालिकाओ की जानकारी उपलब्ध कराएं 

जिले में शाला त्यागी किशोरी ऐसी बालिकाएं जिनकी उम्र 11 से 14 वर्ष तक की है कि गणना महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से सेक्टरवार की जा रही है। ततसंबंध में विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा सभी परियोजना अधिकारी को पत्र प्रेषित कर उन्हें 11 से 14 वर्ष की शाला त्यागी किशोरी बालिकाओं की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए है। 

पोषण अभियान के कार्यो का सत्यापन 

 महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त श्री अनुपम राजन के द्वारा जिले के समस्त परियोजना अधिकारी को निर्देश प्रसारित किए गए है कि भारत सरकार द्वारा पोषण अभियान के अंतर्गत अगस्त 2019 तक की समुदाय आधारित गतिविधियां जिसमें गोद भराई, अन्नप्राशन एवं सुपोषण दिवस आयोजन के कार्यो का सत्यापन किया जाना है। इसके लिए विश्व बैंक द्वारा नामनित प्रतिनिधि प्रदेश के किसी भी चयनित दो आंगनबाडी केन्द्रों का 18 से 22 नवम्बर में भ्रमण कर जायजा लेंगे। ततसंबंध में आवश्यक कार्यवाहियां पूर्व में ही सुनिश्चित करने के निर्देश उनके द्वारा जारी किए गए है।

एक शाला एक परिसर के तहत विद्यालयों में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएं  

 राज्य शासन द्वारा एक ही परिसर में संचालित शालाओं का संचालन एक शाला के रूप में करने का निर्णय लिया गया है। जिले में  जहां कक्षा- 1 से कक्षा 12 तक की कक्षाएं संचालित होती है, जिनका संचालन हायर सेकेण्डरी स्कूल के प्राचार्य के माध्यम से किया जाना है। सीईओ जिला पंचायत  ने इन चिन्हित स्कूलों में विद्युतीकरण , पेयजल, अतिक्रमण, बाउण्ड्रीवाल तथा पहुंच मार्ग की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु प्राचार्यो के साथ बैठक की। उन्होंने जिन शालाओ में पहुच मार्ग की आवश्यकता है वहां सुदूर सडक योजना के तहत कार्य स्वीकृति करने के निर्देश सीईओ जनपद पंचायत को दिए। आपने पेयजल , विद्युत संबंधी समस्याओं का निराकरण संबंधित अधिकारियों को करने के दिए। साथ ही जिन शालाओ में बाउण्ड्रीवाल या अन्य अधोसंरचना की समस्यां है वहां का प्रस्ताव तैयार कराकर राज्य शासन को भेजने के निर्देश दिए।  
मध्यप्रदेश में  संकटापन्न और दुर्लभ वृक्ष प्रजाति संरक्षण

