पटना । भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारिक यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क को वापस लेने की मांग करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि इससे छोटे दुकानदारों, एमएसएमई क्षेत्र और आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। भट्टाचार्य ने एक बयान में इस शुल्क को ‘‘यूपीआई कर’’ करार दिया और कहा कि नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए लोगों को यूपीआई की व्यवस्था अपनाने के लिए मजबूर किया गया और अब इसके उपयोग पर शुल्क लगाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिस डिजिटल भुगतान व्यवस्था को देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया, उस पर अब शुल्क लगाने से छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ेगी। उन्होंने आशंका जताई कि व्यापारी इस अतिरिक्त लागत का बोझ वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के माध्यम से ग्राहकों पर डाल सकते हैं। भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में नोटबंदी, जीएसटी और लॉकडाउन के बाद अब यूपीआई शुल्क आम लोगों और छोटे कारोबारियों के लिए एक और आर्थिक झटका है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के दौरान सरकार ने काले धन पर रोक लगाने और अर्थव्यवस्था को अधिक डिजिटल बनाने का तर्क दिया था। उनके मुताबिक, इसके बाद यूपीआई देश में भुगतान का प्रमुख माध्यम बन गया और अब उसी व्यवस्था पर शुल्क लगाया जा रहा है।
गुरुवार, 17 सितंबर 2026
पटना : ‘यूपीआई कर’ आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ, वापस लिया जाए दीपांकर
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