- बदलाव की नई तस्वीर: 26 मॉडल स्कूलों से सँवरता शिक्षा का भविष्य तथा लिख रही बदलाव की नई कहानी
- जिलाधिकारी ने की अधिकारियों की तैनाती, सरकारी मानक के अनुरूप सभी व्यवस्था दुरुस्त करने तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बहाल कर प्रभावी मॉनिटरिंग का सख्त निर्देश
बच्चों के सपनों को मिल रहे नए पंख
इन मॉडल स्कूलों में दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं के चेहरे पर काफी खुशी और आत्मविश्वास इस बदलाव की सबसे बड़ी गवाही है। पहले जहां सरकारी स्कूलों में संसाधनों की कमी के कारण पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित रह जाती थी, वहीं आज इन मॉडल स्कूलों के बच्चे स्मार्ट बोर्ड पर एनिमेटेड पाठ्य-सामग्री देखकर कठिन से कठिन विषयों को आसानी से समझ रहे हैं। विशेष रूप से, बेटियों के जीवन में इस पहल ने अभूतपूर्व क्रांति ला दी है। सुरक्षित वातावरण, चहारदीवारी और अत्याधुनिक शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के होने से बालिकाओं की ड्रॉप-आउट दर में भारी गिरावट आई है। अब लड़कियां न केवल नियमित रूप से स्कूल आ रही हैं, बल्कि कंप्यूटर लैब में कोडिंग, डिजिटल साक्षरता और विज्ञान के प्रयोगों में लड़कों से कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। खेलकूद के मैदान और सांस्कृतिक गतिविधियों ने बच्चों के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त किया है।
अभिभावकों का टूटता भ्रम और बढ़ता विश्वास
किसी भी शैक्षणिक बदलाव की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि अभिभावक उस पर कितना विश्वास करते हैं। मधुबनी के इन 26 मॉडल स्कूलों ने अभिभावकों की सोच को पूरी तरह से बदल दिया है।अक्सर गरीब और मध्यमवर्गीय अभिभावक अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा निजी स्कूलों की फीस में बहा देते थे, या फिर संसाधनों के अभाव में बच्चों की पढ़ाई छुड़वा देने को मजबूर होते थे। आज वही माता-पिता गर्व से अपने बच्चों को इन मॉडल स्कूलों में भेज रहे हैं। अभिभावक-शिक्षक बैठकों (PTM) में जब जिलाधिकारी खुद या प्रशासनिक अधिकारी जाकर परिजनों से संवाद कर रहे हैं, तो अभिभावकों में यह विश्वास गहरा होता है कि उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए ये मॉडल स्कूल किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहे हैं, क्योंकि अब बिना किसी वित्तीय बोझ के उनके बच्चों को उच्च कोटि की शैक्षणिक सुविधाएं मिल रही हैं।
समाज में आ रहा सकारात्मक बदलाव
स्कूल केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं होता, बल्कि पूरे समाज की दिशा तय करता हैं। मधुबनी में 26 मॉडल स्कूलों के संचालन से सामाजिक स्तर पर एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है। पूर्व में बच्चे परंपरागत शिक्षा पद्धति का सहारा लेते थे किंतु अब ऑनलाइन डिजिटल क्लास तथा डिजिटल लाइब्रेरी के माध्यम से बेहतर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं जो बदलाव की वास्तविक तस्वीर पेश कर रहा है। डिजिटल और आधुनिक सोच: ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे जब डिजिटल रूप से साक्षर हो रहे हैं, तो वे अपने परिवारों को भी सरकारी योजनाओं, डिजिटल बैंकिंग और आधुनिक जानकारियों से जोड़ रहे हैं।
मधुबनी का एक साथ 26 मॉडल स्कूल इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जन-भागीदारी एक साथ मिल जाए, तो सरकारी व्यवस्था भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर सकती है। सरकार की इस दूरगामी सोच ने मधुबनी के भविष्य की जो नींव रखी है, उसकी गूंज आने वाले दशकों तक सुनाई देगी। ये 26 मॉडल स्कूल आज केवल इमारतें नहीं, बल्कि मधुबनी के उज्ज्वल, सशक्त और आत्मनिर्भर कल की जगमगाती मशाल हैं। जिलाधिकारी श्री आनंद शर्मा द्वारा विद्यालय के कुशल प्रबंधन तथा सुचारू संचालन के निमित्त बच्चों के हित में हर विद्यालय के लिए एक-एक पदाधिकारी की तैनाती की गई है जिनका दायित्व हर शनिवार को अपने संबद्ध विद्यालय का निरीक्षण कर समीक्षा करना तथा उसमें सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुदृढ़ करते हुए नियमित रूप से सुचारू संचालन करना है। जिलाधिकारी द्वारा प्रदत्त निर्देश के आलोक में अभियान के रूप में आज सभी 26 मॉडल स्कूल का निरीक्षण एवं अनुश्रवण संबंधित पदाधिकारी के द्वारा किया गया। विद्यालयों में आज पैरंट टीचर मीटिंग भी संपन्न हुई। विद्यालय की बेहतरी के लिए दोनों के बीच बेहतर समन्वय एवं संवाद कायम हुआ।

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