असमानताओं से भरी दुनिया में समता, न्याय के लिए दृढ़ प्रयास जरूरी - Live Aaryaavart

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रविवार, 15 अगस्त 2021

असमानताओं से भरी दुनिया में समता, न्याय के लिए दृढ़ प्रयास जरूरी

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नयी दिल्ली, 14 अगस्त, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने असमानताओं से भरी दुनिया में अत्यधिक समानता और न्याय के लिए दृढ़ प्रयास करने की आवश्यकता जताते हुए शनिवार को कहा कि आजादी के लिए मर मिटने वाले स्वाधीनता सेनानियों के सपनों को साकार करने की दिशा में अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है। श्री कोविंद ने तमाम सफलताओं के बावजूद पैर यथार्थ की ठोस जमीन पर टिकाये रखने की भारत की विशेषता का उल्लेख करते हुए कहा, “..हमारे पैर यथार्थ की ठोस जमीन पर टिके हुए हैं। हमें यह एहसास है कि आज़ादी के लिए मर-मिटने वाले स्वाधीनता सेनानियों के सपनों को साकार करने की दिशा में हमें अभी काफी आगे जाना है। वे सपने हमारे संविधान में, ‘न्याय’, ‘स्वतन्त्रता’, ‘समता’ और ‘बंधुता’ इन चार सारगर्भित शब्दों द्वारा स्पष्ट रूप से समाहित किए गए हैं।” वह 75वें स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम सम्बोधन दे रहे थे। उन्होंने असमानता से भरी विश्व व्यवस्था में और अधिक समानता के लिए तथा अन्यायपूर्ण परिस्थितियों में और अधिक न्याय के लिए दृढ़तापूर्वक प्रयास करने की आवश्यकता जताते हुए कहा, “ न्याय की अवधारणा बहुत व्यापक हो गयी है जिसमें आर्थिक और पर्यावरण से जुड़ा न्याय भी शामिल है। आगे की राह बहुत आसान नहीं है। हमें कई जटिल और कठिन पड़ाव पार करने होंगे, लेकिन हम सबको असाधारण मार्गदर्शन उपलब्ध है। यह मार्गदर्शन विभिन्न स्रोतों से हमें मिलता है। सदियों पहले के ऋषि-मुनियों से लेकर आधुनिक युग के संतों और राष्ट्र-नायकों तक हमारे मार्गदर्शकों की अत्यंत समृद्ध परंपरा की शक्ति हमारे पास है। अनेकता में एकता की भावना के बल पर, हम दृढ़ता से, एक राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहे हैं।” श्री कोविंद ने कहा, “अपने गणतन्त्र की विगत 75 वर्षों की यात्रा पर जब हम नजर डालते हैं तो हमें यह गर्व होता है कि हमने प्रगति पथ पर काफी लंबी दूरी तय कर ली है। गांधीजी ने हमें यह सिखाया है कि गलत दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने से अच्छा है कि सही दिशा में धीरे ही सही लेकिन सधे हुए कदमों से आगे बढ़ा जाए। अनेक परम्पराओं से समृद्ध भारत के सबसे बड़े और जीवंत लोकतन्त्र की अद्भुत सफलता को विश्व समुदाय सम्मान के साथ देखता है।”


उन्होंने कहा, “अनेक देशों की तरह हमारे देश को भी, विदेशी हुकूमत के दौरान बहुत अन्याय और अत्याचार सहने पड़े। परंतु हमारी विशेषता यह थी कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारतीय स्वाधीनता आंदोलन सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों पर आधारित रहा। उन्होंने तथा अन्य सभी राष्ट्र-नायकों ने भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त करने का मार्ग तो दिखाया ही, साथ ही राष्ट्र के पुनर्निर्माण की रूपरेखा भी प्रस्तुत की। उन्होंने भारतीय जीवन-मूल्यों और मानवीय गरिमा को पुनः स्थापित करने के लिए भी भरपूर प्रयास किए।” अर्थव्यवस्था में निहित विकास की क्षमता पर दृढ़ विश्वास के साथ सरकार द्वारा रक्षा, स्वास्थ्य, नागरिक उड्डयन, विद्युत तथा अन्य क्षेत्रों में निवेश को और अधिक सरल बनाने के प्रयासों का जिक्र करते हुए श्री कोविंद ने कहा कि सरकार द्वारा पर्यावरण के अनुकूल, ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों, विशेष रूप से सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के नवीन प्रयासों की विश्वव्यापी प्रशंसा हो रही है। जब ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ की रैंकिंग में सुधार होता है, तब उसका सकारात्मक प्रभाव देशवासियों की ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ पर भी पड़ता है। उन्होंने दुनिया के विभिन्न देशों के साथ मजबूत होते संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि सर्वांगीण विकास के प्रभाव से, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का कद ऊंचा हो रहा है। यह बदलाव, प्रमुख बहुपक्षीय मंचों पर हमारी प्रभावी भागीदारी में तथा अनेक देशों के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ बनाने में परिलक्षित हो रहा है। उन्होंने हाल ही में अपने गांव की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा, “मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के जीवन को सुगम बनाने के लिए बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच की मनोवैज्ञानिक दूरी अब पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। मूलतः, भारत गांवों में ही बसता है, इसलिए उन्हें विकास के पैमानों पर पीछे नहीं रहने दिया जा सकता। इसीलिए, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित, हमारे किसान भाई-बहनों के लिए विशेष अभियानों पर बल दिया जा रहा है।”


राष्ट्रपति ने आधुनिक औद्योगिक विकास के कारण मानव जाति के सम्मुख गम्भीर चुनौतियों का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा, “आधुनिक औद्योगिक सभ्यता ने मानव जाति के सम्मुख गम्भीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। समुद्रों का जल-स्तर बढ़ रहा है, ग्लेशियर पिघल रहे हैं और पृथ्वी के तापमान में वृद्धि हो रही है। इस प्रकार, जलवायु परिवर्तन की समस्या हमारे जीवन को प्रभावित कर रही है। हमारे लिए गर्व की बात है कि भारत ने, न केवल पेरिस जलवायु समझौते का पालन किया है, बल्कि देश जलवायु की रक्षा के लिए तय की गई प्रतिबद्धता से भी अधिक योगदान कर रहा है। फिर भी मानवता को विश्व स्तर पर अपने तौर-तरीके बदलने की सख्त जरूरत है।” श्री कोविंद ने टोक्यो ओलम्पिक में महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए हर माता-पिता से आग्रह किया कि वे उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली होनहार बेटियों के परिवारों से शिक्षा लें और अपनी बेटियों को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करें। उन्होंने गगनयान मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मिशन के तहत भारतीय वायु सेना के कुछ पायलट विदेश में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। जब वे अंतरिक्ष में उड़ान भरेंगे, तो भारत मानव-युक्त अंतरिक्ष मिशन को अंजाम देने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। राष्ट्रपति ने कहा, “इस प्रकार, हमारी आकांक्षाओं की उड़ान किसी प्रकार की सीमा में बंधने वाली नहीं है। …फिर भी, हमारे पैर यथार्थ की ठोस जमीन पर टिके हुए हैं। हमें यह एहसास है कि आज़ादी के लिए मर-मिटने वाले स्वाधीनता सेनानियों के सपनों को साकार करने की दिशा में हमें अभी काफी आगे जाना है।

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