वैशाली जिले के अकिलाबाद एवं बकापुर गांवों में मुख्यतः केले की खेती की जाती है। लगभग 12–18 दिनों तक 2–4 फीट पानी के जलभराव से केले के पौधों पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। इससे पौधों की वृद्धि, फलों के आकार, घौद के वजन तथा बाजार योग्य उपज में कमी आने की संभावना है। जिन केले के बागानों को अधिक नुकसान हुआ है, वहां पौधों और जड़ों की स्थिति देखकर दोबारा पौधे लगाने की जरूरत पड़ सकती है। लीची के पेड़ कुछ समय तक पानी में रहने को सहन कर सकते हैं। अभी ये शुरुआती जानकारी है। फसल और किसानों को हुए नुकसान का सही आकलन करने के लिए खेतों का विस्तृत सर्वेक्षण करना जरूरी है।
पटना, 23 सितम्बर, (रजनीश के झा) । डॉ. अनुप दास, निदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर के मार्गदर्शन में संस्थान के तीन वैज्ञानिकों की बहुविषयक टीम —डॉ. अजय कुमार, डॉ. रोहन कुमार रमण एवं डॉ. राकेश कुमार ने 22 सितंबर 2026 को सारण एवं वैशाली जिलों के बाढ़ प्रभावित गांवों का क्षेत्रीय दौरा किया। टीम ने गंगा एवं गंडक नदियों के बाढ़ के पानी से कृषि फसलों, बागवानी फसलों तथा कुछ हद तक पशुधन पर पड़े प्रभाव का प्रारंभिक आकलन किया।


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