हिमालय की गोद से निकली, सागर तक पहुँची रवानी,
रास्तों की कठिनाइयों को पार करती हुई,
चट्टानों की चोटें सहती हुई,
कभी बिखरती, फिर खुद को जोड़ती जाती,
मंज़िल की तलाश में निरंतर बहती जाती,
हर मोड़ पर जीवन का एक नया अर्थ बताती,
हर कठिनाई के बाद आगे बढ़ना सिखाती,
नदियों का यह बहता पानी,
सुना रहा जिंदगी की कहानी,
सफर चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो,
बहते रहना ही जीवन की है निशानी।।
नीमा गड़िया
कक्षा – 12वीं
गाँव – पोथिंग, उत्तराखंड
गांव की आवाज

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