- बिहार में दवाओं और चिकित्सा सामग्रियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रखंड, जिला और राज्य स्तर पर बनेगी इंडेंट रिव्यू कमेटी
- अब प्रखंड, जिला और राज्य स्तर पर दवाओं और चिकित्सकीय सामग्रियों की मांग (Indent) का होगा वास्तविक और पारदर्शी आकलन
आदेश के अनुसार, स्वास्थ्य संस्थानों के लिए दवाओं की मांग सरकार द्वारा स्वीकृत Essential Drug List (EDL) के अनुसार तैयार की जाएगी। कमेटी वास्तविक खपत, वर्तमान स्टॉक, एक्सपायरी के करीब पहुंच चुकी दवाओं, सप्लाई में मौजूद दवाओं और खरीद प्रक्रिया में लंबित मात्रा की समीक्षा करेगी। मरीजों की संख्या, मौसमी बदलाव, स्थानीय बीमारी के पैटर्न तथा नई स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की जरूरतों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। प्रखंड स्तर पर गठित कमेटी हर महीने 1 से 10 तारीख के बीच दवाओं की मांग का सत्यापन करेगी। इस कमेटी की अध्यक्षता संबंधित चिकित्सा पदाधिकारी प्रभारी करेंगे। प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक सदस्य सचिव होंगे, जबकि प्रखंड अनुश्रवण एवं मूल्यांकन सहायक तथा फार्मासिस्ट सदस्य होंगे। सत्यापन के बाद दवाओं की मांग डीवीडीएमएस पोर्टल पर दर्ज की जाएगी और चिकित्सा पदाधिकारी प्रभारी द्वारा उसे अनुमोदित किया जाएगा। जिला स्तर पर कमेटी की अध्यक्षता सिविल सर्जन करेंगे। जिला कार्यक्रम प्रबंधक सदस्य सचिव होंगे तथा जिला स्टोर के चिकित्सा पदाधिकारी प्रभारी, जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी और फार्मासिस्ट इसके सदस्य होंगे। जिला स्तरीय कमेटी की बैठक प्रत्येक महीने 11 से 15 तारीख के बीच होगी। यदि पिछली तिमाही की औसत खपत की तुलना में किसी दवा की मांग में करीब 20 से 25 प्रतिशत या उससे अधिक असामान्य वृद्धि पाई जाती है, तो कमेटी उसके कारणों की समीक्षा करेगी।
राज्य स्तर पर भी इंडेंट रिव्यू कमेटी गठित की गई है, जिसमें राज्य स्वास्थ्य समिति और बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड (BMSICL) के प्रबंध निदेशक समेत वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। राज्य स्तरीय कमेटी प्रत्येक मांग की अलग-अलग नियमित जांच के बजाय नमूना आधार पर प्रखंड और जिला स्तर पर की गई समीक्षा की गुणवत्ता, एकरूपता, शुद्धता और जवाबदेही का आकलन करेगी। इसकी बैठक प्रत्येक महीने 15 से 20 तारीख के बीच आयोजित की जाएगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि दवाओं की मांग की समीक्षा केवल कागजी प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए। संबंधित कमेटियों को वास्तविक आंकड़ों, उपलब्ध स्टॉक और जमीनी जरूरतों के आधार पर ही मांग तय करनी होगी। अस्पतालों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने के लिए अंतिम सत्यापित मांग तय करते समय 90 दिनों के बफर स्टॉक का भी ध्यान रखा जाएगा। प्रखंड और जिला स्तरीय कमेटियों को गलत, जरूरत से अधिक, अधूरी या बिना उचित कारण के भेजी गई मांग के लिए सामूहिक रूप से जवाबदेह बनाया गया है। सभी स्तरों पर सत्यापित इंडेंट के साथ आवश्यक प्रमाणन भी देना होगा, ताकि दवाओं और चिकित्सा सामग्रियों की खरीद वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप हो सके।

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