बनारस के रोडमैप से देश के विकास का रोडमैप बनता है: मोदी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 16 दिसंबर 2021

बनारस के रोडमैप से देश के विकास का रोडमैप बनता है: मोदी

  • कहा, ’वाराणसी देश को नई दिशा दे रहा’ , सदगुरु की राह से पूरी होगी विश्वगुरु की चाह , विंगम योग को जन-जन तक पहुंचाया महर्षि सदाफल देव, स्वर्वेद महामंदिर के 98वां वार्षिकोत्सव 

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वाराणसी (सुरेश गांधी) अपने संसदीय क्षेत्र के दो दिवसीय दौरे पर आएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को स्वर्वेद महामंदिर धाम के वार्षिकोत्सव में भी शामिल हुए। मौका था उमरहा स्थित दुनिया के सबसे बड़े मेडिटेशन सेंटर स्वर्वेद महामंदिर में विहंगम योग के 98वां वार्षिकोत्सव का। इस दौरान पीएम ने सदाफलदेव की प्रतिमा को पुष्प अर्पित कर सीस नवाया। स्वर्वेद महामंदिर धाम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वर्वेद मंदिर का दौरा करने के बाद एक बड़ी सभा को संबोधित किया। इस दौरान पीएम ने लोगों से अमर सदगुरु सदाफलदेव के योग पथ का अनुसरण कर देश को विश्वगुरु की डगर पर अग्रसर करने का आह्वान किया।


पीएम मोदी ने कहा कि काशी की उर्जा अक्षुण्ण तो है ही, ये नित नया विस्तार भी लेती रहती है। आज ही गीता जयंती भी है। आज ही के दिन धरती को भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का ज्ञान दिया था। आज के ही दिन कुरुक्षेत्र की युद्ध की भूमि में जब सेनाएँ आमने सामने थीं, मानवता को योग, आध्यात्म और परमार्थ का परम ज्ञान मिला था। मैं जब काशी आता हूं या दिल्ली में भी रहता हूं, तो प्रयास हूं कि बनारस के विकास कार्यों को गति देता रहूं। मैं सद्गुरु सदाफल देव जी को नमन करता हूं। उनकी आध्यात्मिक उपस्थिति को प्रणाम करता हूं। कल काशी ने भव्य विश्वनाथ धाम महादेव के चरणों में अरपिर्त किया और आज विहंगम योग संस्थान का आयोजन हो रहा है। वाराणसी देश को नई दिशा दे रहा है। हमारी सभ्यता के ये शहर पूरे विश्व को दिशा दिखा सकते हैं। बनारस के विकास की बात करते हैं तो इससे पूरे भारत के विकास का रोडमैप बन जाता है। काशी में विकास का लाभ पर्यटन के साथ-साथ कला क्षेत्र को भी मिलेगा।  पीएम ने कहा कि काशी के कौशल को नई ताकत मिल रही है। आज परिस्थिति बदल रही है। जब देश-दुनिया से लोग काशी आते हैं, तो उन्हें सब कुछ बदला-बदला सा लगता है। एयरपोर्ट से शहर पहुंचने में समय नहीं लगता है। रिंग रोड का काम रिकॉर्ड टाइम में पूरा हुआ है। बनारस की ओर आने वाली अन्य सड़कें भी चौड़ी हो गई हैं। पहले वाराणसी की बदहाली देख लोग निराश हो जाते थे, लेकिन अब असल परिवर्तन दिखता है। सड़के सुधर गई हैं, तेज गति से नई सड़कें बन रही हैं, बिजली के तारों को अंडरग्राउंड कर दिया गया है। गंगा घाटों पर सभ्यता और संस्कृति के अनुरूप ही विकास हुआ है। बनारस एक बड़े मेडिकल हब के तौर पर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव से काशी ने दिखा दिया है कि इच्छा शक्ति हो तो कुछ भी संभव है। उन्होंने केदारनाथ का भी जिक्र कर कहा कि अब वहां रिकॉर्ड श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। यही विश्वास पूरे देश में दिख रहा है। सद्गुरु सफलदेव ने कहा है, दया करे सब देव पर ऊंच नीच नहीं जान। 


इतिहास को बदला गया 

पीएम ने कहा ये भारत ही है जहां के आजादी के सबसे बड़े आंदोलन के नेता को महात्मा बुलाती है, जहां आजादी की लड़ाई के साथ धार्मिक चेतना भी साथ चलती रही। संत सदाफलदेव जी ने भी आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जेल में ही उन्होंने स्वर्वेद पर चिंतन किया और बाहर आकर उसे मूर्त रूप दिया। हमारे स्वाधीनता संग्राम का इतिहास वैसे नहीं दर्ज किया गया जैसा किया जाना चाहिए था। पीएम ने कहा हमारा देश इतना अद्भुत है कि यहां जब भी समय विपरीत होता है, कोई न कोई संत-विभूति, समय की धारा को मोड़ने के लिए अवतरित हो जाती है। ये भारत ही है जिसकी आजादी के सबसे बड़े नायक को दुनिया महात्मा बुलाती है। इच्छाशक्ति हो तो परिवर्तन दिखता है। 


