सीहोर : 26 सितंबर से होगा पितृपक्ष का शुभारंभ : पंडित सुनील शर्मा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 16 सितंबर 2026

सीहोर : 26 सितंबर से होगा पितृपक्ष का शुभारंभ : पंडित सुनील शर्मा

  • गौ सेवा, ब्राह्मण भोजन, पितृ भागवत और पौधारोपण का पितृपक्ष में विशेष महत्व, इस बार 15 दिवस का रहेगा पितृपक्ष

Pitrapakah-sehore
सीहोर । ऋषि-मुनियों द्वारा रचित धार्मिक ग्रंथों के अनुसार प्रत्येक मनुष्य अपने पूर्व जन्म के प्रारब्ध कर्मों के अनुसार इस पृथ्वीलोक मृत्युलोक में जन्म लेता है। जीवन भर भौतिक संसार के सांसारिक बंधनों में बंधे रहने के साथ-साथ, शास्त्रों में मनुष्य पर तीन मुख्य ऋण देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण बताए गए हैं। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार, इन तीनों ऋणों से मुक्ति और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर पितृपक्ष श्राद्ध पक्ष इस वर्ष 26 सितंबर 2026 शनिवार से प्रारंभ हो रहा है। यह भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की कृष्ण पक्ष पितृमोक्ष अमावस्या 10 अक्टूबर 2026, शनिवार तक रहेगा l इस बार अष्टमी व नवमी तिथि सम्मिलित होने के कारण पितृपक्ष श्राद्ध पक्ष 15 दिवस का रहेगा l हम अपने पूर्वजों की तिथि अनुसार उनका पितृपक्ष में श्राद्ध तर्पण करते हैं और जिन पितरों की हमें तिथि ज्ञात नहीं होती है उनका हम श्राद्ध तर्पण पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन करते हैं l पितृपक्ष का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व-सनातन संस्कृति में पितृपक्ष केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि सूक्ष्म जगत से जुड़ने और अपने  पूर्वजों के प्रति आदर प्रकट करने का एक दिव्य माध्यम है। तर्पण और श्राद्ध कर्म के माध्यम से मनुष्य अपने देव, ऋषि और पितृ ऋणों से मुक्त होकर अक्षय पुण्य की प्राप्ति करता है। गरुण पुराण के अनुसार पितृपक्ष के दौरान हमारे पूर्वज सूक्ष्म रूप में पृथ्वी लोक पर निवास करते हैं और वंशजों द्वारा अर्पित जल, अन्न और श्रद्धा ग्रहण कर उन्हें सुख, शांति व समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।


पितृ पक्ष में गौ सेवा, ब्राह्मण भोजन पौधारोपण का विशेष महत्व पंडित सुनील शर्मा के अनुसार, पितृपक्ष की इस अवधि में श्रद्धालु l मां नर्मदा, पार्वती तट, सिवन घाट सहित जिले में  प्रवाहमान नदियों पर व अपने घर पर व्यवस्था अनुसार पितरों को जो, तिल, कुशा के माध्यम से जल अर्पित कर तर्पण करते हैं और उनके निमित्त ब्राह्मण भोजन, अन्नदान, वस्त्रदान, गौसेवा और  जरूरतमंद लोगों की सहायता करना करना चाहिए l पूर्वजों की आत्मा की शांति और सद्गति के लिए श्रीमद्भागवत कथा पितृ भागवत व पितृ सूक्त का पाठ करवाना चाहिए। पितरों की स्मृति में  पीपल, बरगद व फलदार पौधों का रोपण करना चाहिए। वर्ष 2026 में पितृ पक्ष श्राद्ध पक्ष 26 सितंबर 2026  भाद्रपद मास पूर्णिमा तिथि शनिवार 26 सितंबर 2026  से शुरू होकर आश्विन मास सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या शनिवार 10 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस 15 दिवसीय पितृपक्ष श्राद्ध पक्ष  की तिथिवार और दिनांनुसार  इस प्रकार है दिनांक दिन श्राद्ध की तिथि 26 सितंबर 2026 शनिवार पूर्णिमा श्राद्ध 27 सितंबर 2026 रविवार प्रतिपदा श्राद्ध 28 सितंबर 2026 सोमवार द्वितीया श्राद्ध 29 सितंबर 2026 मंगलवार तृतीया श्राद्ध 30 सितंबर 2026 बुधवार चतुर्थी श्राद्ध 01 अक्टूबर 2026 गुरुवार पंचमी श्राद्ध , महाभरणी 02 अक्टूबर 2026 शुक्रवार षष्ठी श्राद्ध 03 अक्टूबर 2026 शनिवार सप्तमी श्राद्ध 04 अक्टूबर 2026 रविवार अष्टमी श्राद्ध एवं नवमी श्राद्ध मातृ नवमी 05 अक्टूबर 2026 सोमवार दशमी श्राद्ध 06 अक्टूबर 2026 मंगलवार एकादशी श्राद्ध 07 अक्टूबर 2026 बुधवार द्वादशी श्राद्ध  संन्यासी श्राद्ध 08 अक्टूबर 2026 गुरुवार त्रयोदशी श्राद्ध 09 अक्टूबर 2026 शुक्रवार चतुर्दशी श्राद्ध 10 अक्टूबर 2026 शनिवार सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या l

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