सीहोर (मध्यप्रदेश) की खबर 13 नवम्बर - Live Aaryaavart

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शनिवार, 13 नवंबर 2021

सीहोर (मध्यप्रदेश) की खबर 13 नवम्बर

 भगवान की लीलाएं अति दिव्य इनमें छुपा है रहस्य - आचार्य पं हर्षित शास्त्री जी

  • भगवान को लगाई गई हल्दी मेहंदी आज निकलेगी भव्य बारात

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सीहोर। श्री शारदा वैदिक संस्थान के तत्वाधान में श्री नारायण पैलेस में चल रही भव्य श्री मद भागवत रस कथा एवं तुलसी नारायण विवाह उत्सव के पंचम दिवस में आज ज्योतिष एवं भागवत सिंधु आचार्य पं हर्षित शास्त्री ने बताया कि भगवान का जब जन्म हुआ तब भगवान द्वारा बताए हुए मार्ग से वासुदेव जी नंद बाबा के घर भगवान को रख आएं जब 90 वर्ष की आयु में नंद बाबा के संतान नही हुई ब्राह्मणों ने अनुष्ठान किया जिस से 90 वर्ष की आयु के नंद बाबा के यह संतान हुई। आज भगवान ने जन्म होते ही जीव मात्र का कल्याण किया क्योंकि भगवान के जन्म होते ही पूतना का आगमन हुआ पूतना कौन है जिसका कोई पूत नही आज भगवान ने उसे ममत्व का भाव प्रदान किया और अंत मे दुग्ध पान के मध्य से प्राण पीकर उसका कल्याण किया भगवान ने जब किया कल्याण ही किया है। भगवान ने सकल भजन की लीला से समझया जी जीवन मे मोक्ष रूपी रथ में जब तक धर्म रूपी बैल नही होते ऐसे जीव मेरे काम के नही है भगवान ने तृणवत उदार किया और आज भगवान के मन मे गोपियों के मनोरथ को पूर्ण करने का भाव आया तो भगवान ने दिव्य माखन चोरी की लीला से गोपी के चित्त को चुरा लिया जो प्ररभ्रम सबको देने वाले है आज माखन छाछ की चोरी कर रहे है यह भगवान की वात्सल्य भाव की उत्पति है। इसके बाद कथा में गोवर्धन पूजन की कथा हुई जिसमें भगवान को 56 भोग लगाए गए 56 भोग भगवान को इसलिए लगाया जाते है क्योंकि भगवान ने 7 दिन तक गोवेर्धन पर्वत धारण करके और प्रत्येक दिन में 8 प्रहार होते है हर प्रहार का एक भोग भगवान को लगाया गया इसलिए अन्नकूट छप्पन भोग उत्सब मनाया जाता है आज कथा में होगा कृष्ण रुक्मणि विवाह उत्सव एवं शाम 5 बजे निकली जाएगी भगवान की भव्य बारात संस्थान के सदस्यों ने सब से बारात एवं कथा में अधिक से अधिक संख्या में समिल्लित होने की अपील की है। इस मौके पर यहां पर मौजूद महिलाओं ने भजन के साथ हल्दी-मंहदी के अलावा पूरे उत्साह का वातावरण बन गया था। भागवत कथा में महंत उद्वाव दास महाराज के अलावा अग्रवाल समाज, माहेश्वरी समाज महिला मंडल, मारवाड़ी महिला मंडल, ब्राह्मण समाज महिला मंडल सहित अन्य समाज के श्रद्धालु ने पुष्प माला से आचार्य श्री हर्षित शास्त्री का स्वागत किया। 


एनसीसीसी ने सेंट माइकल को 85 रन के विशाल अंतर से हराया


सीहोर। प्रदेश के उभरते स्पिनर आकाश सिंह की 3 ओवर में मात्र 14 रन देकर 4 विकेट की शानदार गेंदबाजी और विस्फोटक बल्लेबाज आलोक गोस्वामी की 35 गेंद पर 57 रन की अद्र्धशतकीय पारी की बदौलत एक तरफा मुकाबले में एनसीसीसी भोपाल क्रिकेट टीम ने सेंट माइकल को 85 रन के विशाल अंतर से हराया। वहीं एक अन्य मैच में सीहोर ट्राईडेंट की टीम ने सन राइजिंग भोपाल को सात विकेट से हराया।   शहर के बीएसआई मैदान पर जिला क्रिकेट एसोसिएशन के तत्वाधान में एसएन पहलवान की स्मृति में खेली जा रही प्रथम टी-20 क्रिकेट प्रतियोगिता में प्रथम दौर में गु्रप ए में अब हर मैच रोमांचक स्थिति में आ गया है। शनिवार को पहले बल्लेबाजी करने उतरी एनसीसीसी ने निर्धारित 20 ओवर में पांच विकेट के नुकसान पर 180 रन का स्कोर खड़ा किया था। इसमें आलोक गोस्वामी ने 35 गेंद पर 57 रन, अक्षय तिवारी ने 32 गेंद पर 44 रन और पलाश ने 21 गेंद पर 34 रन की पारी खेली। वहीं सेंट माइकल की ओर से गेंदबाजी करते हुए शहराब मलिक ने 4 ओवर में 42 रन देकर 3 विकेट, सलमान उद्दीन और अभिषेक ने 1-1 विकेट हासिल किए। इसके अलावा जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी सेंट माइकल की पूरी टीम 19.1 ओवर पर ही ढेर हो गई। इसमें उजश शुक्ला ने 35 रन की संघर्षपूर्ण पारी खेली। इधर एनसीसीसी की ओर से गेंदबाजी करते हुए आकाश सिंह ने 4 विकेट, नमन प्रजापति 3 विकेट और मृदुल यादव ने 2 विकेट हासिल किए।