सद्गुरू ने स्वदेशी का दिया था मंत्र 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि स्वाधीनता संग्राम के समय सद्गुरू ने हमें स्वदेशी का मंत्र दिया था। आज उसी भाव में देश ने अब आत्मनिर्भर भारत मिशन शुरू किया है। आज देश के स्थानीय व्यापार-रोजगार को, उत्पादों को ताकत दी जा रही है। लोकल को ग्लोबल बनाया जा रहा है। यहां देश भर के अलग-अलग कोने से आए हुए लोग जब काशी से वापस जाएंगे तो यहां के अनुभव, विचार और आशीर्वाद सहित न जाने क्या कुछ लेकर जाएंगे। पीएम मोदी ने कहा आज देश का मंत्र है- ’सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’। आज देश ’मैं’ के भाव से उठकर राष्ट्र के भाव को आत्मसात कर रहा है। आज जब हम पूरी दुनिया को योग दिवस मनाते हुए, योग का अनुसरण करते हुए देखते हैं तो लगता है कि सद्गुरु का आशीर्वाद फलिभूत हो रहा है। सद्गुरु सदाफलदेव जी ने समाज के जागरण के लिए विहंगम योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए यज्ञ किया था। आज वह संकल्प बीज हमारे बीच एक वटवृक्ष के रूप में हमारे सामने खड़ा है। 


पर्यटकों की संख्या दुगुनी हुई 

कल रात 12 से 12ः30 बजे के बाद मुझे मौका मिला तो मैं फिर अपनी काशी और उसके विकास कार्यों को देखने निकल पड़ा। गोदौलिया और बनारस रेलवे स्टेशन में विकास कार्य देखने को मिले। यहां 2015 की तुलना में अब पर्यटकों की संख्या दोगुनी हो गई है। कोरोना काल में बाबतपुर एयरपोर्ट से 30 लाख लोग आए-गए।


हम ऑर्गेनिक फॉर्मिंग को बढ़ावा दे रहे

हम गोवंश को प्रगति का एक सशक्त माध्यम बनाना चाहते हैं। इसलिए हम ऑर्गेनिक फॉर्मिंग को बढ़ावा दे रहे हैं। 6 दिसंबर को जीरो बजट नेशनल फॉर्मिंग एक बड़ा कार्यक्रम होने जा रहा है। इसमें जुड़ कर प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी लें। आज से 2 साल बाद आप विहंगम योग संस्थान के 100वें वार्षिकोत्सव में शामिल होंगे। इसके लिए आप सभी बेटी को पढ़ाने का संकल्प लें। जो जिम्मेदारी उठा सकते हैं, वह गरीब बेटियों को पढ़ाने का संकल्प लें। पानी बचाने के लिए हम सभी को नदियों जैसे अपने जल स्त्रोतों को बचाना है और उन्हें संरक्षित व सुरक्षित करके रखना है। हमें अपने आसपास स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना है। परमात्मा के नाम से सभी को ऐसा काम जरूर करना है जिससे समाज को लाभ मिले।


पीएम ने पूरा स्वर्वेद मंदिर देखा

इस दौरान प्रधानमंत्री ने पूरे महामंदिर धाम को देखा और वहां के पुजारियों से मंदिर की खासियतों की जानकारी ली। वहां उनका स्वागत विहंगम योग के वर्तमान सदगुरु स्वतंत्रदेव जी महाराज और संत प्रवर श्री विज्ञानदेव जी महाराज ने की। पीएम मोदी ने वहां सबसे पहले विहंगम योग के प्रणेता सदगुरु सदाफलदेव जी महाराज की प्रतिमा पर पुष्पांजली कर उनका आशीर्वाद लिया। इस मौके पर यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ भी वहां मौजूद रहे। सदगुरु स्वतंत्र देव जी और संत प्रवर ने उन्हें महामंदिर की दीवारों पर उकेरित स्वर्वेद की चौपाइयों और विहंगम योग के बारे में बताया। 


जहां 20 हजार लोग कर सकते हैं मेडिटेशन! 

उमरहा स्थित इस मंदिर का भव्य निर्माण किया गया है। मंदिर इतना बड़ा है कि इसमें 20 हजार से ज्यादा लोग एक साथ मेडिटेशन कर सकते हैं और इस वजह से यह दुनिया में सबसे बड़ा मेडिटेशन सेंटर है। स्वर्वेद. स्वर्वेद दो शब्दों से मिलकर बना है स्वः और वेद. स्वः का एक अर्थ है आत्मा,वेद का अर्थ है ज्ञान। स्वः का दूसरा अर्थ है परमात्मा,वेद का अर्थ है ज्ञान. जिसके द्वारा आत्मा का ज्ञान प्राप्त किया जाता है, जिसके द्वारा स्वयं का ज्ञान प्राप्त किया जाता है, उसे ही स्वर्वेद कहते हैं। इस मंदिर में किसी विशेष भगवान की पूजा के बजाय मेडिटेशन किया जाता है और यह एक मेडिटेशन स्थल है। स्वर्वेद महामंदिर के निर्माण कार्य 2014 से शुरू हुआ जो अभी तक लगातार चल रहा है. जो साधना का विशालतम केंद्र माना जा रहा है। यह भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अमर सेनानी महर्षि सदाफलदेव जी महाराज और सद्गुरु सदाफलदेव विहंगम योग सन्त समाज से संबंधित है। 


स्वर्वेद महामंदिर आकर्षण का केंद्र 

यह सात मंजिला है और 35 करोड़ की ज्यादा की लागत से 64 हजार स्कवायर फीट में बनाया गया है. स्वर्वेद मंदिर 180 फीट ऊंचा है. यहां के अनुयायी भारत के करीब सभी राज्यों एवं विदेशों में भी हैं. इस मंदिर में मकराना मार्बल का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें 3137 स्वर्वेद के दोहे लिखे गए हैं. इसमें कमल के आकार का गुंबद बना हुआ है.

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