महाराष्ट्र विधानसभा में फडणवीस विपक्ष के नेता, पटोले विधानसभा अध्यक्ष बने - Live Aaryaavart

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रविवार, 1 दिसंबर 2019

महाराष्ट्र विधानसभा में फडणवीस विपक्ष के नेता, पटोले विधानसभा अध्यक्ष बने


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मुंबई, एक दिसंबर, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस रविवार को राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता बने, जबकि कांग्रेस विधायक नाना पटोले विधानसभाध्यक्ष चुने गए।  भाजपा के किशन कथोरे के सुबह नामांकन वापस लेने के बाद निर्विरोध विधानसभाध्यक्ष चुने गए पटोले (57) ने घोषणा की कि विधानसभा में फडणवीस विपक्ष के नए नेता होंगे। पटोले ने कहा कि यह नैसर्गिक न्याय है कि जो विपक्ष की गैरमौजूदगी चाहते थे उन्हें अब प्रभावी विपक्ष के तौर पर काम करना होगा। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी सरकार शनिवार को राज्य विधानसभा में बहुमत परीक्षण में कामयाब रही ।  विधायक के तौर पर फडणवीस (49) का यह पांचवां कार्यकाल है जबकि पटोले का चौथा कार्यकाल है।  राकांपा के मंत्री जयंत पाटिल ने पटोले को निर्विरोध चुना जाना सुनिश्चित करने के लिए उम्मीदवार वापस लेने में भाजपा की ओर से दिखायी गयी ‘समझदारी’ की सराहना की। पटोले द्वारा विधानसभा में फडणवीस के विपक्ष का नेता बनने की घोषणा करने के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के चुनाव से पहले किये गये दावे ‘‘मी पुन्हा येईं’’ (मैं वापस लौटूंगा) पर रविवार को कटाक्ष किया। इसे लेकर सोशल मीडिया पर कई मीम्स बनाये गये थे। ठाकरे ने अपने बधाई संदेश में कहा, ‘‘मैंने कभी नहीं कहा कि कि मैं वापस लौटूंगा, लेकिन मैं इस सदन में आया।’’  उन्होंने कहा, ‘‘मैं सदन और महाराष्ट्र के लोगों को आश्वस्त कर सकता हूं कि मैं कुछ भी आधी रात को नहीं करूंगा। मैं लोगों के हितों के लिए काम करूंगा।’’ ठाकरे के इस कटाक्ष को फडणवीस और राकांपा प्रमुख अजित पवार के कुछ दिन पहले जल्दबाजी में सुबह में शपथ लिये जाने के संबंध में देखा जा रहा है। पाटिल ने भी फडणवीस पर निशाना साधा ।  पाटिल ने कहा, ‘‘उन्होंने (फडणवीस) कहा था कि वह लौटेंगे, लेकिन यह नहीं बताया कि वह (सदन में) कहां बैठेंगे।’’  पाटिल ने कहा, ‘‘अब वह वापस लौट आये हैं और (विपक्ष के नेता) शीर्ष पद पर हैं जो मुख्यमंत्री पद के समान है।’’  राकांपा नेता ने विश्वास जताया कि फडणवीस ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस गठबंधन सरकार को हटाये जाने के किसी भी प्रयास का हिस्सा नहीं होंगे। चुनाव से पहले फडणवीस द्वारा दिए गए नारे ‘‘मैं वापस लौटूंगा’’ पर तंज कसने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि उन्होंने ऐसा कहा, लेकिन इसके लिए समय देना भूल गए थे। उन्होंने शायरी करते हुए कहा, ‘‘मेरा पानी उतरते देख किनारे पर घर मत बना लेना, मैं समुंदर हूं लौट कर वापस आऊंगा।’’ 

ठाकरे ने कहा कि वह फडणवीस को ‘‘विपक्ष के नेता’’ नहीं बल्कि ‘‘जिम्मेदार नेता’’ कहेंगे। अगर सब कुछ अच्छा होता तो यह सब (भाजपा-शिवसेना अलगाव) नहीं होता ।  उन्होंने कहा, ‘‘मैंने फडणवीस से बहुत चीजें सीखी हैं और उनके साथ हमेशा मेरी मित्रता रहेगी। मैं आज भी हिंदुत्व की विचारधारा के साथ हूं और इसे कभी नहीं छोड़ूंगा। पिछले पांच साल में मैंने (भाजपा-शिवसेना) सरकार से कभी छल नहीं किया। ’’  फडणवीस ने कहा, ‘‘भाजपा को जनादेश मिला क्योंकि हमारी पार्टी अकेली सबसे बड़ी पार्टी है। राज्य में 21 अक्टूबर के विधानसभा चुनाव में हमारा स्ट्राइक रेट 70 प्रतिशत का रहा लेकिन राजनीतिक गुणा-गणित योग्यता पर भारी पड़ा। जिन्हें चुनावों में 40 प्रतिशत अंक मिले उन्होंने सरकार बना ली।’’  उन्होंने कहा, ‘‘हम इसे लोकतंत्र के हिस्सा के तौर पर स्वीकार कर रहे हैं।’’  फडणवीस ने कहा, ‘‘मैंने यह कहा था कि ‘मैं वापस आऊंगा’ लेकिन मैं इसके लिए आपको समय देना भूल गया। यद्यपि मैं आपको एक चीज का भरोसा दे सकता हूं कि आपको कुछ समय इंतजार करने की जरूरत है।’’  उन्होंने कहा, ‘‘मैंने न केवल पांच वर्षों में कई परियोजनाएं घोषित की बल्कि उन पर काम भी शुरू किया। ... मैं उनका उद्घाटन करने के लिए वापस आ सकता हूं।’’  फडणवीस ने सदन को संवैधानिक एवं विधिक सीमा में काम करने का भरोसा भी दिया। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार का विरोध मैं कुछ सिद्धांतों और बिना किसी निजी एजेंडे के करूंगा।’’  राज्यपाल बी एस कोश्यारी ने राज्य विधानमंडल की संयुक्त बैठक के संबोधन में कहा कि शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस गठबंधन की सरकार बेरोजगारी पर चिंतित है।  उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘‘भूमि पुत्रों’’ के लिए निजी क्षेत्र की नौकरियों में 80 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने को लेकर कानून बनाएगी ।  बहरहाल, शिवसेना सांसद संजय राउत ने पार्टी के मुखपत्र सामना में अपने साप्ताहिक स्तंभ में कहा कि सत्ता हथियाने के लिए फडणवीस की जल्दबादी और बचकाना टिप्पणी के कारण राज्य में भाजपा सरकार डूब गयी और बाद में उसे विपक्ष में बैठना पड़ा। 

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