सीहोर ट्राईडेंट ने जीत हासिल की

शनिवार की सुबह हुए पहले मैच में सीहोर ट्राईडेंट ने सात विकेट से सन राइजिंग भोपाल को शिकस्त दी। इस मैच में पहले खेलते हुए सन राइजिंग भोपाल की टीम मात्र 14.5 ओवर में 74 रन के स्कोर पर ढेर हो गई थी। इसके बाद सीहोर ट्राईडेंट ने तीन विकेट खोकर सात विकेट से जीत हासिल की। इसमें तरुण ने 32 रन और देवेन्द्र ने 18 रन बनाए।


आज होने वाले मुकाबले

डीसीए के मीडिया प्रभारी प्रियांशु दीक्षित ने बताया कि रविवार की सुबह जूनियर सीहोर और एनसीसीसी के मध्य मुकाबला खेला जाएगा। इसके अलावा दोपहर में होने वाला मुकाबला सीहोर ट्राईडेंट और बीएस अकादमी के मध्य खेला जाएगा। 


भागवत कथा में हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु, पंडाल हुआ छोटा, गोवर्धन की पूजा के बाद लगाया छप्पन भोग


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सीहोर/अहमदपुर। क्षेत्र के मंडी परिसर में जारी सात दिवसीय भागवत कथा के छठवे दिन गोवर्धन पूजन के साथ छप्पन भोग का विधिविधान से भोग लगाया गया। इस मौके पर श्रीश्री 1008 महामंडलेश्वर याशोदा नंद पंडित श्री अजय पुरोहित ने कहा कि भगवान के आगे किसी का अहंकार नहीं चलता है और जो अभिमान करता है उसका अंत अवश्य होता है। शनिवार को विधायक सुदेश राय सहित अन्य श्रद्धालुओं ने महा आरती की। क्षेत्र में समाजसेवी राय परिवार के द्वारा सात दिवसीय भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। रविवार को समापन किया जाएगा। पंडित श्री पुरोहित ने कहा कि भगवान इंद्र जब क्रोथ में थे, तब उन्होंने वर्षा करके कहर बरपा दिया। चारों ओर हाहाकार मच गया। गांव जलमग्न होने लगे तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत अंगुली पर उठा लिया। इससे गांव के सभी लोग गोवर्धन पर्वत के नीचे गए और वहां शरण ली। भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का मान नष्ट करने गिर्राज जी की पूजा कराई थी, तब सभी बृजवासियों ने गोवर्धन पहुंचकर गोवर्धन पर्वत का पूजन किया और छप्पन भोग लगाया। उन्होंने कहा कि आज भी वृदांवन में बांके बिहारी को दिन में आठ बार भोग लगाया जाता है। पूरे सात दिन भगवान श्रीकृष्ण ने भूखे प्यासे रहकर गोवर्धन पर्वत को उठाए रखा था। भगवान की कृपा के लिए सादगी और भक्ति जरूरी है। कृपा के बगैर तो आदमी एक डेग भी नहीं चल सकता। आज कोई आदमी भला-चंगा है, सफल है, पर कल ही मालूम होता है कि वह घोर संकट में है। खुशियां छिन जाती है। इसके विपरीत आज को कोई परेशान है, पर देखते-देखते वह सफलता के शिखर पर पहुंच जाता है। इसीलिए कृपा जरूरी है।


ब्राह्मण समाज के तत्वाधान में दीपावली मिलन समारोह में किया गया कोरोना युद्धाओं का सम्मान


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सीहोर। शनिवार को शहर के खजांची लाइन स्थित ब्राह्मण धर्मशाला में सर्व ब्राह्मण समाज के तत्वाधान में मिलन समारोह का आयोजन कर मंच से कोरोना काल में अपनी जान जोखिम में डाल कर कार्य करने वाले 100 से अधिक समाजजनों का सम्मान किया गया। इस मौके पर कार्यक्रम की अध्यक्षता समाज के अध्यक्ष बालमुकुन्द पालीवाल ने की। शनिवार को शहर खजांची लाइन स्थित ब्राह्मण धर्मशाला में दीपावली मिलन समारोह का आयोजन किया गया था। इस मौके पर शहर के 100 से अधिक समाजजनों का सम्मान किया गया। इस संबंध में जानकारी देते हुए सर्व ब्राह्मण समाज के मीडिया प्रभारी प्रियांशु दीक्षित ने बताया कि मंच से वक्ताओं ने समाजजनों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें कोरोना वायरस की महामारी में बहुत सहयोग दिया है। इस वजह से  ऐसे कोरोना योद्धाओं का सम्मान होना बहुत जरूरी है। मंच द्वारा स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र, पत्रकारिता का क्षेत्र, नगर पालिका के कर्मचारी, महिला बाल विकास विभाग, पंचायत  सचिवों, साहित्य के क्षेत्र में शहर का नाम रोशन करने वाले, लॉक डाउन के समय पुलिस विभाग और समाजसेवियों द्वारा जो व्यवस्था की गई थी ऐसे समाज के दानवीरों के अलावा अन्य का सम्मान किया गया। कार्यक्रम के दौरान सामूहिक रूप से कोरोना काल में दिवंगत होने वाले सभी को दो मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजली भी अर्पित की गई। 


