विशेष : भारतीय शहीद व सभी वीर सैनिकों क़ो सलाम (कारगिल विजय दिवस पर विशेष) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 27 जुलाई 2026

विशेष : भारतीय शहीद व सभी वीर सैनिकों क़ो सलाम (कारगिल विजय दिवस पर विशेष)

Sanjay-goshwami
भारत में हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है, ताकि कारगिल युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की जीत को याद किया जा सके।कारगिल का युद्ध हमें सेना के पराकर्म और साहस की याद दिलाता है जिसमें अटलजी के नेतृत्व में युद्ध में जीत हासिल की करगिल युद्ध को ठीक 27 साल हो चुके हैं। वो युद्ध जिसमें हमने अपने 570 सैनिकों को खोया लेकिन पाकिस्तान के लगभग 3000 सैनिकों को मारा हमारी सेना ने ऊँची पहाड़ी और -10 डिग्री तापमान पर भी भूखे प्यासे रहकर अपनी मात्रभूमि की रक्षा की और अटलजी जैसा प्रधानमंत्री जिसने अमेरिका से बिलकुल नहीं डरे और उन्होंने कहा तक जब तक भारत की 1इंच जमीन भी कब्जे से मुक़्त नहीं करा लेते तब तक क़ोई बात नहीं करेंगे । अपने वीर सैनिकों ने शहादत से पहले, 18 हजार फीट ऊंचाई, माइनस 13 डिग्री की कड़कड़ाती ठंड और भयंकर गोलीबारी के बीच सैनिकों ने दुश्मनों से लोहा लिया कारगिल युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ी गई एक ऐसी लड़ाई थी जो बहुत ऊँचाई वाले इलाके में हुई थी। यह युद्ध 3 मई से 26 जुलाई 1999 तक, यानी 2 महीने, 3 हफ़्ते और 2 दिन (कुल 85 दिन) तक लद्दाख के कारगिल ज़िले में चला। यह लड़ाई विवादित कश्मीर क्षेत्र में 'लाइन ऑफ़ कंट्रोल' (LoC) के पास हुई थी शुरू में, घुसपैठ के नेचर और हद के बारे में कम जानकारी होने के कारण, इलाके में मौजूद भारतीय सैनिकों ने मान लिया कि घुसपैठिए जिहादी हैं और उन्होंने ऐलान किया कि वे कुछ दिनों में उन्हें बाहर निकाल देंगे। बाद मेंलाइन ऑफ़ कंट्रोल (LOC( पर दूसरी जगहों पर घुसपैठ का पता चलने और घुसपैठियों के इस्तेमाल किए गए तरीकों में अंतर के कारण भारतीय सेना को एहसास हुआ कि हमले का प्लान बहुत बड़े पैमाने पर पहले से  था। घुसपैठीयों को हमारी वीर सैनिकों ने मिट्टी मेँ मिला दिया और  वहाँ  कब्ज़ा किया गया कुल एरिया 130 km2 – 200 km2 के बीच माना जाता है को  पाकिस्तानी आतंकवादियों से मुवत कराया जो बहुत दुर्लभ इलाके मे thi  भारत सरकार ने ऑपरेशन विजय के साथ जवाब दिया, जिसमें 200,000 भारतीय सैनिकों को भेजा गया। यह युद्ध 26 जुलाई, 1999 को पाकिस्तानी सेना के सैनिकों को उनके कब्ज़े वाली जगहों से निकालने के साथ ऑफिशियली खत्म हुआ, इस तरह इसे कारगिल विजय दिवस के तौर पर मनाया गया। युद्ध के दौरान भारतीय सेना के 527 सैनिकों ने अपनी जान गंवाई।


और इसे परमाणु हथियार रखने वाले दो देशों के बीच हुए कुछ गिने-चुने पारंपरिक युद्धों में से एक माना जाता है। कारगिल युद्ध एक अहम सैन्य घटना है, जो बेहद मुश्किल भौगोलिक हालात, रणनीतिक चुनौतियों और दोनों तरफ़ के सैनिकों की असाधारण बहादुरी के लिए जानी जाती है।इसमें इजराइल देश का साथ मिला इज़राइल कारगिल लड़ाई के दौरान एक ज़रूरी और भरोसेमंद पार्टनर साबित हुआ, जिसने भारत को ज़रूरी मोर्टार एम्युनिशन और जाहिर तौर पर उसके फाइटर जेट्स के लिए लेज़र-गाइडेड मिसाइलें भी जल्दी से दीं। जब ज़मीनी सैनिकों को क्लोज एयर सपोर्ट देने की कोशिश की गई, तो इंडियन एयर फ़ोर्स को पाकिस्तानी बंकरों की लिमिटेड नज़र, गलत अनगाइडेड मिसाइलों और LoC पार न करने के साफ इंस्ट्रक्शन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इन दिक्कतों को एडजस्ट करने और खास तौर पर कारगिल की ऊंचाइयों पर एक्यूरेसी की समस्या को ठीक करने के लिए, एयर चीफ मार्शल टिपनिस ने 30 मई को आईएफ मिराज 2000H फाइटर्स को ज़मीनी हमले के ऑपरेशन्स के लिए लेज़र-गाइडेड बम पहुंचाने में कैपेबल चुना। कई खातों के अनुसार, भारत को इज़रायल से अपने मिराज के लिए तुरंत लेजर-गाइडेड मिसाइलें प्रदान की गई थीं। जून 1999 में, अपग्रेड किए गए मिराज 2000H से सटीक हमलों ने पाकिस्तान के सैनिकों के ऊँची पहाड़ीयों पर सटीक हमला कर उसे पीछे हटने पर मजबूर किया अतः जबभी आपको मुश्किल वक़्त में आपका साथ देता है तो हमारा सबसे अच्छा मित्र होता है इसलिए भारत कभी तुर्की जैसा गद्दारी नहीं कर सकता जिसने उसे भूकंप में अपनी सबसे पहले राहत दल को भेजा था और डॉ से लेकर आपदा प्रबंधन के सारे टीम को भेजा था और उसी ने भारत को धर्म के नाम लेकर धोखा दिया और ऑपरेशन सिंदूर में केवल ड्रोन ही नहीं भेजे बल्कि अपने युद्धपोत और सैनिको को भी भेजा जो चीन से भी गन्दा काम किया इसलिए आज भारत ने भी इसके व्यापारिक रिश्ते तोड़ लिए और दिखा दिया भारत में दम है उसके ड्रोन जो पाकिस्तान नहीं चला पा रहें थे तो अपने ऑपरेटर को भी भेज दिया जिससे कई भारतीय मासूमों की जान चली गई आखिर ऐ कौन सा धर्म है जो आपको गद्दार बना देता है धर्म तो यह कहता है दोस्ती का फ़र्ज निभाना जैसे भगवान राम ने बाली को मार कर सुग्रीव को राजपाठ दिलाया तो सुग्रीव अंततः भगवान राम के भाई लक्ष्मण के क्रोध से भगवान राम का साथ दिया था हमें हमेशा अपने वीर जवान पर गर्व करना चाहिए.





संजय गोस्वामी

अनुशक्तिनगर, मुंबई 

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