25 अक्तूबर को नमो घाट पर ‘इंडियन एयर फोर्स एरियल डिस्प्ले-2026’ .युद्धभूमि से आपदा राहत तक मध्य वायु कमान की छह दशक से अधिक की गौरवगाथा होगी प्रदर्शित. वायु योद्धाओं की सटीकता, साहस, समन्वय और सेवा-समर्पण से रूबरू होंगे काशीवासी
आसमान में दिखेगा अनुशासन और सटीकता का अद्भुत मेल
भारतीय वायुसेना के हवाई प्रदर्शन में कुछ क्षण ऐसे होते हैं, जब आकाश केवल आकाश नहीं रह जाता। विमानों की गति, उनके बीच का सटीक अंतर, निर्धारित दिशा में एक साथ बदलती संरचनाएं और पायलटों का अद्भुत तालमेल—हर दृश्य के पीछे वर्षों का प्रशिक्षण, अनुशासन और असाधारण कौशल छिपा होता है। नमो घाट पर होने वाला एरियल डिस्प्ले नागरिकों को भारतीय वायुसेना की इसी पेशेवर क्षमता को करीब से महसूस करने का अवसर देगा। गंगा का विस्तृत आकाश और ऐतिहासिक घाट इस प्रदर्शन को विशिष्ट पृष्ठभूमि प्रदान करेंगे। यह आयोजन काशी के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यहां राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य सामर्थ्य की आधुनिक तस्वीर का सामना उस प्राचीन सांस्कृतिक विरासत से होगा, जिसके लिए वाराणसी दुनिया भर में पहचानी जाती है।
मध्य वायु कमान की छह दशक से अधिक की दास्तां
हवाई प्रदर्शन की चमक के पीछे एक लंबी और गौरवशाली सेवा-यात्रा भी है। मध्य वायु कमान और उसके अधीनस्थ संगठनों ने अपनी स्थापना के बाद से विस्तृत और परिचालन की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस कमान की परिचालन विरासत में 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध, मालदीव में ऑपरेशन कैक्टस तथा कारगिल संघर्ष के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर जैसे महत्वपूर्ण अभियान शामिल रहे हैं। इन अभियानों ने भारतीय वायुसेना की उस क्षमता को सामने रखा, जिसमें चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचना, तेजी से निर्णय लेना और मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करना शामिल है। काशी में होने वाला प्रदर्शन इसी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। आसमान में उड़ते विमान केवल तकनीक और ताकत का प्रदर्शन नहीं करेंगे, बल्कि उनके पीछे खड़े उन वायु योद्धाओं की कहानी भी कहेंगे, जिनके लिए कर्तव्य सर्वोपरि रहा है।
जब युद्ध नहीं, तब राहत का मिशन
वायुसेना की भूमिका युद्ध तक सीमित नहीं है। प्राकृतिक आपदा के समय जब सड़कें बंद हो जाती हैं, पुल टूट जाते हैं या दुर्गम इलाकों तक जमीन के रास्ते पहुंचना कठिन हो जाता है, तब आसमान राहत का रास्ता बनता है। मध्य वायु कमान ने भी समय-समय पर निकासी, बाढ़ राहत, आकस्मिक चिकित्सा निकासी और मानवीय सहायता अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कठिन भूभाग और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना, उन्हें सुरक्षित स्थानों तक निकालना और जरूरत के समय चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना इसकी सेवा-परंपरा का हिस्सा रहा है। यानी एक ही वायुशक्ति कभी सीमा पर दुश्मन के सामने देश की सुरक्षा की ढाल बनती है तो कभी आपदा में फंसे नागरिक के लिए आसमान से उतरती उम्मीद।
युवाओं के लिए आसमान से आएगा संदेश
