- भाजपा ने न केवल नीतीश कुमार को सत्ता से हटाया, उनके पूरे राजनीतिक विमर्श को ही पलट दिया
- शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त, पेपर लीक और दमन के खिलाफ 24 मई को छात्र-युवा उतरेंगे सड़कों पर
- काॅरपोरेट भूमि अधिग्रहण और दमनकारी शासन के खिलाफ संघर्ष तेज करेगा भाकपा-माले
दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि बुलडोजर भाजपा के शासन का प्रतीक है. यह बुलडोजर किसी माफिया, भ्रष्टाचारियों या बड़े अपराधियों पर नहीं चल रहा, बल्कि गरीबों, फुटपाथ दुकानदारों, झुग्गीवासियों और मुसलमानों पर चलाया जा रहा है. यह कार्रवाई कानून और न्यायिक प्रक्रिया को दरकिनार कर की जा रही है. बिहार में अब बिना किसी निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के लोगों को अपराधी घोषित कर गोली मारी जा रही है. पुलिस खुलेआम कह रही है कि - गोली पैर में नहीं, छाती में मारी जाएगी. बुलडोजर और एनकाउंटर की राजनीति के जरिए किसी को भी बांग्लादेशी, अतिक्रमणकारी या देशविरोधी बताकर निशाना बनाया जा रहा है. पिछले चार दिनों में पुलिस द्वारा की गई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि बिना किसी पारदर्शी जांच के पांच लोगों को गोली मार दी गई और इसमें एक खास समुदाय को निशाना बनाया गया. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि आज देश के छात्र-युवा व खासकर जेन जी गहरे आक्रोश में है. यह आक्रोश - काॅकरोच जनता पार्टी - के रूप में सोशल मीडिया पर दिख रहा है. एक ओर बेरोजगारी चरम पर है, दूसरी ओर भर्ती परीक्षाएं लगातार पेपर लीक का शिकार हो रही हैं. दिल्ली से लेकर पटना तक शिक्षा व्यवस्था माफिया और भ्रष्टाचार के कब्जे में चली गई है. नीट और एईडीईओ जैसी परीक्षाओं के पेपर लीक होना प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि संगठित अपराध तंत्र और राजनीतिक संरक्षण का परिणाम है. लाखों छात्र-युवाओं का भविष्य बर्बाद किया जा रहा है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा छात्र-युवाओं के लिए ‘काॅकरोच’ शब्द के इस्तेमाल पर भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह टिप्पणी युवा पीढ़ी के सम्मान पर हमला है. उन्होंने कहा कि जिन युवाओं के पास नौकरी नहीं, जिनकी परीक्षाएं लीक हो रही हैं, जिन पर लाठियां बरसाई जा रही हैं, उन्हें अपमानित करने का अधिकार किसी को नहीं है. उन्होंने पटना में शिक्षक अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा कि सरकार संवाद और समाधन की जगह दमन का रास्ता अपना रही है.
उन्होंने केंद्रीय और बिहार सरकार के शिक्षा मंत्रियों से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. सोशल मीडिया पर चल रहे व्यापक छात्र-युवा विरोध को जमीन पर उतारने के लिए आइसा और आरवाइए ने 24 मई को राज्यव्यापी प्रतिरोध दिवस का आह्वान किया है. उन्होंने कहा कि ‘काॅकरोच कहे गए छात्र-नौजवान’ अब सड़कों पर उतरकर अपने सम्मान, रोजगार और शिक्षा के अधिकार की लड़ाई लड़ेंगे. कहा कि बिहार और देश में मजदूर आंदोलनों पर भी दमन तेज हुआ है. मजदूर नेता सत्यम वर्मा सहित कई जनपक्षधर कार्यकर्ताओं पर एनएसए जैसे कठोर कानून लगाकर जेलों में डाला जा रहा है. बिहार में कृषि योग्य जमीनों को काॅरपोरेट कंपनियों के हवाले करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. भागलपुर में अडाणी समूह को बेहद कम कीमत पर जमीन दिए जाने के मामले और 11 जिलों में सैटेलाइट टाउनशिप के नाम पर लाखों एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री रोकने के सरकारी आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि यह काॅरपोरेट भूमि अधिग्रहण स्वीकार नहीं. 16 से 18 मई तक दरभंगा में संपन्न भाकपा-माले के 12वें राज्य सम्मेलन ने आने वाले दौर में लोकतंत्र, संविधान, सामाजिक न्याय और जनाधिकारों के सवालों पर संघर्ष को और तेज करने का संकल्प लिया. सम्मेलन ने एक बार फिर कुणाल को राज्य सचिव चुना. साथ ही 107 सदस्यीय नई राज्य कमिटी का गठन किया गया, जिसमें 27 नए चेहरे शामिल किए गए हैं. इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा कार्यकर्ता शामिल हैं, जो पार्टी के सामाजिक विस्तार और नई पीढ़ी की भागीदारी को दर्शाता है.

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