बिहार : महिला सशक्तिकरण पर विचार गोष्ठी - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 27 अगस्त 2021

बिहार : महिला सशक्तिकरण पर विचार गोष्ठी

  • कुंठित मानसिकता से लड़ाई लंबी नजर आती है

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बेतिया. पश्चिम चंपारण (बेतिया) के जदयू जिला अध्यक्ष श्री शत्रुघ्न कुशवाहा के द्वारा विश्व महिला समानता दिवस के अवसर महिला सशक्तिकरण पर विचार गोष्ठी आयोजित की गयी. आज विश्व महिला समानता दिवस है.प्रतिवर्ष 26 अगस्त को वुमन इक्वीलिटी-डे के रूप में मनाया जाता है.इस अवसर पर बेतिया में महिला सशक्तिकरण पर विचार गोष्ठी आयोजित की गयी.मुख्य अतिथि जदयू की प्रदेश सचिव पूजा एन शर्मा थीं.मौके पर जदयू की प्रदेश सचिव पूजा एन शर्मा ने जमकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यशोगान किया.उन्होंने कहा कि हम महिलाओं के कहने पर ही मुख्यमंत्री ने शराबबंदी लागू कर दिये.इससे परिवार में कलह कम हुआ हैं.उन्होंने कहा कि सीएम ने महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में कोई कसर नहीं छोड़ रखा है.सीएन ने सूबे में कई तरह की योजना चला रखे हैं. जदयू नेत्री ने महिला सशक्तिकरण के बारे में विस्तार से जानकारी दी.कन्या उत्थान योजना, महिला उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री बालिका प्रोत्साहन योजना और अन्य योजना महिलाओं को सशक्त करने में हितकर साबित हो रहा है.सीएम ने हम महिलाओं को नेतृत्व क्षमता को विकसित करने लिए आरक्षण की सुविधा प्रदान किया है.50% आरक्षण पंचायती राज में है.वहीं 35% पुलिस सर्विस में आरक्षण है.अभी हाल में 33% आरक्षण महिलाओं को राजनीति में दी गयी है.इसी आरक्षण के तहत ही आपके सामने हूं. 


आज की इस गोष्ठी से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी के द्वारा महिला सशक्तिकरण के विभिन्न कार्यों को जन जन तक पहुंचाने के लिए  जिले की महिला पदाधिकारियों द्वारा हमारी सारी बहनों को प्रेरित किया गया. बताते चले कि विश्व में आई असमानता को दूर करने के उपलक्ष्य में ही विश्व महिला समानाता दिवस यानी की वुमन इक्वीलिटी-डे, प्रतिवर्ष  26 अगस्त को मनाया जाता है. न्यूजीलैंड विश्व का पहला देश है, जिसने 1893 में महिला समानता की शुरुआत की थी. अमेरिका में ’26 अगस्त’, 1920 को 19वें संविधान संशोधन के माध्यम से पहली बार महिलाओं को मतदान का अधिकार मिला. इसके पहले वहां महिलाओं को द्वितीय श्रेणी नागरिक का दर्जा प्राप्त था. महिलाओं को समानता का दर्जा दिलाने के लिए लगातार संघर्ष करने वाली एक महिला वकील बेल्ला अब्ज़ुग के प्रयास से 1971 से 26 अगस्त को ‘महिला समानता दिवस’ के रूप में मनाया जाने लगा. 2020 में महिला समानता दिवस की 100 वीं वर्षगांठ मनाई गई थी. इस वर्ष महिला समानता दिवस 101वीं वर्षगांठ है जिसकी थीम है, 'Commemorates the struggles of women to be heard, as fierce advocates who gained the statutory right to vote.' है. इस दिवस को मनाने का खास उद्देश्य यह है कि महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलता है.इसके साथ ही भेदभाव, दुष्कर्म, एसिड अटैक्स, भूर्ण हत्या जैसे कई मुद्दों पर जागरूकता फैलाना है. वैसे आज के समय में महिलाएं हर क्षेत्र में अपना नाम रौशन कर रही हैं.


भारत में महिलाओं की वोटिंग का इतिहास अमेरिका जितना ही है. ब्रिटिश शासन के समय 1921 में मद्रास स्टेट ने सबसे पहले महिलाओं को वोटिंग का अधिकार दिया था. 1950 में पूरे देश में महिलाएं वोट करने लगीं. भारत की बात करें तो स्वाधीनता के साथ ही मतदान का अधिकार तो मिल गया था लेकिन महिलाओं के साथ मतभेद का सिलसिला आजादी के सात दशक बाद भी कम होने को तैयार नहीं है, इसलिए भारत में भी महिलाओं के लिए बराबरी की लड़ाई या हक की बात करने के लिए महिला समानता दिवस (Women’s Equality Day) मनाया जाता है. भारत की महिलाओं को भले ही मतदान का अधिकार आजादी के साथ ही मिल गया था लेकिन पंचायत व नगर निकाय चुनावों में बतौर प्रत्याशी की लड़ाई के लिए इंतजार करना पड़ा, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने का यह अधिकार 73वे संविधान संसोधन के बाद मिला था, इसी तरह महिलाओं के लिए कानून मजबूत बनता रहा और चार दिवारी से निकलकर महिलाओं ने साबित किया कि उन्हें मौका मिले तो वे राष्ट्रनिर्माण में पुरुषों जैसा ही योगदान दे सकते हैं. आज सभी जगह महिलाओं को बराबरी का अधिकार दे दिया गया है लेकिन जमीनी स्तर पर कुंठित मानसिकता से लड़ाई लंबी नजर आती है, देश के कई इलाकों में आज भी महिलाएं शिक्षा से वंचित हैं, भूर्ण हत्या के केस तो पढ़े लिखे समाज में तक आम हैं. महिलाओं के प्रति क्राइम रेट इतना ज्यादा है कि सरकार को नारा देने की जरूरत पड़ रही है ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’.

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