किसानों ने केएमपी पर रखा चक्का जाम - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा , झंडा ऊँचा रहे हमारा। देश की आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होने पर सभी देशवासियों को अनेकानेक शुभकामनाएं व बधाई। 'लाइव आर्यावर्त' परिवार आज़ादी के उन तमाम वीर शहीदों और सेनानियों को कृतज्ञता पूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए नमन करता है। आइए , मिल कर एक समृद्ध भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं। भारत माता की जय। जय हिन्द।

रविवार, 7 मार्च 2021

किसानों ने केएमपी पर रखा चक्का जाम

farmer-jam-in-kmp
सोनीपत, 06 मार्च, कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के 100वें दिन किसानों ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए शनिवार सुबह कुंडली-पलवल-मानेसर (केएमपी) जाम कर दिया। किसान पांच घंटे से अधिक समय तक केएमपी-केजीपी के जीरो प्वाइंट पर धरना देकर बैठे रहे। आज सुबह 11 बजने से पहले ही केएमपी पर हजारों किसान एकत्रित हो गए। किसान करीब 200 ट्रैक्टर लेकर केएमपी पर पहुंचे। उन्होंने केएमपी पर ट्रैक्टर खड़े कर जाम कर दिया। महिला भी ट्रैक्टर चलाकर जाम लगाने पहुंची। जाम के चलते अनेक वाहन फंस गए। इस दौरान लबी कतार लगने के बाद ज्यादातर वापस लौट गए। बड़े वाहन हालांकि केएमपी और केजीपी किनारे ही खड़े रहे। शाम को जाम खोलने के बाद ही वह गंतव्य की तरफ गए। किसानों के केएमपी बंद करने के बाद इससे जुड़े राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-44 पर जाम की स्थिति बनी रही। जीटी रोड के बहालगढ़ चौक और मुरथल चौक से पुलिस ने वाहनों को दूसरे मार्गों से भेजा गया। बहालगढ़ से आगे पुलिस ने बैरिकेड रखकर मार्ग को पूरी तरह से बंद कर दिया था। वाहनों को केएमपी पर जाकर किसानों के रोष प्रदर्शन में फंसने से बचाया गया। इस दौरान केएमपी और बहालगढ़ चौक के पास से हजारों वाहन दूसरे मार्गों पर भेजे गए। केएमपी पर जाम के बाद पुलिस-प्रशासन ने केजीपी के इंट्री प्वाइंट को भी बंद कर दिया। संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों ने जीरो प्वाइंट पर ही अस्थाई मंच तैयार कर लिया था। मंच से मोर्चा के नेता युवाओं को लगातार शांति बनाए रखने की अपील करते रहे। किसान नेता डाॅ. दर्शपाल, दलजीत सिंह राजेवाला, बलदेव सिंह सिरसा, सुरजीत सिंह, रामसिंह ने युवाओं को शांति रखने को कहा। उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए भविष्य में आंदोलन को लेकर कड़े निर्णय लेने की चेतावनी दी। किसान नेताओं ने कहा कि कृषि कानून रद्द करवाने के बाद ही वह वापस लौटेंगे। आंदोलन जितना लंबा होगा, किसानों के इरादे उतने ही मजबूत बनते जाएंगे। इस दौरान युवा किसानों ने सरकार का पुतला फूंका और नारेबाजी की। किसानों ने इस दौरान दरियादिली दिखाते हुए बेहद जरूरी काम से जाने वाले वाहनों को आगे निकलने भी दिया। आंदोलन के दौरान कई बार टकराव की स्थिति भी पैदा हुई, लेकिन आंदोलन की अगुवाई कर रहे किसान नेताओं ने स्थिति को संभाल लिया। पंजाब के किसानों ने काले रंग की पगड़ी पहन कर तो हरियाणा के किसानों ने तिरंगे के साथ काले झंडे लहराकर सरकार का विरोध किया। किसानों के ल‌िए केएमपी पर ही लंगर गया।

कोई टिप्पणी नहीं: