लॉकडाउन में पोषण वाटिका से बढ़ी आमदनीं - Live Aaryaavart

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शनिवार, 12 जून 2021

लॉकडाउन में पोषण वाटिका से बढ़ी आमदनीं

  • कान्ता रमेश भगोरा की जैविक पोषण वाटिका  

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स्वस्थ्य जीवन ही एक अनमोल सम्पत्ति है मनुष्य के जीवन और उसकी खुशी के लिए स्वास्थ्य ही महत्वपूर्ण है | स्वास्थ्य के बिना किसी अन्य वस्तु की कल्पना करना कठिन है एवं स्वास्थ्य ही किसी समाज के आर्थिक प्रगति के लिए अनिवार्य है | जो भी व्यक्ति अथवा समाज स्वास्थ्य से पिछड़ा हुआ है उसे जीवन मूल्य की स्थापना करना बेहद कठिन होता है | इसी अभियान के तहत वाग़धारा संस्था जैविक किचन गार्डन , खाध्य सुरक्षा , स्वास्थ्य सुरक्षा और पारम्परिक कृषि पद्धति को सक्षम महिला समूह के माध्यम से इन जनजातीय समुदाय के स्वास्थ्य हेतु प्रयासरत  है | इस क्षेत्र में जनजातीय समुदाय की आबादी ज्यादा है और पठारी संरचना और बारहमासी नालों को न होने के कारण 800 – 1000 अच्छी बारिश के बावजूद क्षेत्र में पानी की कमी बनी रहती है | इन जनजातीय समुदाय की आजीविका बढ़ाने हेतु वाग़धारा ने  महिला समूह का गठन किया , ताकि खेती में महिला की भूमिकाओं को सुनिश्चित किया जाये व बाज़ार के ऊपर उनका अवलम्बित्व कम हो जाये , सक्षम समूह के तहत गाँव में खेती उत्प्पदन में वृद्धि करना , परमपरागत खेती को बढ़ावा देना , पोषण वाटिका और बहुद्देशीय पौधे लगाना और उनके प्रति जागरूक करवाना इसी उद्देश्य से सक्षम महिला समूह का गठन किया गया है | कान्ता रमेश भगोरा उम्र 40 वर्ष, गाँव खेरिया पाडा तहसील कुशलगढ़ , जिला बांसवाडा उनके पास 3 बीघा सिंचाई युक्त जमीन है , इसमें  खरीफ़ में मक्का , चावल , सोयाबीन की उपज होती  है  और रबी में गेहूं , सब्जी की उपज करते है | उनके पास 1 गाय,2 भैस ,2 बकरिया, हैं  | जनजातीय बहुल क्षेत्र में रहने वाली यह महिला पानी की कमी होने के कारण ही अपने खेत में पोषण वाटिका लगाकर अपनी आजीविका और स्वास्थ्य में सुधार कर रही है |


सक्षम महिला समूह  की बैठक में भाग लेती  कान्ता भगोरा 

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2018 से सहजकर्ता दिनेश डिन्डोर, दया मईडा इनके माध्यम से महिला समूह से जुडी | सक्षम समूह के मासिक बैठक में नियमित उपस्थित रहकर अपनी जिम्मेदारी क्या है , अधिकार के प्रति जागरूक  हुई | इसी तहत संस्था के सहजकर्ता दिनेश डिन्डोर ने उनकों जैविक खेती , पोषण वाटिका के बारे में बताया | इसमें फसल प्रबंधन, मिट्टी प्रबंधन , कृषि उपकरणों का उपयोग , जैविक खाद तैयार करना (केंचुआ, दशपर्णी , वेर्मी कम्पोस्ट खाद) के बारे में प्रशिक्षण दिया |  वाग़धारा संस्था ने मुझे बीज कीट दिए , इसमें भिण्डी, लौकी, टमाटर, बेंगन, गिलकी, ग्वार फली , मिर्ची, पालक , प्याज, मैथी, धनिया, टिंडोरी, आदि के बीज शामिल है | यह बीज किट हमने अपने खेत में लगाया और उससे हुई पैदावार से हमने घर के आहार में एवं दुसरे लोगों को बेचकर आमदनी भी प्राप्त की | जिससे मेरी आमदनी में बढ़ोतरी हुई | 2020 में मार्च-मई  तक लॉकडाउन के समय मैंने 100 किलों सब्जी बेचीं इसमें सब्जी बाजार बन्द होने होने के कारणवश लोग मेरे खेत में आकर सब्जी खरीद लेते थे | इनमे जिन ग्राहकों के पास पैसे नहीं होते थे , वे ग्राहक मुझे गेहूं देते थे और बदले में सब्जी ले जाया करते थे | इस तरह मुझे मेरी सब्जी के बदले उन ग्राहकों से 70 किलो गेहूं मिले | 1500/- रूपये की नकद आमदनी भी   हुई | और मै भी पहले बाजार से सब्जी खरीदकर लाती थी, परन्तु पिछले 3 वर्ष से  बाजार से कोई भी सब्जी खरीदनी नहीं पड़ी जिससे मेरे 28000/- तक की बचत हुई एवं मेरे परिवार का गुजारा इसी सब्जी से हुआ | ये बचत वाले पैसे मेरे लड़कों के पढाई में काम आये 


कान्ता रमेश भगोरा के घर में वर्मी कम्पोस्ट 

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इसी प्रकार इस वर्ष 2021 मार्च–मई में लॉकडाउन 45 किलो गेहूं सब्जी बेचने पर मिले और 1000/- रूपये की नकद आमदनी हुई | इस पोषण वाटिका से मुझे आमदनी तो हुई लेकिन मेरे परिवार का स्वास्थ्य भी अच्छा रहा | इस पोषण वाटिका से मेरे परिवार को ताजा-पौषक फल-सब्जियां मिलती रही | पहले मै साक-सब्जी लगाती थी परन्तु, मेरे पोषण वाटिका में विविध प्रकार की सब्जियां नहीं थी | अब वाग़धारा के महिला सक्षम समूह से जुड़ने के बाद मुझे सब्जी बीज किट अपने खेत में लगाने से विविध प्रकार की सब्जियां हमारे खाने में  उपयोग इस्तेमाल करने लगे | मै वाग़धारा संस्था की आभारी हूँ | मेरे आजीविका और स्वास्थ्य बढ़ाने में मदद की |  


कान्ता रमेश भगोरा

उम्र      40 वर्ष 

गाँव का नाम -  खेरियापाडा 

तहसील - कुशलगढ़

जिला  -बांसवाडा राजस्थान

सक्षम महिला समूह का नाम – गीता सक्षम महिला समूह 



विकास मेश्राम 

 वागधारा 

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