नमो घाट पर होने वाला यह आयोजन युवाओं के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र होगा। भारतीय वायुसेना की विविध भूमिकाओं, तकनीकी क्षमताओं, प्रशिक्षण, अनुशासन और सेवा परंपरा को करीब से समझने का अवसर युवाओं को मिलेगा। आसमान में उड़ते विमान निश्चित रूप से रोमांच पैदा करेंगे, लेकिन उससे आगे यह प्रदर्शन युवाओं के सामने राष्ट्रसेवा, साहस, अनुशासन और पेशेवर उत्कृष्टता का एक जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत करेगा। भारतीय वायुसेना के हालिया सार्वजनिक एयर डिस्प्ले में भी युवाओं और विद्यार्थियों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली है। 19-20 सितंबर को मेरठ में सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम के प्रदर्शन को एक लाख से अधिक लोगों ने देखा, जिनमें बड़ी संख्या विद्यार्थियों, एनसीसी कैडेट और एनएसएस स्वयंसेवकों की थी।
काशी के आसमान से देश को दिखेगी वायुसेना की तस्वीर
काशी सदियों से आस्था और अध्यात्म की नगरी रही है। यहां हर दिन गंगा के घाटों पर देश-विदेश से आने वाले लाखों लोग भारतीय संस्कृति की जीवंत तस्वीर देखते हैं। अब इसी काशी के आसमान में आधुनिक भारत की सैन्य क्षमता की झलक भी दिखाई देगी। नमो घाट इस आयोजन के लिए इसलिए भी खास है कि यह आधुनिक स्वरूप में विकसित काशी के प्रमुख नदी तटीय स्थलों में शामिल है। गंगा के किनारे खुले आसमान में होने वाला प्रदर्शन घाटों पर मौजूद दर्शकों के लिए लंबे समय तक याद रहने वाला दृश्य बन सकता है।
सिर्फ प्रदर्शन नहीं, सेवा की पहचान
भारतीय वायुसेना के लिए हवाई प्रदर्शन अपनी क्षमताओं को प्रदर्शित करने के साथ-साथ जनता से जुड़ने का माध्यम भी है। विमानों की गति और करतब जितने आकर्षक होंगे, उनके पीछे छिपी तैयारी उतनी ही गंभीर होगी। एक सफल फॉर्मेशन के पीछे पायलटों का प्रशिक्षण, तकनीकी टीमों की तैयारी, ग्राउंड स्टाफ की सतर्कता और हर स्तर पर समयबद्ध समन्वय काम करता है। यही समन्वय युद्धकाल में अभियान की सफलता का आधार बनता है और आपदा के समय राहत मिशन की गति तय करता है। नमो घाट पर 25 अक्तूबर को होने वाला एरियल डिस्प्ले इसी व्यापक तस्वीर को काशी के सामने रखेगा—वायुसेना केवल आकाश की प्रहरी नहीं, बल्कि आवश्यकता की हर घड़ी में राष्ट्र के साथ खड़ी सेवा-शक्ति भी है।
दर्शकों की सुरक्षा सर्वोपरि
आयोजन के दौरान दर्शकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रशासन की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएंगी। निर्धारित दर्शक क्षेत्र, यातायात व्यवस्था, पार्किंग और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश आयोजन की तिथि के करीब अधिकृत माध्यमों से जारी किए जाएंगे। आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे सोशल मीडिया या अन्य अनधिकृत माध्यमों से प्रसारित सूचनाओं पर भरोसा न करें। कार्यक्रम से जुड़ी समय, दर्शक क्षेत्र, यातायात, पार्किंग और सुरक्षा संबंधी जानकारी केवल अधिकृत स्रोतों से ही प्राप्त करें। साथ ही जिला प्रशासन, पुलिस, सुरक्षा बलों और आयोजन से जुड़े अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें।
गंगा की लहरें और आसमान की उड़ान
25 अक्तूबर को जब नमो घाट पर गंगा अपनी गति से बह रही होगी और घाटों पर काशी का जीवन अपनी रफ्तार में होगा, उसी समय ऊपर आसमान में भारतीय वायुसेना की उड़ान एक अलग ही दृश्य रचेगी। नीचे सदियों की सभ्यता की साक्षी गंगा होगी और ऊपर आधुनिक भारत की वायुशक्ति। मध्य वायु कमान की छह दशक से अधिक लंबी सेवा-यात्रा, युद्धभूमि का साहस, कारगिल का शौर्य, मानवीय सहायता की संवेदना और आपदा के समय नागरिकों तक पहुंचती मदद—इन सबकी स्मृतियां इस आयोजन के साथ जुड़ेंगी। काशी के लिए यह केवल कुछ घंटों का हवाई प्रदर्शन नहीं होगा। यह उस भारत की तस्वीर होगी, जहां विरासत और आधुनिकता, आस्था और तकनीक तथा सेवा और शौर्य एक ही आकाश के नीचे साथ दिखाई देंगे।
सुरेश गांधी
वरिष्ठ पत्रकार
वाराणसी


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