देव उठनी ग्यारस पर किया जाएगा मंदिर परिसर में दिव्य विवाह का आयोजन, आंवला नवमी पर की महिलाओं ने 108 परिक्रमा


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सीहोर। शहर के गाड़ी अड्डा स्थित राधा कृष्ण मंदिर में हर साल की तरह इस साल भी कार्तिक मास के पावन अवसर पर जारी दिव्य अनुष्ठान में शनिवार को क्षेत्र  की महिलाओं द्वारा पूर्ण विधि-विधान से आंवले की पूजा की गई और महिलाओं ने 108 परिक्रमा लगाई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने दान देकर मनोकामना पूर्ण होने की कामना की। क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर श्री राधा कृष्ण महिला मंडल के तत्वाधान में जारी सात दिवसीय श्री अष्ट लक्ष्मी अर्चना एवं दिव्य यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार को दिव्य अनुष्ठान के दौरान सर्वप्रथम आंवला नवमी के पर्व पर यहां पर आंवले के पौधे रोपण कर 108 परिक्रमा का आयोजन किया गया। इसके पश्चात मंदिर में मौजूद पंडित मंयक शर्मा ने कहा कि अक्षय नवमी का बड़ा महत्व है। अक्षय नवमी के दिन किया गया पुण्य लाभकारी होता है। इस दिन किए गए सभी कार्य शुभ माने जाते हैं। कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवला की पूजा करने से सुख व समृद्धि आती है। नवमी से लेकर पूर्णिमा तक भगवान विष्णु का आंवला के वृक्ष पर वास रहता है। संतान प्राप्ति के लिए यह पूजा लाभदायक होती है। आंवला वृक्ष के नीचे पूजन के बाद प्रसाद ग्रहण करना व आंवला चखना शुभ है।


आठ हजार देवी के मंत्रों के साथ हजारों विल्प पत्र से अर्चना

सात दिवसीय दिव्य अनुष्ठान में शनिवार को शहर के गाड़ी अड्डा स्थित मंदिर में पंडित पवन व्यास, पंडित मनोहर व्यास, पंडित कुणाल व्यास और यश शर्मा आदि के द्वारा आठ हजार से अधिक देवी के मंत्रों के साथ यहां पर जारी कार्यक्रम के दौरान आधा दर्जन से अधिक महिलाओं ने हजारों की संख्या में विल्प पत्र से अर्चना की। श्री शर्मा ने बताया कि बिल्वाष्टक और शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय हैं। मान्यता है कि बेल पत्र के तीनो पत्ते त्रिनेत्र स्वरूप भगवान शिव के तीनों नेत्रों को विशेष प्रिय हैं। बिल्व पत्र के पूजन से सभी पापो का नाश होता है।


रविवार को किया जाएगा आठ हजार हल्दी गठान अर्चना

पंडित श्री शर्मा ने बताया कि हल्दी का ज्योतिष शास्त्र में भी काफी महत्व है. ग्रह से संबंधित कोई परेशानी हो या फिर कोई आर्थिक समस्या, घर में कलह बढ़ गया हो या फिर नकारात्मक ऊर्जा का प्रकोप हो, धन की प्राप्ति की इच्छा हो। इन सभी समस्याओं को दूर कर आपका जीवन बदलने में मदद कर सकते हैं। कार्तिक मास के दिनों में श्रद्धालुओं के द्वारा दिव्य अनुष्ठान किया जा रहा है। आर्थिक लाभ और सुख समृद्धि के लिए आयोजित दिव्य अनुष्ठान में रविवार को हजारों की संख्या में हल्दी गठान के साथ अर्चना की जाएगी। श्री राधा-कृष्ण महिला मंडल ने सभी श्रद्धालुओं से मंदिर परिसर में जारी कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है। 


सशक्त समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में महिलाओं की अहम भूमिका- प्रधान जिला न्यायाधीश श्री आर एन चंद


