गांधी जी के भारत की जोर पकड़ती मांग : रनसिंह परमार - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

गुरुवार, 13 अगस्त 2020

गांधी जी के भारत की जोर पकड़ती मांग : रनसिंह परमार

  • गांधीयन कलेक्टिव गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ताओं का गठजोड़ है जो गांधी की भारत की मांग को लेकर गरीबों के लिए राजनीति पर नैतिक बल दे रहा है और इसके लिए विगत 5 जून से घर से उपवास श्रृंखला प्रारंभ किया है जो 2 अक्टूबर 2020 को समाप्त होगी। इस अभियान में घर-घर गांधी को पहुँचाने की सार्थक प्रयास किया जा रहा है...
dimand-gandhis-india
ग्वालियर। गांधी जी के भारत की मांग के अंतर्गत गरीबों के लिए राजनीति को लेकर एकता परिषद और गांधीयन कलेक्टिव के द्वारा पूरे देश में सत्याग्रह उपवास चल रहा है। इसी क्रम में ग्वालियर में एकता परिषद राष्ट्रीय अध्यक्ष रनसिंह परमार के नेतृत्व में अलग-अलग स्थानों पर सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों द्वारा उपवास किया गया। एकता परिषद राष्टीय अध्यक्ष रनसिंह परमार ने कहा कि सरकार गांव, ग्रामीण, गरीब किसान-मजदूर तथा पर्यावरणीय हितों की अनदेखी कर रही है। कोरोना संकट ने इन पर सबसे अधिक कुठाराघात किया हैं इसके सापेक्ष सरकार की तैयारी बहुत ही कमजोर है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने ‘अंतिम व्यक्ति की भलाई’ का बीज मंत्र दिया है किंतु सरकारे इसकी हमेशा अनदेखी करते चली आ रही है। इनके हितों की संरक्षा और सुरक्षा के लिए सरकार पर नैतिक बल के माध्यम से प्रभावित करने का उपवास सत्याग्रह एक प्रयास है। कोरोना के संकट ने साबित कर दिया कि भारत को गांधी की ओर लौटना चाहिए, तभी आत्मनिर्भरता की बात सभी करने लगे हैं, जिसे महात्मा गांधी स्वावलम्बन के लिए लघु व कुटीर उद्योगों की प्रोत्साहन की बात करते थे। इस उपवास सत्याग्रह के समर्थन में पूरे देश के कई राज्यों आसाम में नयनतारा, मणिपुर में ऋषि अरिबाम, उड़ीसा में स्नेहा मोहंती व भरत भूषण ठाकुर, बिहार में प्रदीप प्रियदर्शी, छत्तीसगढ़ में अरूण भाई, प्रशांत भाई और मध्यप्रदेश में अनीश के.के , झारखण्ड में चुन्नलाल, राजस्थान मे कम्म्दी आदिवासी तथा उत्तरप्रदेश में अनिल भाई के समन्वयन में सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता उपवास कर रहे हैं। मध्यप्रदेश के सागर में दीपक अग्रवाल, गुना में डोंगर शर्मा, शिवपुरी में रामप्रकाश शर्मा, उमरिया में राममित्र पटेल, सीधी में सरोज सिंह, सीहोर में राकेश रतन तथा श्रीराम, रायसेन में सरस्वती उइके, मुरैना में उदयभान सिंह, श्योपुर में रामदत्त सिंह तोमर, अशोकनगर में बलवंत, कटनी में निर्भय सिंह, दमोह में घनश्याम रैकवार व सुजात खान, सतना में संतोष सिंह, शहडोल में धर्मदास और जबलपुर में कस्तुरी पटेल इत्यादि ने उपवास किया। ज्ञात हो कि विश्व आदिवासी दिवस पर एकता परिषद के संस्थापक श्री राजगोपाल जी के नेतृत्व में भी देशव्यापी उपवास हुआ था। गांधीयन कलेक्टिव गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ताओं का गठजोड़ है जो गांधी की भारत की मांग को लेकर गरीबों के लिए राजनीति पर नैतिक बल दे रहा है और इसके लिए विगत 5 जून से घर से उपवास श्रृंखला प्रारंभ किया है जो 2 अक्टूबर 2020 को समाप्त होगी। इस अभियान में घर-घर गांधी को पहुँचाने की सार्थक प्रयास किया जा रहा है।

कोई टिप्पणी नहीं: