बिहार : पिंजरे के पंछी रे,तेरा दर्द ना जाणे कोए - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 27 नवंबर 2022

बिहार : पिंजरे के पंछी रे,तेरा दर्द ना जाणे कोए

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पटना. संत माइकल हाई स्कूल में आउटसोर्सिंग के माध्यम से प्रहरी बहाल है.आउटसोर्सिंग के द्वारा बहाल प्रहरियों की जिंदगी फिल्मी गाना की तरह है.पिंजरे के पंछी रे,तेरा दर्द ना जाणे कोए,तेरा दर्द ना जाणे कोए।।कह ना सके तू,अपनी कहानी,तेरी भी पंछी,क्या जिंदगानी  रे,विधि ने तेरी कथा लिखी है,आँसू में कलम डुबोय,तेरा दर्द ना जाणे कोए।।लागत में कटौती करने के चक्कर में धड़ल्ले से मिशनरी स्वयंसेवी संस्थाओं के द्वारा आउटसोर्सिंग कंपनी से मदद ले रहे है.जहां कंपनी वाले जमकर शोषण कर रहे हैं. संत माइकल हाई स्कूल के प्रहरी का कहना है कि आउटसोर्सिंग उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें एक कंपनी अपने किसी आंतरिक कार्य के लिए दूसरी कंपनी के साथ समझौता करके उससे वह काम करवाती है।   उन्होंने कहा कि यह संगठनों को अधिक उत्पादक बनाने, प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करने और लागत में कटौती करने में मदद करता है.आउटसोर्स करने का कारण विविधतापूर्ण है लेकिन इसका मुख्य आकर्षण और लोकप्रियता शीर्ष प्रतिभा और एक कुशल कार्यबल तक पहुंच है और आपका व्यवसाय 24 घंटे, सप्ताह में 7 दिन चल सकता है.  उन्होंने कहा कि जब संस्थाओं को किसी योजना को क्रियान्वित करने के लिए एफसीआएस के माध्यम से विदेशी फंड लाया जाता था.उन संस्थाओं के द्वारा आंतरिक स्तोत्र से संविदा कर्मचारियों को भुगतान किया जाता था. अब उन संस्थाओं के द्वारा आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का भुगतान एजेंसी के माध्यम से किया जाता है.इस समय संस्थाओं के द्वारा आउटसोर्सिंग कंपनी को एक प्रहरी के भुगतान के रूप 18000 रू.दिया जाता है.आउटसोर्सिंग कंपनी हम प्रहरियों को मात्र:12000 रू.दिया जाता है. बताया गया कि आउटसोर्सिंग कंपनी के द्वारा लोकल व्यक्ति के बदले बाहर एक पार्टी को काम पर रखने का व्यवसाय अभ्यास है जो सेवाओं का प्रदर्शन करता है और सामान बनाता है जो पारंपरिक रूप से कंपनी के अपने कर्मचारियों और कर्मचारियों द्वारा घर में किया जाता था.आउटसोर्सिंग आमतौर पर कंपनियों द्वारा लागत में कटौती के उपाय के रूप में की जाने वाली प्रथा है. जैसे, यह ग्राहकों की सहायता से लेकर निर्माण से लेकर बैक ऑफिस तक कई तरह की नौकरियों को प्रभावित कर सकता है. यह सच है कि आउटसोर्सिंग व्यवसायों को श्रम लागत को काफी कम करने में मदद कर सकती है.वित्तीय वर्ष में ही आय-व्यय व लाभ सही-सही आकलन हो जाएगा.संगठन को वर्तमान  न ही भविष्य के बारे में चिंता करने की जरूरत है.संगठन को शुद्ध मुनाफा दृष्टिगोचर होगा.वहीं संगठन को कर्मियों को चयन करके बहाली करने की परेशानी नहीं होती है.एकमुश्त राशि आउटसोर्सिंग कंपनी को देकर हाथ धो लेना पड़ता है.कंपनी अपने कर्मचारियों के साथ अलग-अलग मुआवजा संरचना स्थापित कर देते हैं, जिससे उन्हें कम पैसे में काम पूरा करने में मदद मिलती है. लागत बचत के अलावा, कंपनियां व्यवसाय के मुख्य पहलुओं पर बेहतर ध्यान केंद्रित करने के लिए आउटसोर्सिंग रणनीति का उपयोग कर सकती हैं. गैर-प्रमुख गतिविधियों की आउटसोर्सिंग दक्षता और उत्पादकता में सुधार कर सकती है क्योंकि एक अन्य संस्था इन छोटे कार्यों को फर्म से बेहतर करती है.

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