कविता : नदियाँ गुनगुना रही हैं - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 20 सितंबर 2026

कविता : नदियाँ गुनगुना रही हैं

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नदियों का बहता पानी गुनगुना रहा अपनी कहानी,

हिमालय की गोद से निकली, सागर तक पहुँची रवानी,

रास्तों की कठिनाइयों को पार करती हुई,

चट्टानों की चोटें सहती हुई,

कभी बिखरती, फिर खुद को जोड़ती जाती,

मंज़िल की तलाश में निरंतर बहती जाती,

हर मोड़ पर जीवन का एक नया अर्थ बताती,

हर कठिनाई के बाद आगे बढ़ना सिखाती,

नदियों का यह बहता पानी,

सुना रहा जिंदगी की कहानी,

सफर चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो,

बहते रहना ही जीवन की है निशानी।।




नीमा गड़िया

कक्षा – 12वीं

गाँव – पोथिंग, उत्तराखंड

गांव की आवाज 

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