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राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार जिले में आजादी का अमृत महोत्सव अंतर्गत "पेन इंडिया अवेयरनेस कार्यक्रम" 14 नवम्बर तक आयोजित किए जा रहे है। इसी कड़ी में 13 नवंबर को महिला एवं बाल विकास के समन्वय से एडीआर सेंटर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सीहोर में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री आरएन चंद ने अपने संबोधन में कहा कि इस सृष्टि में महिलाओं से शक्तिशाली कोई व्यक्ति नहीं, किसी भी समाज एवं राष्ट्र को सशक्त बनाने में महिलाओं की अहम भूमिका है, महिला शक्ति के बिना किसी भी समाज की कल्पना करना बेईमानी है। हम आज आजादी के 75 वर्ष पूरे होने की खुशी में आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, लेकिन इसकी सार्थकता तब होगी जब हम हमारी संस्कृति को पहचानते हुए नारी का आदर करेंगे, और गलत कामों में शक्ति न लगाकर सही कामों में लगाकर विश्व शक्ति बनेंगे। महिलाओं को आने वाली पीढ़ी को शिक्षित करने संबंधी सलाह दी और कहा कि जैसा व्यवहार हम बेटी से करते हैं वैसा ही बहू से करें, जब हम बहू के रूप में दहेज को अनुचित मानते हैं तो सास के रूप में दहेज उचित कैसे हो जाता है। समस्त महिलाएं अपने आस-पास एवं घर के माहौल को मंदिर स्थल की तरह बनाएं और मानव धर्म पर चलें। कुमारी प्राची राजपूत, श्रीमती अर्चना बाजपेयी श्रीमती रंजना शर्मा ने भी सम्बोधित किया। आजादी का अमृत महोत्सव अंतर्गत "पेन इंडिया अवेयरनेस कार्यक्रम" दिनांक 08 से 14 नवंबर 2021 के मध्य विधिक सेवा सप्ताह अंतर्गत जिला स्तर पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं निबंध, स्लोगन, पेंटिंग, ड्राइंग, नाटक प्रतियोगिता में अव्वल आए प्रतिभागियों एवं आजादी का अमृत महोत्सव में योगदान के लिए पैरा लीगल वालंटियर्स को प्रधान जिला न्यायाधीश श्री आरएन चंद के कर कमलों से पुरुस्कृत एवं सम्मानित किया गया। ए.डी.आर. सेंटर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में आजादी का अमृत महोत्सव अंतर्गत लॉयन्स क्लब के समन्वय से निःशुल्क ब्लड शुगर एवं ब्लड प्रेशर जांच शिविर का आयोजन किया गया जिसमें न्यायालयीन अधिकारियों, कर्मचारियों एवं महिला कार्यकर्ता सहित 85 व्यक्तियों का नि:शुल्क परीक्षण किया गया। शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री मुकेश कुमार दांगी, श्री प्रफुल खत्री जिला कार्यक्रम अधिकारी, श्रीमती अर्चना बाजपेयी, परियोजना अधिकारी ग्रामीण, सुश्री प्राची राजपूत सूबेदार एवं जिला यातायात प्रभारी पुलिस, श्रीमती रंजना शर्मा पैनल अधिवक्ता एवं रिसोर्स पर्सन उपस्थित रहे।


जनजातीय गौरव दिवस महासम्मेलन में शामिल होने आने वाले लोगों के लिए करें बेहतर इंतजाम- कलेक्टर

  • भोपाल में आयोजित महासम्मेलन में शामिल होने जाने वाले दूरस्थ जिलों के लोग जिले में करेंगे रात्रि विश्राम

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भगवान बिरसा मुण्डा की जयंती पर 15 नवम्बर को भोपाल में आयोजित होने वाले जनजातीय गौरव दिवस महासम्मेलन में सीहोर जिले से 12 हजार जनजातीय वर्ग के नागरिक शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आने वाले अन्य जिलों के नागरिक 14 नवम्बर को जिले के निर्धारित स्थलों पर रात्रि विश्राम करेंगे तथा 15 नवम्बर को प्रातः भोपाल के लिए रवाना होंगे। इसके लिए सभी जरूरी इंतजाम पर्याप्त समय पहले पूर्ण करने के निर्देश कलेक्टर श्री चन्द्र मोहन ठाकुर ने सभी संबंधित अधिकारियों को दिए। कलेक्टर श्री चन्द्र मोहन ठाकुर ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि जनजातीय गौरव दिवस महासम्मेलन में शामिल होने अन्य जिलों से आने वाले नागरिकों को जिले में प्रवास के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि खण्डवा,  बुरहानपुर,  बड़वानी सहित अन्य जिलो से आने वाले लोगों के लिए चिन्हांकित किए गए स्थानों पर नागरिकों के रूकने, उनके भोजन सहित अन्य इंतजाम किए जाएं।  अन्य जिलों से भोपाल जाने वालो में 22 हजार लोगों की जलपान, भोजन एवं ठहरने की व्यवस्था सीहोर में की जाएगी। इसके साथ ही सीहोर जिले से 12 हजार प्रतिभागी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भोपाल जाएंगे। कलेक्टर श्री ठाकुर द्वारा जिला परिवहन अधिकारी को सीहोर जिले से भोपाल जाने वाले प्रतिभागियों के लाने-ले जाने के लिए पर्याप्त संख्या में बसों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि बसों का रूट चार्ट इस प्रकार हो कि कहीं भी जाम की स्थिति ना बनें और नागरिक पर्याप्त समय पूर्व महासम्मेलन स्थल पर पहुंच जाएं। कलेक्टर श्री ठाकुर ने सीएमएचओ को निर्देश दिए कि जिले के विभिन्न रूटों पर एम्बुलेंस मौजूद रहे तथा उनके चिकित्सक,  मेडिकल स्टॉफ एवं आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध रहें। साथ ही बसों में मेडिकल किट,  सेनेटाइजर,  मास्क सहित अन्य जरूरी सामग्री की उपलब्धता के भी निर्देश दिए।


जिले में आज कोई भी व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव नहीं मिला, वर्तमान में कोरोना एक्टिव पॉजिटिव की संख्या शून्य


पिछले 24 घंटे के दौरान प्राप्त रिपोर्ट में जिले में आज कोई भी व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव नहीं मिला है। सीएमएचओ कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में अब तक कुल कोरोना पॉजिटिव व्यक्तियों की संख्या 10143है। वर्तमान में एक्टिव पॉजिटिव शून्य हो गई हैं। कुल रिकवर व्यक्तियों की संख्या 10020 हैं। आज 796 सैम्पल लिए गए है। जांच के लिए सीहोर शहरी क्षेत्र से 229, श्यामपुर से 172, नसरुल्लागंज से 61, आष्टा से 185, बुदनी से 97, इछावर से 52 सैंपल लिए गए हैं। अभी तक कुल जांच के लिए भेजे गए सैंपल 295002 हैं। जिनमें से 283132 सैंपलों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। आज795 सैंपलों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। कुल 1656 सैंपलों की रिपोर्ट आना शेष है। पैथोलॉजी द्वारा कोरोना वायरस सैंपल की रिजेक्ट संख्या कुल 71 है।


