बिहार : देश को अहिंसात्मक अर्थव्यवस्था की जरूरत है - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 1 अक्तूबर 2021

बिहार : देश को अहिंसात्मक अर्थव्यवस्था की जरूरत है

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कुढ़नी। आज 30 सितंबर को न्याय एवं शांति पदयात्रा का दसवां दिन है। एकता परिषद कुढ़नी, मुजफ्फरपुर (उत्तर बिहार) के बैनर पदयात्रा जारी है।वर्तमान समय की जरूरत नहीं, मजबूरी है पलायन।रोजगार के विकल्प नहीं होने से श्रमिक मजबूरी में पलायन कर रहे हैं।  पदयात्रा का शुभारंभ जय जगत गीत से हुआ। नारा लगाते हुए पदयात्री चंद्रहटी,ताल गुजरा, चंद्र हटी,राम टोला में पहुंचे।उसके बाद ग्राम सभा हुई।चर्चा में राम लखिनदर प्रसाद संयोजक,  विधाननद प्रसाद ,कमलेश महतो, बचू राम ने बताया कि रोजगार के विकल्प नहीं होने से श्रमिक निरंतर पलायन कर रहे हैं ।वर्तमान समय में पलायन एक गंभीर समस्या के रूप में हम सबके सामने है।लाखों लोग रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन करते हैं।  कोविड-19 महामारी में पूरे देश के सामने पलायन कर चुके श्रमिकों की समस्या को महत्व देकर उजागर किया है। जिसे हम काफी समय से अनदेखा कर रहे थे। पलायन की समस्या को रोकने के लिए एक ऐसी अर्थव्यवस्था की आवश्यकता है। जिसमें गैर बराबरी नहीं ।एक तरह से कहे तो देश को अहिंसात्मक अर्थव्यवस्था की जरूरत है।जहां सबकी  भागीदारी और हिस्सेदारी हो। पदयात्रा संचालन जोगी देवी ने की  पदयात्रा व्यवस्था में साथी रामशिला जी शंभू शाह रामबाबू सहनी,नागेश्वर साहनी, सिवनी देवी इत्यादि ने की । इसी तरह शांति और न्याय पदयात्रा का सहरसा जिले से भी निकली कार्यक्रम में शामिल-एकता परिषद जनसंगठन के जिला संयोजक- ओमप्रकाश सादा(सहरसा)हीरालाल सादा (सौनबर्षा राज)अशोक पासवान,नित्यानंद मुसहर,श्याम सुन्दरी देवी शोभा देवी कंचन देवी (पतरघट)के सभी आवास भूमि की जमीन के लिये भूमिहीनों का पुरजोर समर्थन किया।

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