देश में सर्वाधिक वन क्षेत्र मध्यप्रदेश में है। प्राचीनकाल से ही मध्यप्रदेश में जड़ी-बूटियों की बहुतायत रही है। विगत कई वर्षों में हुए शोध और अध्ययन में प्रदेश के वन क्षेत्रों में लगभग 216 वृक्ष प्रजातियाँ पाई गई हैं। इनमें से 32 प्रजातियाँ संकटापन्न और दुर्लभ स्थिति में हैं। वन विभाग ने 14 संकटापन्न और 18 विलुप्ति की कगार पर पहुँची वृक्ष प्रजातियों को बचाने के हर संभव प्रयास शुरू कर दिये हैं। इन प्रजातियों का औषधीय और वन्य-प्राणियों के लिये चारे का महत्व होने के साथ वनवासियों की परम्पराओं, रीति-रिवाजों और विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति से भी गहरा संबंध है। जैव-विविधता की दृष्टि से इनका स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र में भी महत्वपूर्ण स्थान है। अध्ययन में संकटापन्न वृक्ष प्रजातियों को 4 वर्गों-अत्यधिक खतरे में, संवेदनशील और दुर्लभ/खतरे के नजदीक वर्ग में विभाजित किया गया है। प्रदेश में 3 प्रजातियाँ दहिमन, शल्यकर्णी और मेंदा को अत्यधिक खतरे वाली प्रजाति में रखा गया है। शल्यकर्णी वृक्ष की पत्तियाँ महाभारत के युद्ध में सैनिकों के घाव को भरने के लिये ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध भी हैं। इसकी छाल और पत्ती शारीरिक दर्द, मधुमेह, बवासीर, गंजापन, कैंसर में भी उपयोग करते हैं। मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने 27 सितम्बर को भोपाल में वृक्ष महोत्सव के दौरान अन्य दुर्लभ प्रजातियों के साथ इस पौधे को भी रोपा है। दहिमन का प्रयोग स्त्री रोग, रक्त विकार, ह्रदय विकार, रक्तदाब, चर्मरोग और विष विकार में किया जाता है। मेंदा छाल और पत्ती का प्रयोग कैंसर, ह्रदय रोग, बवासीर, हड्डी टूटना और पशु रोग में होता है। खतरे वाली प्रजातियों में सोनपाठा, गरुड़ वृक्ष, बीजा और लोध शामिल हैं। सोनपाठा या अरलू वृक्ष की जड़, छाल, पत्ती और फल का औषधीय प्रयोग होता है। इससे बनी दवाइयों का प्रयोग उदर विकार, घायलावस्था, श्वांस रोग, वातरोग और मिर्गी दूर करने में होता है। गरुड़ या सोनपाडर की जड़, पत्ती और फल का उपयोग उदर विकार और सर्प विष दूर करने वाली दवाइयों में होता है। बीजा वृक्ष की लकड़ी और गोंद उपयोगी हैं। गोंद का प्रयोग मधुमेह, उदर विकार, रक्तदाब और पुरुष रोग में होता है, जबकि लकड़ी का उपयोग ढोलक बनाने में होता है। लोध वृक्ष का उपयोगी भाग छाल और फूल हैं। इनका प्रयोग बुखार, कफ, ह्रदय रोग, रक्तदाब, सूजन, स्त्री और चर्म रोग में किया जाता है।  संवेदनशील प्रजातियों में कुम्भी, पीला पलाश, खरपट, पाडर, कुल्लू, रोहिना और शीशम शामिल हैं। कुम्भी की जड़, छाल और फल का उपयोग सर्पदंश, परिवार नियोजन, बुखार, कुष्ठ रोग और घाव भरने की दवा बनाने में किया जाता है। पीला पलाश या गबदी की छाल और गोंद का प्रयोग चर्म, मिर्गी रोग और उदर विकार औषधि में किया जाता है। खरपट या केंकड की छाल का प्रयोग किडनी, कैंसर और श्वांस की औषधियों में होता है। पाडर या अर्धपाकरी वृक्ष की छाल, पत्ती और फल से नेत्र और मानसिक विकार की आयुर्वेदिक औषधियाँ तैयार की जाती हैं। कुल्लू की छाल और गोंद का प्रयोग उदर विकार, ह्रदय रोग, अस्थिभंग और पशु चिकित्सा में करते हैं। रोहन या रोहिना वृक्ष की छाल रक्तदाब, ह्रदय, लीवर, प्रसूति और वात रोग की औषधियों में करते हैं। शीशम की लकड़ी का प्रयोग फर्नीचर में सर्वविदित है परंतु बहुत कम लोग जानते हैं कि इसकी छाल और पत्ती पुरुष रोग और चर्म रोग के लिये औषधि निर्माण में बहुत उपयोगी है। खतरे के नजदीक वृक्ष श्रेणी में धावड़ा, सलई, भिलवा, गधा पलाश, धामन, निर्मली, अंजन, मोखा, तिंसा, खरहर, भेड़ार, अचार, कुसुम, भुडकुट, खटाम्बा, पीपरी बड़ प्रजाति और बड़ प्रजाति शामिल है जबकि हल्दू खतरे में (एन्डेंजर्ड) प्रजाति में शामिल है। हल्दू की छाल और पत्ती का प्रयोग पुरुष रोग और चर्म रोग औषधि तथा लकड़ी फर्नीचर बनाने में काम आती है।  धावड़ा या धवा की छाल श्वांस रोग औषधि में प्रयोग की जाती है। धवा की लकड़ी बहुत मजबूत होने के कारण इसका उपयोग कृषि उपकरण बनाने में होता है। इसकी लकड़ी बहुत देर तक जलने के कारण भी मशहूर है। सलई वृक्ष की छाल, बीज और गोंद का प्रयोग टी.बी., घायलावस्था और वात रोग की दवाइयाँ बनाने के साथ खाद्य पदार्थ और सौंदर्य प्रसाधन में भी किया जाता है। भिलवा या भिलमा वृक्ष की छाल और बीज का प्रयोग बाल एवं चर्म रोग के साथ स्याही बनाने में भी होता है।  गधा पलाश वृक्ष के छाल, पत्ते और फूल का प्रयोग सूजन, खून की कमी, पुरुष रोग और पशु रोग में होता है। कुचला या निर्मली वृक्ष के बीज का प्रयोग कैंसर, वात और चर्म रोग में होता है। इसका बीज काफी विषैला होता है। अंजन वृक्ष के सभी 5 भागों का प्रयोग स्त्री रोग और विष विकार में होता है। मोखा वृक्ष के फल का प्रयोग नेत्र विकार में करते हैं। तिंसा वृक्ष की छाल का उपयोग उदर विकार और निमोनिया में करते हैं। इसकी छाल का प्रयोग मछली पकड़ने में किया जाता है।  खरहर वृक्ष की छाल और पत्ती का उपयोग उदर, यकृत विकार, घाव भरने और पशुओं के तिलबढ़ रोग में होता है। भेड़ार वृक्ष की जड़ और फल का प्रयोग उदर और लिवर की बीमारी में होता है। अचार वृक्ष की छाल और बीज का उपयोग उदर विकार औषधि के साथ खाद्य पदार्थों में भी होता है। कुसुम वृक्ष की छाल और बीज का उपयोग विष विकार, पशु रोग और चर्म रोग में होता है। भुडकुट वृक्ष की जड़, छाल और बीज का प्रयोग सर्पदंश, पुरुष रोग, शीतवात और सूजन की दवा बनाने में होता है। खटाम्बा वृक्ष की जड़, छाल और फल का प्रयोग ह्रदय रोग, रक्तदाब, स्त्री रोग एवं उदर रोग में किया जाता है। पीपरी बड़ प्रजाति वृक्ष की छाल और पत्ती का प्रयोग मधुमेह, घाव भरने एवं मुँह के छालों में किया जाता है। बड़ प्रजाति वृक्ष की जड़, छाल एवं पत्तों का प्रयोग बुखार, चर्म रोग, घाव भरने और मुँह के छालों में किया जाता है।

