भीमा कोरेगांव-एलगार परिषद मामले के आरोपी को रिहा करने की मांग - Live Aaryaavart

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रविवार, 23 मई 2021

भीमा कोरेगांव-एलगार परिषद मामले के आरोपी को रिहा करने की मांग

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मुम्बई. तलोजा जेल में बंद हैं फादर स्टेन स्वामी.स्टेन स्वामी ने बताया कि अधिकारियों ने कथित तौर पर उनके कंप्यूटर से निकाले गए कुछ दस्तावेज भी दिखाए और दावा किया कि इससे उनके संबंध नक्सलियों से जुड़ते हैं. लेकिन स्टेन स्वामी ने नक्सलियों से संबंध होने की बात को ख़ारिज किया और कहा कि ये दस्तावेज़ झूठे हैं और चोरी से उनके कंप्यूटर में डाले गए हैं.भारत में सबसे बुज़ुर्ग हैं फादर स्टेन स्वामी, जिन पर आतंकवाद का आरोप लगाया गया है.वहां उनकी तबीयत बहुत ही खराब होती जा रही है.जेसुइट फादर जोसेफ जेवियर ने फादर को उचित चिकित्सा, देखभाल और रिहाई करने अपील की है. रांची महाधर्मप्रांत में स्थित एक लघु घर में रहते हैं एक जेसुइट पुजारी स्टेन , जिन्होंने अपने जीवन के 60 साल से अधिक समय गरीबों, दलितों और आदिवासियों के अधिकारों के लिए लड़ते हुए बिताया है.उनको 8 अक्टूबर 2020 को गिरफ्तार कर 9 अक्टूबर को तलोजा जेल में डाल दिया गया.तब से जेल में ही है. उन पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत 2018 भीमा कोरेगांव हिंसा में उनकी कथित भूमिका और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से लिंक के लिए गिरफ्तार किया गया.इस समय स्टेन स्वामी उम्र से संबंधित अन्य बीमारियों के अलावा पार्किंसन रोग से भी पीड़ित हैं.जेल में वह कई बार गिर गये. वह दोनों कानों से सुन नहीं पाते हैं. उनकी सर्जरी भी हुई है. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन दोनों ने फादर के लिए न्याय की मांग कर चुके हैं.देश में कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च निकाय सीबीसीआई (कैथोलिक बिशप्स कांफ्रेंस ऑफ इंडिया) के अध्यक्ष सह मुंबई महाधर्मप्रांत के आर्चबिशप, कार्डिनल ओस्वाल्ड ग्रेशियस के नेतृत्व में कुछ बिशप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलकर फादर स्टेन स्वामी के संदर्भ में हस्तक्षेप कर रिहा करने की मांग की थी. तब  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दो टूक कह दिये कि कानून को काम करने दीजिए.


बता दें कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने कम सजा वाले कैदियों को रिहा करने का निर्देश दिया था.कैदियों की रिहाई के लिए पेरोल और अंतरिम जमानत का विकल्प दिया गया था.जो भीमा कोरेगांव-एलगार परिषद मामले में आरोपी 15 कैदियों पर प्रभाव नहीं डाल पाया. इन लोगों को स्वास्थ्य के आधार पर भी जमानत से इनकार कर दिया गया है.अब फादर स्टेन स्वामी के बारे में जो खबर तलोजा जेल से आ रही वह बिल्कुल भी अच्छी नहीं हैं.15 मई को भीमा कोरेगांव-एलगार परिषद मामले में आरोपी 15 कैदियों के परिवार के कई सदस्यों ने एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रेस को संबोधित किया था.बता दें कि पुलिस ने विख्यात कार्यकर्ताओं, कवियों, वकीलों और पादरियों के घरों में एक ही समय में छापा मारा और पांच लोगों को, जिनमें नागरिक अधिकार की हिफाजत के लिए काम करनेवाले प्रसिद्ध नागरिक अधिकार एक्टिविस्ट और दो वकील शामिल थे, हास्यास्पद आरोपों में बेहद कम या बगैर किसी ठोस दस्तावेज के गिरफ्तार कर लिया, तब सरकार को यह जरूर पता होगा कि वह लोगों की नाराजगी को बुलावा दे रही है. फादर जोसेफ जेवियर ने बताया कि कैसे फादर स्टेन स्वामी ने 7 महीनों में कभी भी अपने स्वास्थ्य के बारे में शिकायत नहीं की है. लेकिन 14 मई को पहली बार फादर स्टेन ने अपनी बिगड़ती सेहत के बारे में बताया.इसके अलावा, वह जेल के अंदर जो कुछ भी देख रहा है उससे वह परेशान है.जेसुइट और परिवार के सदस्य उसके स्वास्थ्य को लेकर बहुत चिंतित हैं.जबकि आयुर्वेदिक दवा जेल के अंदर उपलब्ध है, यह तलोजा जेल में अनिश्चित स्वास्थ्य स्थितियों और COVID-19 के प्रसार को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं है. पार्किंसंस से पीड़ित 84 वर्षीय व्यक्ति होने के नाते, सुनने की हानि और अब बुखार, खांसी और पेट में परेशानी है, यह आवश्यक है कि उसे निदान और उपचार के लिए एलोपैथिक दवा और डॉक्टर प्रदान किया जाए.उसे तत्काल COVID-19 का टीका लगवाना है.आधार कार्ड न होने के कारण उसे टीकाकरण से वंचित नहीं किया जा सकता है. जबकि फादर स्टेन को सुनने की समस्या है, उसके साथ संवाद करने के लिए फोन कॉल पर्याप्त नहीं हैं.पत्रों के माध्यम से संचार असंगत हो गया है क्योंकि पत्रों को परिवार और दोस्तों तक पहुंचने में 1 या 2 महीने लगते हैं. 


परिवार के सदस्यों की ओर से उन्होंने राज्य और जेल अधिकारियों से तीन अनुरोध किए - 

1. स्वास्थ्य की स्थिति के दृष्टिकोण से तलोजा जेल की स्थिति की एक सही और स्पष्ट तस्वीर पेश करें और भीमा कोरेगांव गिरफ्तारियों के जीवन की रक्षा करें.उन्होंने कहा कि परिवार और दोस्त कैदियों की चिकित्सा जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार हैं.

2. पत्र और फोन कॉल के माध्यम से जानकारी तक पहुंच को सुगम बनाना और वीडियो कॉल की अनुमति देना ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कैदियों को भावनात्मक समर्थन प्रदान किया जा सके.

3. अंत में, महामारी की स्थिति को देखते हुए, सभी 15 कैदियों को तुरंत जमानत पर रिहा करने की सुविधा प्रदान करें.

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