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शुक्रवार, 8 मई 2020

आई टी साइंट ने इजाद किया क्वॉरेंटाइन ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर, क्वॉरेंटाइन में रहने वाले मरीजों की करेगा निगरानी

सरायकेला खरसावां जिले में प्रवासी मजदूर और छात्र लगातार देश भर के रेड जोन, ऑरेंज जोन से आ रहे हैं. इस बीच होम क्वॉरेंटाइन में विभिन्न जोन से आए इन छात्र और मजदूरों को जिला प्रशासन अब ऑनलाइन जीपीएस के माध्यम से ट्रैकिंग कर रहा है. आईटी कंपनी 'आईटी साइंट' के सहयोग से वेबसाइट और ऐप के माध्यम से क्वॉरेंटाइन लोगों की निगरानी की जा रही है ताकि होम क्वॉरेंटाइन में रहने वाले लोग होम क्वॉरेंटाइन का वायलेशन न करें और इस अवधि को पूरा करें.
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सरायकेला (आर्यावर्त संवाददाता) खरसावां जिले में प्रवासी मजदूर और छात्रों का लगातार आना जारी है. जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इन प्रवासी मजदूरों और छात्रों को 14 दिनों तक होम क्वॉरेंटाइन में रहने का आदेश जारी किया है. इधर, जिला प्रशासन और आईटी कंपनी के सहयोग से क्वॉरेंटाइन ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर का निर्माण किया गया है, जो क्वॉरेंटाइन में रह रहे लोगों के ऑनलाइन मॉनिटरिंग किए जाने के मामले में अब काफी कारगर साबित हो रहा है. सरायकेला खरसावां जिले में प्रवासी मजदूर और छात्र लगातार देश भर के रेड जोन, ऑरेंज जोन से आ रहे हैं. ऐसे में इन मजदूर और छात्रों के स्वास्थ्य की जांच कर उन्हें घर पर सुरक्षित रहने की नसीहत दी गई है. इसके साथ ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इन्हें क्वॉरेंटाइन की अवधि पूरी किए जाने संबंधी आदेश इन लोगों को दिए हैं. इस बीच होम क्वॉरेंटाइन में विभिन्न जोन से आए इन छात्र और मजदूरों को जिला प्रशासन अब ऑनलाइन जीपीएस के माध्यम से ट्रैकिंग कर रहा है. आईटी कंपनी 'आईटी साइंट' के सहयोग से वेबसाइट और ऐप के माध्यम से क्वॉरेंटाइन लोगों की निगरानी की जा रही है ताकि होम क्वॉरेंटाइन में रहने वाले लोग होम क्वॉरेंटाइन का वायलेशन न करें और इस अवधि को पूरा करें. दरअसल, इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से क्वॉरेंटाइन किए गए लोगों के मोबाइल में इस एप्लीकेशन को डाउनलोड किया जाता है, जिसके बाद मोबाइल के डाटा के साथ ऑनलाइन जीपीएस के माध्यम से क्वॉरेंटाइन में रखे गए व्यक्ति का ऑनलाइन लोकेशन लगातार जिला में बने कंट्रोल रूम को दिखता है. इस बीच यदि क्वॉरेंटाइन में रह रहा व्यक्ति अपने कमरे या घर से बाहर निकलता है तो ऑनलाइन जीपीएस के माध्यम से वायलेशन संबंधित मैसेज तुरंत कंट्रोल रूम में पहुंच जाता है, जिसके बाद क्वॉरेंटाइन में रह रहे व्यक्ति को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है. इस एप्लीकेशन और सॉफ्टवेयर के माध्यम से क्वॉरेंटाइन किए गए व्यक्ति को अपने घर में या कमरे में सिर्फ 30 से 100 मीटर की दूरी तक घूमने की आजादी है. इस बीच यदि व्यक्ति 100 मीटर के रेडियस को पार करता है तो तुरंत ऑनलाइन जीपीएस के माध्यम से क्वॉरेंटाइन वायलेशन किए जाने संबंधित मैसेज कंट्रोल रूम तक पहुंच जाता है. क्वॉरेंटाइन ट्रैकिंग एप और सॉफ्टवेयर के माध्यम से जिला प्रशासन को न सिर्फ क्वॉरेंटाइन किए गए व्यक्ति के गतिविधियों का पता चलता है, बल्कि प्रवासी मजदूरों के स्किल और मैन पावर संबंधित जानकारियां भी इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से प्राप्त हो रहे हैं. सॉफ्टवेयर को डेवलपमेंट करने वाले आईटी साइंट के निदेशक सुमंत कुमार सिंह ने बताया कि सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन प्रवासी मजदूरों को सॉफ्टवेयर और एप में रजिस्ट्रेशन के माध्यम से उनके स्किल की भी जानकारियां प्राप्त कर रही है ताकि भविष्य में उन्हें रोजगार आदि भी उपलब्ध कराई जा सके. ऑनलाइन जीपीएस से क्वॉरेंटाइन ट्रैकिंग किए जाने के इस सॉफ्टवेयर और एप को आईटी साइंट के 10 इंजीनियरों की टीम ने विगत 7 दिनों के अंदर तैयार किया है. इस टीम में 2 एंड्राइड डेवलपर और आठ वेब डेवलपर शामिल थे. टेक्निकल टीम में शामिल सदस्य सचिन प्रमाणिक ने बताया कि इस एप के माध्यम से हर 15 मिनट में क्वॉरेंटाइन व्यक्ति के डाटा को ऑनलाइन कंट्रोल रूम में फीड किया जाता है, जिससे पूरी तरह मॉनिटरिंग की जाती है. ऑनलाइन क्वॉरेंटाइन ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर और एप के सफल परीक्षण के बाद अब झारखंड के अन्य कई जिलों के प्रशासन ने कंपनी से संपर्क स्थापित कर इसे अपने-अपने संबंधित जिलों में उपयोग में लाने का प्रपोजल फिलहाल कंपनी के समक्ष रखा है, जिस पर वार्ता चल रही है.

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