मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल के चौथे संस्करण का उद्घोष - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 7 अक्तूबर 2021

मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल के चौथे संस्करण का उद्घोष

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मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल (एम.एल.एफ २१) ने अपने चौथे संस्करण के तारीख की घोषणा कर दी है |  पहले तीन संस्करणों के सफल समापन के बाद, इस वर्ष यह समारोह  १२ से १५ दिसंबर तक, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित किया जायेगा। मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल नई दिल्ली में अवस्थित सेंटर फॉर स्टडीज ऑफ सिस्टम्स एंड ट्रेडिशन (सी.एस.टी.एस) का एक प्रमुख कार्यक्रम है।  इस  समारोह का मूल उद्देश्य मिथिला के सांस्कृतिक, स्थापत्य, दार्शनिक और साहित्यिक विचारों को एक कड़ी में पिरोना और साथ में  स्थानीय मतों को प्रोत्साहन देना  है |  इस समारोह  का पहला संस्करण २०१८ में किया गया था | प्रत्येक वर्ष मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल उन सब पहलुओं को एक मंच देता है  जो कि मिथिला की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और दार्शनिक परंपरा के  प्रतिनिधित्व हैं। अपने चौथे संस्करण में  मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल  मूलतः "सीता" के स्वरुप  व तत्त्व के अनेक प्रसंगों  पर आधारित है | "वैदेही" - एक अंतर्राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी  है जिसमें की सीता के १५० अवतारों को रंजित किया गया है,  इस  कला प्रदर्शन के माध्यम से भी सीता के विभिन्न रूपों को दर्शाया जायेगा |  इस संस्करण के कुछ मुख्य आकर्षण के अंतर्गत अनेक प्रकार के कार्यक्रम शामिल हैं जैसे की  एकवस्त्रा' जो स्थानीय बुनकरों और महिलाओं की भागीदारी पर आधारित है, साथ ही साथ  महिला उद्यमियों पर केंद्रित "स्त्री दलान", "रसनचौकी",  बाल रंग-मंच शिविर, नेपाली सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य स्थानीय परंपराओं को उजागर करने वाले कार्यों  का प्रदर्शन किया जाएगा ।  एम.एल.एफ-२१ युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ा अवसर होगा, क्योंकि यह "युवा साहित्य" के साथ-साथ युवा उद्यमियों को स्टार्ट-अप पर अपने विचारों को प्रदर्शित करने के लिए मंच प्रदान करेगा | इसके अलावा, चौथे संस्करण में फिल्म निर्माण कार्यशाला, "अरिपन" - बच्चों और महिलाओं के लिए ड्राइंग प्रतियोगिता, फोटोग्राफी कार्यशाला, पेंटिंग कार्यशाला, भाषा विज्ञान पर आधारित कार्यशाला, जैसे विभिन्न  कार्यक्रम शामिल हैं। इन आयोजनों के अलावा भाषा-विज्ञान, शिक्षा, उद्योग, दर्शन, पर्यावरण व मैथिली साहित्य में गाँधी जी पर शैक्षणिक चर्चा होंगी । दरभंगा के अमता  घराना ध्रुपद - हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत का प्रदर्शन करेंगे ।


मिथिला की भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए अमरेश पाठक के बहुमूल्य योगदान को मान्यता देते हुए सी.एस.टी.एस. ने वर्ष २०२०  में अमरेश पाठक स्मृति सम्मान की स्थापना की। इस पुरस्कार में प्रशस्ति पत्र के साथ २५००० रुपये का नकद पुरस्कार भी शामिल है। पहला अमरेश पाठक स्मृति सम्मान २०२० श्री रामजी पोदार को उनकी असाधारण सात दशकों की समाज सेवा के लिए प्रदान किया गया। इस साल भी एम.एल.एफ-२१ यह पुरस्कार योग्य उम्मीदवार को प्रदान करेगा।  इस कार्यक्रम में साहित्य, कला, राजनीति, आध्यात्म और शिक्षा के क्षेत्र के महत्वपूर्ण हस्तियां भी शामिल होंगी | प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना वीना सी शेषाद्री भी इस चार दिवसीय  कार्यक्रम में "जय जानकी" पर अपने नृत्य कला का प्रदर्शन करेंगी तथा प्रख्यात अभिनेत्री कनुप्रिया पंडित अपनी अभिनय कला को "जायें से पहिने: सीता पिया कथा"  नामक नाटक के माध्यम से प्रस्तुत करेंगी | इस  नाटक की रचयिता पद्मश्री उषा किरण खान जी हैं और मशहूर अभिनेता तथा रंगमंच निर्देशक पद्मश्री राम गोपाल बजाज द्वारा इस नाटक को  निर्देशित किया गया है | भारत के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ, लेखक और विचारक श्री राम माधव इस समारोह के  विशिष्ट अतिथि होंगे। हिन्दी की वरिष्ठ कथा लेखिकाएं  तथा साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मान्नित अनामिका और चित्रा मुद्गल भी इस समारोह में शामिल होंगी | इनके अलावा यतींद्र मिश्र, जो कि एक प्रसिद्ध कवि और विमला देवी फाउंडेशन के संस्थापक भी हैं , सत्य व्यास, केरल के माननीय राज्यपाल-आरिफ मोहम्मद खान, और नेपाल और श्रीलंका के प्रतिनिधियों और विद्वानों की उपस्थिति इस समारोह में अपेक्षित है।  इस समारोह को सफल बनाने हेतु संस्कृति मंत्रालय, इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स, नेशनल बुक ट्रस्ट, साहित्य अकादमी, मैथिली अकादमी (बिहार), सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडीयन लांग्वेज, मैथिली- भोजपुरी अकादमी (दिल्ली), सेंटर फॉर कल्चरल एक्सीलेंस (लंदन), गांधी स्मृति और दर्शन  समिति (दिल्ली), मधुबनी आर्ट सेंटर, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स (दिल्ली विश्वविद्यालय), रेडियो मधुबनी और प्रथम स्टोरी वीवर् जैसे महत्वपूर्ण संस्थान सी.एस.टी.एस. से  सहयोगी- संस्थान के तौर पर जुड़े हुए है ।

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