65वीं राष्ट्रीय शालेय प्रतियोगिता का आयोजन 13 से

विदिशा जिले की शमशाबाद तहसील में 65वीं राष्ट्रीय शालेय व्हालीबाल प्रतियोगिता 13 नवम्बर से शुरू होगी। शुभांरभ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश के कुटीर एवं ग्रामोद्योग, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री एवं  जिले के प्रभारी मंत्री हर्ष यादव होंगे। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता विदिशा विधायकश्री शशांक भार्गव करेंगे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि बासौदा विधायक श्रीमती लीना जैन, कुरवाई विधायक श्री हरिसिंह सप्रे, सिरोंज विधायक श्री उमाकांत शर्मा, शमशाबाद विधायक श्रीमती राजश्री रूद्रप्रताप सिंह, विदिशा जिला पंचायत अध्यक्ष श्री तोरण सिंह दांगी, शमशाबाद नगर परिषद अध्यक्ष श्री कृष्ण कुमार माहेश्वरी के आतिथ्य में सम्पन्न होगा।  प्रतियोगिता के संगठन सचिव एवं जिला शिक्षा अधिकारी श्री एसपी त्रिपाठी ने बताया कि प्रतियोगिता शमशाबाद के शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रागंण में प्रातः 11 बजे से शुरू होगी।

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