गौरवशाली और बहुवर्णीय है मध्यप्रदेश का इन्द्रधनुषी  जनजातीय परिदृश्य                        


मध्यप्रदेश में देश की सर्वाधिक जनजातीय जनसंख्या निवास करती है। मध्यप्रदेश का इन्द्रधनुषी जनजातीय संसार अपनी विशेषताओं के कारण मानव शास्त्रियों, सांस्कृतिक अध्येताओं और शोधार्थियों को विशेष रूप से आकर्षित करता रहा है। प्रदेश की जनजातियाँ हमेशा अपनी बहुवर्णी संस्कृति, कलाओं रीति-रिवाज और परम्पराओं के साथ प्रदेश के गौरव का अविभाज्य अंग रही है। बीते वर्षों में विकास कार्यों के कारण प्रदेश की जनजातियों की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति में व्यापक बदलाव भी आया है। अब वे अपनी गौरवशाली परम्पराओं के साथ आधुनिक समय के साथ कदमताल करते हुए अपने संवैधानिक अधिकारों के साथ मुख्य-धारा में है। मध्यप्रदेश भौगोलिक दृष्टि से देश के मध्य भाग में स्थित होने के कारण यह उत्तरप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ राज्यों की सीमाओं का स्पर्श करता है। इसलिए मध्यप्रदेश की संस्कृति में अन्य सीमावर्ती राज्यों की जीवनशैली और संस्कृति की छटाएँ भी दिखायी देती हैं। भारत सरकार द्वारा निर्धारित सूची के अनुसार यहाँ 43 अनुसूचित जनजातियों अपने सहजाति समूहों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में निवास करती है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार प्रदेश की कुल जनसंख्या 7 करोड़ 26 लाख 26 हजार 809 है, जिसमें से 1 करोड़ 53 लाख 16 हजार 784 अनुसूचित जनजातियों की आबादी है। यह आबादी प्रदेश की कुल जनसंख्या का 21.09 प्रतिशत है। जनजातीय जनसंख्या की दृष्टि से मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या 14 करोड़ 5 लाख 45 हजार 716 रही है, जिसमें मध्यप्रदेश की 1 करोड़ 53 लाख 16 हजार 784 जनसंख्या सम्मिलित है। यह आबादी देश की जनजातीय जनसंख्या का 14.64 प्रतिशत है। मध्यप्रदेश में जनसंख्या की दृष्टि से क्रमश: भील (भील, भिलाला, बारेला, पटलिया), गोंड (सहजातियों के समूह सहित) कोल, बैगा, सहरिया, कोरकू आदि प्रमुख जनजातियाँ हैं। इन जनजातियों की आबादी (भील-46.18 लाख, गोंड-43.57 लाख, कोल- 11.67 लाख कोरकू- 7.31 लाख, सहरिया- 6.15 लाख, बैगा-4.15 लाख आदि) प्रदेश की कुल जनजातीय जनसंख्या का लगभग 92 प्रतिशत है। कुल अनुसूचित जनजातियों में से बैगा, भारिया (पातालकोट क्षेत्र) और सहरिया भारत सरकार द्वारा घोषित विशेष पिछड़ी जनजातियाँ हैं। मध्यप्रदेश में निवासरत प्रमुख जनजातियों में पारम्परिक पद्धति से अयस्क को भट्टी में तपाकर लोहे में बदलने वाली अगरिया जनजाति मुख्य रूप से शहडोल-मण्डला तथा विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा- मण्डला डिण्डौरी, बालाघाट, अनूपपुर, उमरिया, शहडोल, सीधी, भील (भिलाला, बारेला, पटलिया सहित)- अलीराजपुर, झाबुआ, धार, खरगोन, बड़वानी, रतलाम, मंदसौर, गोंड (सहजातियों के समूह सहित)- डिण्डौरी, मण्डला, बैतूल, छिन्दवाड़ा, सिवनी, बालाघाट जबलपुर, कटनी, शहडोल, उमरिया, सीधी, होशंगाबाद, सागर, पन्ना, दमोह, रायसेन आदि, कोल- रीवा, शहडोल, उमरिया, जबलपुर, कटनी, मण्डला, डिण्डौरी आदि, कोरकू- (सहजातियों के समूह सहित) खण्डवा, बैतूल, होशंगाबाद, हरदा आदि, परधान (पठारी या पथारी सरोती सहित) - मण्डला डिण्डोरी, सिवनी, छिन्दवाडा, जबलपुर आदि, सहरिया (सेहरिया, सोसिया, सोर सहित)- गुना अशोकनगर, शिवपुरी, मुरैना, श्योपुर, सीहोर, विदिशा, ग्वालियर आदि, भारिया (भूमिया, भुइआर, पालिहा, पाण्डो सहित) जबलपुर, कटनी, शहडोल, उमरिया, मण्डला, डिण्डोरी, सिवनी आदि जिलों में प्रमुख आबादी प्रमुख रूप से निवासरत हैं। विशेष पिछड़ी