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मंगलवार, 10 अगस्त 2021

माले विधायक ने अशोक चौधरी कमिटी की अनुशंसा लागू करने की मांग

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पटना. माले विधायक अमरजीत कुशवाहा हैं.मां-बाप के इकलौता बेटा होने के नाते व निम्न मध्यमवर्गीय पारिवारिक आधार के चलते बहुत कठिनाइयां भी आयीं. इन सबके बीच से माले विधायक ने न्याय का रास्ता चुना. इस रास्ते पर ही आगे चलकर जुल्म व ज्यादती के खिलाफ संघर्ष जारी रखूंगा.इस राह पर चलते रहने से विरोधियों के निशाने पर आने से जेल गये.जेल में ही रहकर चुनाव जीते. इस बीच माले विधायक अमरजीत कुशवाहा ने कहा है कि सूबे में महादलितों के बीच सरकार की योजनाओं को लाभ पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने विकास मित्रों का नियोजन किया गया है.आज उनका मानदेय 12056 रुपये है.इस समय महंगाई चरम पर है.इस अल्प राशि से विकास मित्रों के परिवारों का भरण पोषण करना मुश्किल हो रहा है. उन्होंने विकास मित्रों की आयु 60 वर्ष पूर्ण होने पर या विकास मित्रों की मृत्यु होने के बाद उनके परिवार के आश्रितों की अनुकंपा का लाभ जरूर ही मिलना चाहिए.माले विधायक ने अशोक चौधरी कमिटी की अनुशंसा लागू करने करने के लिए सदन के माध्यम से सरकार से मांग करते हैं. मालूम हो कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उच्च स्तरीय समिति गठित की थी.भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवा निवृत मुख्य सचिव अशोक चौधरी को अध्यक्ष बनाया गया. सदस्यों में प्रधान सचिव वित्त विभाग, प्रधान सचिव शिक्षा विभाग, प्रधान सचिव स्वास्थ्य विभाग, प्रधान सचिव पथ निर्माण, प्रधान सचिव जल संसाधन विभाग, सचिव विधि विभाग एवं सदस्य सचिव में प्रधान सचिव सामान्य प्रशासन विभाग को शामिल किया गया.सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवा निवृत मुख्य सचिव अशोक चौधरी की अध्यक्षता में संविदाकर्मियों के लिए गठित समिति द्वारा की गई सिफारिशों को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी थी.तब तीन महीने बाद यह उच्चस्तरीय कमेटी ने अपनी अनुशंसा सरकार को दे दी. यह भी मालूम हो कि बिहार में एक हाई लेवल समिति ने सभी संविदाकर्मियों की सेवा 60 साल तक स्थायी करने और रेगुलर कर्मचारियों की तरह बोनस, मेडिकल लीव और अन्य सुविधाएं देने की सिफारिश की थी. बिहार के विभिन्न कार्यालयों में संविदा पर पांच लाख से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं. इनमें कार्यालय सहायक से लेकर कंप्यूटर ऑपरेटर तक शामिल हैं.


बिहार राज्य मंत्रिपरिषद ने संविदा पर बहाल कर्मियों के लिए गठित समिति की अनुशंसाओं को मंजूरी प्रदान कर दी.मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में संपन्न राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद तब के मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने पत्रकारों को बताया कि प्रदेश में संविदा पर नियोजित कर्मियों की सेवा के संबंध में पूर्व मुख्य सचिव अशोक चौधरी की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति द्वारा राज्य सरकार को समर्पित प्रतिवेदन को मंत्रिपरिषद ने स्वीकृति प्रदान कर दी. उन्होंने बताया कि मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृति प्रदान कर दिए जाने के बाद विभागीय संकल्प निर्गत कर दिया जाएगा.संजय ने बताया कि पूर्व में विभिन्न विभागों द्वारा संविदा पर बहाल किए गए कर्मियों की सेवा शर्त अलग-अलग हुआ करती थी. उन्होंने बताया कि संविदा कर्मियों के अवकाश को अब एकरूपता प्रदान की गयी है. उनको अब मातृत्व अवकाश भी देने का प्रावधान किया गया है. संजय ने बताया कि समिति की रिपोर्ट में संविदा पर बहाल कर्मियों की उम्र में शिथिलीकरण का भी प्रस्ताव है ताकि जब भी नियमित नियुक्ति के लिए विज्ञापन आए तो उन्हें उम्र में छूट मिल सके.उन्होंने बताया कि किसी विभाग में बहाल संविदा कर्मियों की आवश्यकता नहीं रहने की स्थिति में पूर्व में उनकी सेवा समाप्त कर दी जाती थी, पर अब निर्णय हुआ है कि किसी दूसरे विभाग में संविदा कर्मियों की आवश्यकता होने पर उन्हें एक विभाग से दूसरे विभाग में समायोजित किया जाएगा. संजय ने बताया कि संविदा कर्मियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि का प्रावधान भी लागू किए जाने का निर्णय लिया गया. उन्होंने बताया कि राज्य बीमा अधिनियम के प्रावधानों को संविदा कर्मियों के मामले में लागू किया जाएगा. संजय ने बताया कि उनके कार्यों का वार्षिक मूल्यांकन भी किया जाएगा ताकि एक मानक के तहत उनसे कार्य लिया जा सके. इस बीच जानकारी मिली है कि 2018 में पूर्व मुख्य सचिव अशोक चौधरी की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति द्वारा राज्य सरकार को समर्पित प्रतिवेदन के आलोक में संविदाकर्मियों की सेवा 60 साल को लागू नहीं किया जा रहा है.गैर सरकारी संस्था कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल में लागू नहीं है.पर यहां नियमानुसार 58 साल को पालन करते हैं.पर अपनी  मनमौजी से 58 साल से ऊपर वालों को भी रखा जाता है.जानकारी के अनुसार 2023 में रिटायरमेंट 60 साल में होगा.

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