चतरथ ने कहा, ‘‘हमारे घोषणापत्र में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा छात्रावास का है।’’ उन्होंने इस मुद्दे को दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में हाल में इमारत गिरने की घटना से जोड़ा, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई थी। चतरथ ने कहा कि इस हादसे में उनका एक करीबी सहयोगी भी घायल हुआ था और उसका अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के ट्रॉमा सेंटर में इलाज किया गया। उन्होंने कहा, ‘‘अगर उन विद्यार्थियों को छात्रावास की सुविधा मिली होती तो शायद इतने लोगों की जान नहीं जाती।’’ चतरथ ने मेट्रो किराये में रियायत का मुद्दा भी उठाया और आरोप लगाया कि अभाविप ने अपने पिछले घोषणापत्र में किया गया वादा पूरा नहीं किया। उन्होंने कहा कि एनएसयूआई छात्रावास की सुविधाओं के विस्तार और विद्यार्थियों से जुड़ी अन्य मांगों पर काम करेगी। चतरथ ने एनएसयूआई के अच्छा प्रदर्शन का भरोसा जताते हुए कहा, ‘‘मुझे पता है कि इस बार एनएसयूआई सभी पदों पर जीत हासिल करेगी।’’ ‘कैंपस लॉ सेंटर-II’ में विद्यार्थियों ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के इस्तेमाल और ‘इनमें से कोई नहीं’ (नोटा) विकल्प को लेकर भी सवाल उठाए। गोपाला नामक एक विद्यार्थी ने कहा कि केंद्र की वेबसाइट पर ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर कोई आधिकारिक सूचना नहीं है और उसने सवाल उठाया कि एक ईवीएम पर दो पदों के लिए नोटा का एक ही विकल्प कैसे हो सकता है। उसने कहा कि उसने निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष यह मुद्दा उठाया था और उसे लिखित शिकायत देने को कहा गया। गोपाला ने विद्यार्थियों से मतदान करने की अपील करते हुए कहा, ‘‘अगर आप घर पर रहेंगे तो वे लोग जीत जाएंगे जो काबिल नहीं हैं।’’
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव के लिए शुक्रवार को मतदान जारी रहने के बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के नेताओं ने छात्रावास की सुविधाओं, मेट्रो किराये में रियायत, छात्र कल्याण और परिसर में चुनाव जैसे मुद्दे उठाए। अभाविप के उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार इशू मौर्य ने कहा कि संगठन विद्यार्थियों की समस्याओं से अवगत है और उन्होंने चुनाव में अभाविप के अच्छे प्रदर्शन को लेकर भरोसा जताया। मौर्य ने कहा, ‘‘मुझे पूरा भरोसा है क्योंकि हमने विद्यार्थियों के बीच रहकर उनके कल्याण के लिए काम किया है।’’ उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस)-भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थित छात्र संगठन शुरुआत से ही विद्यार्थियों के साथ मिलकर काम करता रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ‘जेन-जी’ को अब ‘‘गुमराह’’ नहीं किया जा सकता और उन्होंने भरोसा जताया कि अभाविप डूसू के चारों पदों पर जीत हासिल करेगी। इस बीच, एनएसयूआई के उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार वीर चतरथ ने कहा कि संगठन का चुनाव प्रचार विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहा है। उन्होंने कहा कि एनएसयूआई ने चुनाव से पहले एक अभियान के जरिये विद्यार्थियों से उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली और उनके जवाबों के आधार पर अपना घोषणापत्र तैयार किया।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें