- रत्न जड़ित पोशाक में सजे राधा-कृष्ण, 56 भोग लगाया; राधा नाम संकीर्तन में झूमे श्रद्धालु
- पंडित प्रदीप मिश्रा बोले- राधा की आराधना के बिना श्रीकृष्ण की भक्ति अधूरी मानी जाती है
चांदी के कलशों से हुआ राधा-कृष्ण का महाभिषेक
राधाष्टमी के मुख्य आयोजन के तहत सुबह विठलेश सेवा समिति के पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला, कथावाचक पंडित राघव मिश्रा सहित अन्य श्रद्धालुओं और सेवकों की मौजूदगी में राधा-कृष्ण का विधि-विधान से पूजन किया गया। इसके बाद चांदी के कलशों से भगवान का महाभिषेक किया गया। महाभिषेक के दौरान मंदिर परिसर में मंत्रोच्चार और भजन-कीर्तन चलता रहा। महाभिषेक के बाद राधारानी और भगवान श्रीकृष्ण का विशेष श्रृंगार किया गया। रत्न जड़ित पोशाक और आभूषणों से सजे भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। मंदिर में 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया। इसके बाद प्रसादी का वितरण श्रद्धालुओं के बीच किया गया।
राधा की आराधना के बिना श्रीकृष्ण की भक्ति अधूरी-पंडित प्रदीप मिश्रा
राधाष्टमी के अवसर पर पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार राधा रानी की आराधना के बिना भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति अधूरी मानी जाती है। जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में जन्माष्टमी का विशेष महत्व है, उसी प्रकार राधारानी के प्राकट्य उत्सव के रूप में राधाष्टमी भी भक्तों के लिए विशेष पर्व है। उन्होंने कहा कि राधा नाम केवल एक नाम नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और भक्ति की भावना का प्रतीक माना जाता है। भक्त भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधारानी का स्मरण करते हुए अपनी आराधना को पूर्णता प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में राधा-कृष्ण की भक्ति के माध्यम से प्रेम, विश्वास और समर्पण का संदेश मिलता है। पंडित मिश्रा ने कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार राधाष्टमी से महालक्ष्मी व्रत का भी आरंभ माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत और पूजन करते हैं। महिलाओं द्वारा परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की मंगलकामना और अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर राधारानी की आराधना की जाती है।
महादेव सनातन जीवन-दर्शन का आधार
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि महादेव सनातन जीवन-दर्शन के आधार माने जाते हैं। भगवान शिव की आराधना मनुष्य को त्याग, तपस्या, संयम, करुणा और लोककल्याण की भावना से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के प्रति आस्था केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे व्यक्ति के व्यवहार और जीवनशैली में भी दिखाई देना चाहिए। भगवान शिव के नाम का स्मरण करने और अपने जीवन में सेवा, संयम तथा सद्भाव को स्थान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया धार्मिक आचरण व्यक्ति को सकारात्मक दिशा देने का माध्यम बनता है।
राधा नाम संकीर्तन में झूमे श्रद्धालु
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि राधाष्टमी के अवसर पर मंदिर परिसर में सुबह से ही भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा। राधा-कृष्ण के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। दोपहर 11 बजे भगवान को 56 भोग अर्पित किया गया, जबकि दोपहर 12 बजे महाआरती का आयोजन हुआ। इसके बाद राधा नाम संकीर्तन में श्रद्धालु शामिल हुए। मथुरा-वृंदावन से आए कलाकारों ने राधा-कृष्ण की भक्ति पर आधारित भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों के दौरान श्रद्धालु हाथों में माला और पुष्प लेकर राधारानी का स्मरण करते नजर आए। कई श्रद्धालु भजनों पर झूमते हुए दिखाई दिए। मंदिर परिसर में पूरे दिन धार्मिक और भक्तिमय वातावरण बना रहा। विठलेश सेवा समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी की व्यवस्था भी की गई। आयोजन से जुड़े सेवकों ने श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया। मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सेवक व्यवस्थाओं में जुटे रहे। मुरली मनोहर मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था है। मंदिर परिसर में भगवान शिव-पार्वती, भगवान राम-सीता और भगवान कृष्ण-राधा की प्रतिमाएं विराजमान हैं। श्रद्धालु यहां तीनों स्वरूपों के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं। राधाष्टमी के अवसर पर राधा-कृष्ण के विशेष श्रृंगार और पूजन के कारण मंदिर में अलग ही धार्मिक वातावरण देखने को मिला। सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना जारी रहा। परिवार के साथ पहुंचे श्रद्धालुओं ने राधा-कृष्ण के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। कई श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में बैठकर भजन-कीर्तन में भी सहभागिता की।रविवार को कुबेर भंडारी गणेश उत्सव समिति करेगी महाआरती
राधाष्टमी के बाद रविवार को भी कुबेरेश्वरधाम में धार्मिक आयोजन जारी रहेंगे। कुबेर भंडारी गणेश उत्सव समिति की ओर से शाम 7 बजे महाआरती का आयोजन किया जाएगा। आयोजन में पंडित विनय मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। समिति की ओर से श्रद्धालुओं से महाआरती में शामिल होकर भगवान के दर्शन और पूजन का लाभ लेने का आग्रह किया गया है।


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