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बुधवार, 17 मार्च 2021

देश में विकास वित्त संस्था के गठन का निर्णय

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नयी दिल्ली, 16 मार्च, देश में बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए सरकार ने विकास वित्त संस्था के गठन का निर्णय किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की मंगलवार को हुई बैठक में वित्त मंत्रालय के इस आशय के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गयी । वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बाद में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विकास वित्त संस्था को 20000 करोड़ रुपये की शुरुआती पूंजी दी जायेगी। संसद में इस संबंध में एक विधेयक पेश किया जायेगा। इस संस्था में एक व्यावसायिक बोर्ड होगा। इसके लिए पूंजी बाजार, बीमा कम्पनियों आदि से जुटाई जायेगी। बजट के दौरान इस तरह की संस्था की बात कही गयी थी । श्रीमती सीतारमण ने कहा, “ इस संस्था द्वारा बॉन्ड जारी कर इसमें निवेश किया जाएगा। इससे अगले कुछ वर्षों में तीन लाख करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है। इसमें निवेश करने वालों को कर छूट की सुविधा भी मिलेगी। इसमें पेंशन फंड निवेश कर सकते हैं।” उन्होंने कहा,“ कोई भी पुराना बैंक देश की बुनियादी आधारभूत संरचनाओं वाली बड़ी परियोजनाओं में वित्तीय मदद करने के लिए तैयार नहीं था। करीब 6000 ऐसी परियोजनायें हैं जिन्हें पैसे की ज़रूरत है, यही कारण है कि इस तरह के संस्थान का फैसला लिया गया है।” सरकार के मुताबिक, बैंक के बोर्ड के सदस्यों में क्षेत्र के विशेषज्ञ लोगों को स्थान दिया जाएगा। वित्त मंत्री ने बजट 2021 में विकास वित्त संस्थान का प्रस्ताव रखा था। श्रीमती सीतारमण ने बताया कि इस संस्था का शत-प्रतिशत स्वामित्व सरकार के पास होगा। शुरुआत में इस संस्था में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी सरकार की होगी जो आगे चलकर 26 फीसदी तक हो सकती है लेकिन इससे कम नहीं होगी । श्रीमति सीतारमण ने बैंकों के निजीकरण को लेकर किये गये एक प्रश्न के उत्तर में कहा,“ सभी बैंकों का निजीकरण नहीं किया जा रहा है। देश की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बैंकों का विलय किया जा रहा है। वह देश में भारतीय स्टेट बैंक की क्षमता के बैंक चाहती हैं। विलय के दौरान बैंक कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जायेगी। सभी बैंकों का निजीकरण नहीं होगा और वित्तीय क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम में सरकार का दख़ल रहेगा।” उन्होंने निजीकरण के मामले में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनकी दादी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भले ही बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया हो, लेकिन कांग्रेस ने सिर्फ भ्रष्टाचार का राष्ट्रीयकरण किया है और अपने शासनकाल में जनता के कर के पैसे से एक परिवार को फ़ायदा पहुंचाया है। 





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