- विद्यार्थियों ने सीखे आपदा से बचाव के व्यावहारिक गुर
विभिन्न कक्षाओं के लिए पहले से निर्धारित निकासी मार्गों का उपयोग करते हुए विद्यार्थी महामाया भवन एवं प्रशासनिक भवन के बीच स्थित निर्धारित सुरक्षित मैदान में पहुँचे। वहाँ सभी विद्यार्थी अपनी-अपनी कक्षाओं के अनुसार अनुशासित पंक्तियों में एकत्रित हुए। कक्षा शिक्षकों ने विद्यार्थियों की उपस्थिति की जाँच करते हुए संख्या मिलान किया, जबकि विषय शिक्षकों ने कक्षाओं से विद्यार्थियों की सुरक्षित निकासी में सहयोग किया। उस समय कक्षाओं से मुक्त शिक्षकों ने गलियारों, सीढ़ियों एवं निकास द्वारों पर तैनात रहकर विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं व्यवस्थित रूप से बाहर निकलने में सहायता प्रदान की। शारीरिक शिक्षा शिक्षकों एवं खोज दल द्वारा शौचालयों तथा निर्धारित क्षेत्रों का अंतिम निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया गया कि कोई भी विद्यार्थी अथवा कर्मचारी भवन के भीतर न रह गया हो। मॉक ड्रिल की संपूर्ण गतिविधियों का सुश्री अनुष्का एवं श्री शमशेर द्वारा फोटो एवं वीडियो के माध्यम से दस्तावेजीकरण भी किया गया। अभ्यास के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साह, अनुशासन, संयम एवं जिम्मेदारी का परिचय दिया। विद्यार्थियों ने बताया कि इस मॉक ड्रिल से उन्हें आपातकालीन परिस्थिति में घबराने के बजाय शांत रहने, निर्देशों का पालन करने, निर्धारित निकासी मार्ग का उपयोग करने तथा अपनी कक्षा के साथ सुरक्षित स्थान पर पहुँचने की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई। विद्यालय प्रशासन के अनुसार इस प्रकार के अभ्यास का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि वास्तविक आपातकालीन परिस्थितियों का सामना करने के लिए उनमें व्यावहारिक समझ, आत्मविश्वास एवं त्वरित निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना है।
मॉक ड्रिल के दौरान विद्यालय की आपातकालीन संचार व्यवस्था, निकासी मार्गों, कर्मचारियों के आपसी समन्वय तथा सभा स्थल की व्यवस्था का भी आकलन किया गया। समीक्षा के दौरान कुछ महत्वपूर्ण सुधारात्मक बिंदुओं की पहचान की गई। विशेष सहायता की आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए पूर्व-निर्धारित सहायता व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने तथा आपातकालीन स्थिति में प्रत्येक कक्षा के विद्यार्थियों की संख्या मिलान के समय संबंधित कक्षा शिक्षक की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने की आवश्यकता महसूस की गई। विद्यालय प्रशासन ने इन बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए विशेष सहायता की आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए स्पष्ट एवं पूर्व-निर्धारित सहायता योजना तैयार करने, प्रत्येक कक्षा के लिए वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था रखने, उपस्थिति सूची के आधार पर सटीक संख्या मिलान सुनिश्चित करने तथा नियमित अंतराल पर आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल एवं अभ्यास के बाद समीक्षा बैठक आयोजित करने पर बल दिया। विद्यालय प्रशासन ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों को आपदा के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उनमें अनुशासन, समन्वय, सतर्कता, त्वरित निर्णय क्षमता एवं सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करती हैं। जीडी गोयनका स्कूल, पूर्णिया में आयोजित यह भूकंप मॉक ड्रिल विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों को किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में सजग, संयमित एवं सुरक्षित ढंग से प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं उपयोगी पहल साबित हुई।

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