जनजाति भारिया का निवास छिन्दवाड़ा जिले के पातालकोट क्षेत्र है। "अनुसूचित जनजातियाँ" पद सबसे पहले संविधान के अनुच्छेद-366 (25) में प्रयुक्त हुआ और अनुच्छेद 342(1) के अंतर्गत अनुसूचित जनजातियाँ पद को परिभाषित किया गया। इसी के आधार पर भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा अनुसूचित जनजातियों को सूचीबद्ध किया गया। भारत में जनजातीय आबादी का कुल भौगोलिक क्षेत्र 32 हजार 87 हजार वर्ग किलोमीटर है, जिसमें से 3 लाख 08 हजार वर्ग किलोमीटर मध्यप्रदेश का है। इस भौगोलिक क्षेत्र का 93 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र आदिवासी उपयोजना क्षेत्र के रूप में चिन्हित है। विकास की दृष्टि से प्रदेश के सघन जनजातीय आबादी वाले क्षेत्रों के 89 विकासखण्डों को जनजातीय बहुल विकासखण्डों के रूप में मान्यता प्रदान कर विकास योजनाएँ क्रियान्वित की जा रही हैं। मध्यप्रदेश जनजातीय संस्कृति की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। विभिन्न जनजातियों की भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर अलग-अलग जीवन-शैली, खानपान, पहनावा भाषा-बोली और भिन्न परम्पराएँ हैं। सीमावर्ती राज्यों की संस्कृति और जीवन-शैली का भी स्पष्ट प्रभाव संबंधित क्षेत्रों की जनजातियों पर दिखाई देता है। इन जनजातियों की भाषा और बोलियों में भीली, भिलाली, बारेली, पटलिया, गोंडी (पारसी गोंडी, मण्डलाही गोंडी), ओझियानी, शिवभाषा, बैगानी, कोरकू मवासी, निहाली, भरियाटी, कोलिहारी, सहरिया आदि प्रमुख हैं। पहले जनसंख्या की दृष्टि से गोंड मध्यभारत प्रमुख रूप से मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, उडीसा, तेलंगाना आदि क्षेत्रों की सबसे बड़ी जनजाति हुआ करती थी। इस भूखण्ड पर गोंड राजाओं का साम्राज्य रहा है, जिसे गोंडवाना साम्राज्य कहा जाता था। राजा हिरदे शाह, रानी दुर्गावती और राजा शंकर शाह तथा उनके पुत्र कुवर रघुनाथ शाह अत्यन्त प्रसिद्ध रहे हैं। राजा शंकर शाह और कुवर रघुनाथ शाह ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आजादी की जंग लड़ते हुए देश पर अपने प्राण न्योछावर कर दिये थे। पूरे गोंडवाना क्षेत्र में गोंडी प्रमुख भाषा थी। विभिन्न कारणों से इसके बोलने वालों की संख्या कम होती जा रही है। भीलांचल में भीली के साथ-साथ भिलाली, बारेली और पटलिया बोलियाँ प्रचलित है। भीली वर्तमान में देश की सबसे अधिक बोली जाने वाली जनजातीय भाषा है। यह मध्यप्रदेश के अलावा राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र सहित देश के कुछ अन्य राज्यों में भी प्रयुक्त की जाती है।  मध्यप्रदेश की विभिन्न जनजातियों के देवी-देवता, पर्व-त्यौहार, जात्रा और मेले अलग-अलग हैं। भौगोलिक क्षेत्र और सामाजिक संरचना के अनुसार इनकी मान्यताएँ, परम्पराएं, रहन-सहन, पहनावा, जन्म-मृत्यु, विवाह संस्कार आदि भी भिन्न हैं। पारंपरिक कृषि पद्धतियों, पशुपालन, आखेट, वनोपज संग्रहण आदि के तरीकों में भी कमोबेश अंतर मिलता है। आजीविका के प्रमुख साधन के रूप में वनोपज संग्रहण और पशुपालन प्रायः सभी जनजातियों में प्रचलित है। पारम्परिक ज्ञान मौखिक संपदा के रूप में आज भी विद्यमान है। बैगा, सहरिया और भारिया जनजातियाँ वनौषधियों की पहचान और उपचार में विशेष रूप से दक्ष हैं। गोदना प्रायः सभी जनजातियों में परम्परागत देह अलंकार के रूप में प्रचलित है। अतिथि सत्कार को सभी जनजातियाँ प्राथमिकता देती हैं। सामाजिक व्यवस्था में गोत्रों का विशेष महत्व है। समगोत्रीय विवाह सभी जनजातियों में वर्जित है। नृत्य-संगीत जनजाति समूहों के परिश्रम की थकान और दुख को आनंद में बदलने का एक विशेष माध्यम है।


33 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को दी जा रही आर्थिक मजबूती                                                                            


प्रदेश में तेन्दूपत्ता संग्रहण के जरिए राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा 33 लाख संग्राहकों, जिनमें अधिकतर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के हैं, को आर्थिक मजबूती प्रदान की जा रही है। वनमंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कहा है कि इन वर्गों को तेंदूपत्ता संग्रहण का पारिश्रमिक और प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) प्रदान किया जा रहा है। इनमें 44 फीसदी महिलाएँ हैं। वनमंत्री डॉ.शाह ने बताया कि प्रदेश में राष्ट्रीयकृत लघु वनोपज के व्यापार से होने वाली शुद्ध आय का 70 प्रतिशत भाग संग्राहकों को प्रोत्साहन पारिश्रमिक के रूप में बोनस, 15 फीसदी वन विभाग की देख-रेख में विकास एवं प्रशिक्षण आदि के लिए और 15 फीसदी ग्रामों की मूलभूत सुविधाओं और कल्याणकारी योजना के क्रियान्वयन में खर्च किया जाता है।


397 करोड़ का हुआ भुगतान

वनमंत्री डॉ. शाह ने बताया कि पिछले वर्ष 15.88 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण में संग्राहकों को 397 करोड़ रूपये मजदूरी का भुगतान किया गया। इस वर्ष 16.60 लाख मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण हो चुका है। संग्रहण वर्ष 2018 में संग्रहित और तेंदूपत्ता के व्यापार से अर्जित हुए शुद्ध लाभ में से 282.47 करोड़ रूपए की राशि प्रोत्साहन पारिश्रमिक के रूप में भुगतान की गई है।


प्रति मानक बोरा की बढ़ाई दर

वन मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर संग्रहण मजदूरी 2 हजार रूपये प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर 2500 रूपये प्रति मानक बोरा निर्धारित की गई है। संग्राहकों को उनके द्वारा संग्रहित मात्रा अनुसार नगद भुगतान की व्यवस्था भी की गई है। वन धन विकास केन्द्र योजना के प्रथम चरण में प्रदेश के 13 जिलों में 86 केन्द्र स्वीकृत किए गए हैं। इसमें एक केन्द्र में 300 संग्राहकों के मान से 25 हजार 800 संग्राहक होंगे। ट्राइफेड द्वारा प्रत्येक केन्द्र में 15 लाख रूपये प्रशिक्षण और उपकरणों के लिए मंजूर किए गए हैं।


जन-सामान्य में बिल लेने की प्रवृत्ति विकसित करना आवश्यक- मुख्यमंत्री

  • एक दिसम्बर से वन विभाग की सभी नीलामिया ऑनलाइन होंगी मुख्यमंत्री श्री चौहान ने की वर्ष 2021-22 की राजस्व प्राप्तियों की समीक्षा

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि राजस्व संकलन से ही प्रदेश में विकास और जन-कल्याण के कार्य संभव होते हैं। अतरू राजस्व संकलन में लगे विभागों का प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। प्रदेश की जनता पर बिना अधिक बोझ डाले, राजस्व संकलन में वृद्धि के हरसंभव प्रयास किए जाए। टैक्स की परिधि का अधिक लोगों तक विस्तार कर हम राजस्व संकलन बढ़ा सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि खरीदी गई वस्तुओं का बिल लेने की प्रवृत्ति जन-जन में विकसित करना आवश्यक है। जन-सामान्य में यह भावना होनी चाहिए कि बिल लेने से राज्य सरकार को राजस्व प्राप्त होता है, जो विकास और जन-कल्याण के काम आता है। अतरू हम बिल लेकर राज्य के विकास में योगदान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान मंत्रालय में वर्ष 2021-22 की राजस्व प्राप्तियों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में वाणिज्यिक कर, वित्त, योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री श्री जगदीश देवड़ा, वन मंत्री कुंवर विजय शाह, राजस्व मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव वित्त श्री मनोज गोविल उपस्थित थे। अन्य विभागीय अधिकारियों ने बैठक में वर्चुअली सहभागिता की।


डिजिटल तकनीक तथा डाटा एनालिटिक्स का उपयोग करते हुए जीएसटी कलेक्शन सुधारा जाए

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने वन विभाग की सभी नीलामियाँ 01 दिसम्बर से ऑनलाइन करने के निर्देश दिए। उन्होनें कहा कि प्रदेश में खनिज ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण किया जाए। आवश्यकता होने पर भारत सरकार के संबंधित विभागों से बात कर कार्य को गति प्रदान करें। डिजिटल तकनीक तथा डाटा एनालिटिक्स का उपयोग करते हुए जीएसटी कलेक्शन को भी राज्य में सुधारा जाए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने नई आबकारी नीति तथा हैरीटेज वाईन पॉलिसी जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। बैठक में जानकारी दी गई कि नए वाहनों की कम आपूर्ति के परिणामस्वरूप वाहनों की बिक्री कम हुई है, जिससे परिवहन से आने वाले राजस्व में कमी आई है। वाहनों की आपूर्ति बढ़ने के साथ निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप राजस्व प्राप्त होने की संभावना है। बैठक में खनिज, वैट, जी.एस.टी., आबकारी, स्टाम्प एवं पंजीयन, परिवहन, ऊर्जा, वन, राजस्व, सिंचाई तथा नर्मदा घाटी विकास की राजस्व प्राप्तियों की समीक्षा की गई।


क्रेडिट आउटरीच कैम्पेन 15 नवम्बर तक


जिला मुख्यालय और विकासखण्ड स्तर पर पब्लिक सेक्टर बैंकों तथा आरआरबी द्वारा 15 नवम्बर तक क्रेडिट आउटरीच कैम्पेन चलाया जाएगा, जिसमें मैगा शिविरों का आयोजन होगा। इनमें केन्द्र और राज्य शासन की योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को बैंक ऋण स्वीकृत और वितरित किए जाएंगे। यह कार्य राज्य-स्तरीय बैंकर्स कमेटी के तत्वावधान में होगा।


शाला मान्यता के आवेदन 15 तक


अशासकीय हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्ड्री विद्यालयों की वर्ष 2022-23 के नवीन मान्यता के लिए एमपी ऑनलाइन  पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा प्रारंभ कर दी गई है। विद्यालय एम.पी.ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 15 नवम्बर 2021 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।


अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति के 50 प्रतिशत से कम अंक वाले विद्यार्थी भी पात्र होंगे       


