समापन अवसर पर फादर विजय भास्कर ने 2033 में प्रस्तावित जयंती महोत्सव के संदर्भ में महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। कैथोलिक चर्च के लिए 2033 का वर्ष विशेष महत्व रखता है, क्योंकि ईसाई परंपरा के अनुसार यह यीशु मसीह की मृत्यु, पुनरुत्थान और स्वर्गारोहण की घटनाओं की लगभग दो हजारवीं वर्षगांठ के स्मरण का अवसर होगा। इसे मुक्ति के पवित्र वर्ष के रूप में मनाने की दिशा में तैयारी की जा रही है। यहां एक महत्वपूर्ण बात समझने की जरूरत है। जयंती महोत्सव का अर्थ केवल किसी ऐतिहासिक घटना का उत्सव मनाना नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य विश्वास की जड़ों की ओर लौटना, ईसाइयों के बीच एकता की भावना मजबूत करना और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को नए सिरे से समझना है। वर्ष 2025 को कैथोलिक चर्च ने आशा की जयंती (Jubilee of Hope) के रूप में मनाया। उसके बाद 2033 की ओर बढ़ता समय चर्च के लिए आत्ममंथन और मिशन की तैयारी का अवसर बन रहा है। प्रश्न यह नहीं है कि कोई बड़ा धार्मिक आयोजन कितना भव्य होगा, बल्कि यह है कि उससे लोगों के जीवन में विश्वास, आशा, करुणा और सेवा की कितनी गहराई पैदा होगी।
फेथ फॉर्मेशन की वास्तविक सफलता भी यहीं परखी जाएगी। बपतिस्मा के माध्यम से प्राप्त विश्वास को केवल व्यक्तिगत पहचान तक सीमित रखने के बजाय उसे मिशनरी शिष्यत्व में बदलना जरूरी है। इसका अर्थ है—अपने आचरण, सेवा और मानवीय संबंधों के माध्यम से मसीह के संदेश को जीवन में उतारना। 2033 की तैयारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यह ईसाई समुदाय को अपने भीतर झांकने का अवसर देती है। क्या विश्वास समाज के कमजोर व्यक्ति के साथ खड़ा हो रहा है? क्या युवा पीढ़ी को केवल धार्मिक शिक्षा मिल रही है या सेवा और जिम्मेदारी का संस्कार भी? क्या अलग-अलग ईसाई समुदायों के बीच एकता के लिए वास्तविक प्रयास हो रहे हैं? ऐसे प्रश्न किसी भी फेथ फॉर्मेशन को सार्थक बनाते हैं। नवज्योति निकेतन में आयोजित सेमिनार से यही संदेश उभरता है कि विश्वास केवल चर्च की चारदीवारी में रहने वाली अवधारणा नहीं है। विश्वास तब जीवंत होता है, जब वह व्यक्ति के व्यवहार, परिवार के संबंधों, समाज की सेवा और जरूरतमंदों के प्रति संवेदना में दिखाई देता है। 2033 का जयंती वर्ष कितना बड़ा होगा, यह केवल आयोजन की संख्या या भव्यता से तय नहीं होगा। उसकी वास्तविक व्यापकता इस बात से तय होगी कि कितने लोग अपने विश्वास को सेवा, प्रेम, क्षमा, एकता और मानव कल्याण के कार्यों में बदल पाते हैं। यही फेथ फॉर्मेशन की सार्थक दिशा है और यही आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती भी।

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