राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में जहां पानी के स्रोत दूर-दूर होते हैं और गर्मी तथा सूखे की स्थिति जीवन को और कठिन बना देती है, वहां घर तक पानी पहुंचना किसी सुविधा से कम नहीं है। लंबे समय तक गांवों की महिलाओं को पीने के पानी के लिए दूर तक जाना पड़ता था। सिर पर पानी के बर्तन लेकर लौटना और दिन में जरूरत के मुताबिक कई बार अतिरिक्त पानी भरने जाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। ऐसे में घर के नल तक पानी पहुंचना ग्रामीण जीवन में आए उन बदलावों में से है, जिसने महिलाओं के श्रम को कम करने और परिवारों को राहत देने का काम किया है। जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल जल योजना ने देश के ग्रामीण परिवारों तक पानी पहुंचाने की दिशा में बड़ा काम किया है। अगस्त 2019 में जब जल जीवन मिशन शुरू हुआ था, तब देश के ग्रामीण इलाकों में करीब 3.23 करोड़ परिवारों, यानी 16.7 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के घरों में ही नल से पानी पहुंचता था। 18 जुलाई 2026 तक यह आंकड़ा करीब 15.89 करोड़ परिवार यानी 82.09 प्रतिशत तक पहुंच गया। जल जीवन मिशन का उद्देश्य केवल नल का कनेक्शन देना नहीं है, बल्कि पर्याप्त मात्रा में निर्धारित गुणवत्ता का पानी नियमित रूप से उपलब्ध कराना भी है। मिशन के तहत 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पानी उपलब्ध कराने का सेवा स्तर निर्धारित किया गया है।
राजस्थान जैसे राज्य में इस योजना की जरूरत और महत्व को वहां के ग्रामीण जीवन से समझा जा सकता है। जल जीवन मिशन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में 1,07,84,072 ग्रामीण परिवार दर्ज हैं और इनमें 24,95,213 परिवारों को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है। राज्य में इसकी प्रगति 43.3 प्रतिशत दर्ज की गई है। आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान में अभी बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों तक नल से पानी पहुंचाने का काम बाकी है। इसलिए जिन परिवारों तक यह सुविधा पहुंची है, उनके जीवन में इसके असर को समझना और जिन परिवारों तक यह अभी नहीं पहुंची है, उनकी परेशानी को देखना दोनों जरूरी हैं। घर में नल से पानी आने का एक बड़ा असर किशोरियों के जीवन में भी दिखाई देता है। जिन परिवारों में पानी भरने की जिम्मेदारी लड़कियों को भी निभानी पड़ती थी, इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती थी, अब घर में नल आने के बाद पानी भरने में खर्च होने वाला समय बचने लगा है और वह ऐसे समयों का इस्तेमाल पढ़ाई करने या कोई नया कौशल सीखने में लगा रही हैं। राजस्थान के ग्रामीण परिवारों में जहां पशुपालन भी आय का महत्वपूर्ण साधन है, वहां घर तक पानी पहुंचने का मतलब पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था आसान होना भी है।
लेकिन नल का घर तक पहुंच जाना इस बदलाव की पूरी कहानी नहीं है। सवाल यह भी है कि उस नल से आने वाला पानी साफ है या नहीं? देशभर में जल जीवन मिशन की स्वतंत्र कार्यक्षमता जांच में यह बात सामने आई कि नल कनेक्शन होने के बावजूद सभी परिवारों को तय मानकों के अनुसार पानी नहीं मिल रहा था। 2024 के स्वतंत्र आकलन सर्वे में शामिल परिवारों में 98.1 प्रतिशत के घर नल कनेक्शन मिले, लेकिन मात्रा, गुणवत्ता और नियमितता के तीनों मानकों को मिलाकर 76 प्रतिशत घरेलू नल कनेक्शन ही सही पाए गए। इसका मतलब है कि केवल नल से पानी पहुंचाना ही महत्वपूर्ण उपलब्धि नहीं है, बल्कि साफ और नियमित पानी पहुंचाना भी बड़ी ज़िम्मेदारी है। जल जीवन मिशन में पानी की गुणवत्ता को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है और इसके लिए भारतीय मानकों के अनुसार इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने का प्रावधान है। सरकार ने गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक सुरक्षित स्रोत और सामुदायिक जल शुद्धिकरण संयंत्र जैसे उपायों का भी प्रावधान किया है। राजस्थान में पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच की क्षमता बढ़ाना भी जरूरी है। राज्य के 2022 के कार्यक्षमता आकलन में केवल 24 प्रतिशत सर्वेक्षित गांवों ने बताया था कि उनके पास पानी की जांच के लिए फील्ड टेस्ट किट उपलब्ध थी और केवल 25 प्रतिशत गांवों में ही संबंधित लोगों को इन किटों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण मिला था।
इसलिए अब जरूरत नल कनेक्शन की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करने की है कि हर नल से आने वाला पानी साफ और सुरक्षित हो। इसके लिए केवल पारंपरिक निरीक्षण या कभी-कभार पानी की जांच पर निर्भर रहने के बजाय गांवों में पानी की गुणवत्ता का रिकॉर्ड तैयार किया जाए। यदि किसी गांव में पानी लगातार गुणवत्ता के तय मानकों से बाहर पाया जाए, तो उस गांव को सुधार की प्राथमिक सूची में डालने और समस्या ठीक होने तक वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। जल जीवन मिशन ने गांवों में पानी पहुंचाने की दिशा में बड़ा बदलाव किया है। घर में लगा नल महिलाओं की मेहनत को कम कर रहा है, किशोरियों का समय बचा रहा है और परिवारों तथा उनके पशुओं के लिए पानी की उपलब्धता आसान बना रहा है। लेकिन इस बदलाव की असली सफलता तभी होगी जब परिवारों तक नल से केवल पानी नहीं, बल्कि साफ और सुरक्षित पानी पहुंचे। किसी परिवार के लिए यह पर्याप्त नहीं है कि उसके घर नल लगा हुआ है, उसके लिए असली राहत तब होगी जब वह बिना किसी चिंता के उसी नल का पानी पी सके। इसलिए अब जल जीवन मिशन की अगली प्राथमिकता ‘हर घर नल’ से आगे बढ़कर ‘हर नल से साफ जल’ होनी चाहिए। तभी ग्रामीण जीवन में बदलाव का असली उद्देश्य पूरा होगा।
तानिया
लूणकरणसर, राजस्थान
टीम, गाँव की आवाज़
(यह लेखिका के निजी विचार हैं)


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