सहायक संचालक पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण ने बताया कि भारत सरकार के माध्यम से संचालित मेरिट कम मीन्स छात्रवृत्ति योजना के तहत अब विद्यार्थियों को परीक्षा में 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता से छूट दी गई है। इस छूट का लाभ लेने के लिये विद्यार्थियों से अपील की गई है कि वे छात्रवृत्ति के लिये अपने आवेदन ऑनलाईन नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर करवाएं।


दुग्ध उत्पादक किसानों और उनके परिवारों को भी बीमा का संबल–2 लाख का बीमा मिलेगा   


मध्यप्रदेश को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन द्वारा दुग्ध समितियों के सदस्यों और उनके परिवार के लिये साँची चिकित्सा सहायता बीमा योजना स्वीकृत की गई है। योजना में दुग्ध प्रदायक सदस्यों और उनके आश्रित परिजनों को सामान्य बीमारी के उपचार के लिये 01 लाख रुपये और गंभीर बीमारियों के लिये 02 लाख रुपये प्रति परिवार प्रतिवर्ष बीमा राशि का प्रावधान है। बीमा राशि का भुगतान न्यू इण्डिया इंश्योरेंश कम्पनी द्वारा किया जायेगा। योजना में दुग्ध प्रदायक सदस्यों एवं उन पर आश्रित 3 परिजनों को लाभान्वित किया जायेगा। परिजनों में पति या पत्नी और 3 माह से 25 वर्ष तक की आयु के 2 बच्चे शामिल हैं।


खाद्य पदार्थों में मिलावट की गोपनीय शिकायत अब पोर्टल पर भी


खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम संबंधी विविध कार्यों को समग्र पोर्टल पर लाने के मकसद से खाद्य सुरक्षा एमआईएस पोर्टल-पोशन (पीओएसएचएएन) शुरू किया गया है। इस पोर्टल पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006, विनियम 2011 के नियमों का खाद्य कारोबारी द्वारा पालन नहीं करने व खाद्य पदार्थों में मिलावट या अनियमितता संबंधी शिकायत लोगों द्वारा गोपनीय तरीके से दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके लिए आम नागरिक mpfdamis.in पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इस सिलसिले में बताया गया है कि उक्त अधिनियम की धारा 31 के तहत सभी खाद्य कारोबारियों को पंजीयन कराना व खाद्य लायसेंस लेना अनिवार्य है।  ई- मेल foodsafetyhelpdeskmp@gmail.com पर इसकी जानकारी ली जा सकती है।


प्रदेश में 15 नवंबर से शुरू होंगे सभी आँगनबाड़ी केंद्र "आइए आंगनबाड़ी" थीम पर होंगे कार्यक्रम


प्रदेश में कोविड-19 के संक्रमण के दृष्टिगत हितग्राहियों की सुरक्षा के लिए आँगनबाड़ी केंद्रों का संचालन स्थगित किया गया था। राज्य शासन ने कोविड-19 के संक्रमण से बचाव की मानक संचालन प्रक्रिया का पालन कर आँगनबाड़ी केंद्र प्रारंभ करने का निर्णय लिया है। संचालक महिला बाल विकास डॉ राम राव भोसले ने बताया कि प्रदेश में 15 नवंबर से आँगनबाड़ी केंद्रों का संचालन जन-प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हितग्राहियों के साथ "आइए आंगनबाड़ी" थीम पर समारोहपूर्वक प्रारंभ किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आइए आँगनबाड़ी कार्यक्रम में समुदाय के सहयोग से स्थानीय खाद्य विविधता आधारित विशेष भोजन तैयार कर हितग्राहियों को परोसा जाएगा। डॉ. भोसले ने बताया कि आंगनबाड़ी केन्द्र प्रारंभ होने के बाद प्रतिदिन पूर्व की भांति नियत समय-सारणी अनुसार उनका संचालन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कोविड-19 संक्रमण काल में 3 से 6 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों को रेडी टू ईट सामग्री का वितरण स्थगित रखा जाएगा। बच्चों को नाश्ता और गर्म पका हुआ खाना प्रदाय किया जाएगा। संचालक महिला बाल विकास डॉ राम राव भोसले ने बताया कि कोविड-19 महामारी संक्रमण काल में संक्रमण के फैलाव की रोकथाम के लिए आँगनबाड़ी केंद्रों का संचालन स्थगित किया गया था। इस अवधि में हितग्राहियों को वैकल्पिक पूरक पोषण आहार निरंतर उपलब्ध कराया गया। उन्होंने बताया कि 15 नवम्बर से आँगनबाड़ी केंद्र का संचालन एवं सेवा प्रदाय करने के संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गई है। आँगनवाड़ी केन्द्रों में तीन से 6 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को लाने के लिये स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जिला-स्तरीय क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी और जिला कलेक्टर द्वारा निर्णय लिया जायेगा। संचालक महिला बाल विकास डॉ. भोंसले ने बताया कि आंगनवाड़ी केन्द्रों में 65 वर्ष से अधिक आयु और बीमारी वाले व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित रहेगा। गर्भवती महिलाओं और दस वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए गतिविधियों की प्राथमिकता के आधार पर कोविड से बचाव की सावधानियों का पालन सुनिश्चित किया जायेगा। उन्होंने बताया कि आँगनवाड़ी के अंदर और बाहर तथा आसपास की स्वच्छता एवं कोविड संक्रमण से बचाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जायेगी। संक्रमण से बचाव के लिए मास्क, सेनिटाइजर और दो गज की दूरी आदि सुरक्षा उपायों का पालन भी करना अनिवार्य होगा।

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