दिल्ली : न्यायालय ने विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए व्यक्ति के खिलाफ पॉक्सो मामला रद्द किया - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 10 जून 2026

दिल्ली : न्यायालय ने विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए व्यक्ति के खिलाफ पॉक्सो मामला रद्द किया

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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति की सज़ा यह उल्लेख करते हुए रद्द कर दी कि पीड़िता ने बालिग होने के बाद आरोपी से शादी कर ली है। संविधान का अनुच्छेद 142 उच्चतम न्यायालय को यह अधिकार देता है कि वह अपने पास लंबित किसी भी मामले में ‘‘पूर्ण न्याय’’ सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी कोई भी आदेश पारित कर सके। इस मामले में, पुरुष से महिला को तब प्यार हुआ था जब वह 12वीं कक्षा में पढ़ती थी। व्यक्ति ने जब उससे शादी करने से इनकार कर दिया, तो महिला ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसके परिणामस्वरूप उसे नाबालिग के साथ शारीरिक संबंध बनाने के अपराध में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत 10 साल की सज़ा सुनाई गई। 


बाद में, महिला ने किसी और से शादी कर ली, लेकिन उसके पिछले रिश्ते के बारे में पता चलने के कुछ ही दिनों बाद इस व्यक्ति ने उसे छोड़ दिया। ज़मानत पर बाहर आने के बाद आरोपी व्यक्ति ने महिला के साथ सुलह कर ली और दोनों ने शादी करके साथ रहना शुरू कर दिया। शादी के बाद, यह जोड़ा साथ रहने लगा और इसके बाद महिला ने अपने पति को पॉक्सो अधिनियम के तहत सुनाई गई सज़ा को रद्द करने का अनुरोध करते हुए मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। हालांकि, उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद यह जोड़ा उच्चतम न्यायालय पहुंचा। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदूरकर की पीठ ने व्यक्ति को सुनाई गई सजा रद्द करते हुए बरी कर दिया। पीठ ने कहा, ‘‘मामले के गुण-दोष पर जाए बिना, और मामले की खास परिस्थितियों को देखते हुए, हम अपीलकर्ता की दोषसिद्धि और सज़ा के फ़ैसले को रद्द करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी व्यापक शक्तियों का इस्तेमाल करना उचित समझते हैं... यह फ़ैसला पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(1) के तहत लगे आरोप के संबंध में है और अपीलकर्ता को इस आरोप से बरी किया जाता है।’’न्यायालय ने कहा कि यह आदेश मामले के खास तथ्यों के आधार पर दिया गया है और इसे किसी अन्य मकसद के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा।

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