सीहोर : आज मनाया जाएगा भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी का विवाह उत्सव - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 24 सितंबर 2026

सीहोर : आज मनाया जाएगा भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी का विवाह उत्सव

  • गौ सेवा सबसे बड़ा पुण्य कार्य, दान से धन और हरिनाम से मन की होती है शुद्धि : अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा

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सीहोर। गौ सेवा को सभी धर्मग्रंथों में श्रेष्ठ पुण्य कार्य बताया गया है। गौ माता के शरीर में मां लक्ष्मी और मां गंगा का निवास माना गया है तथा देवी-देवताओं का वास भी गौ माता में बताया गया है। गौ माता की सेवा करना भगवान की पूजा के समान है। भागवत कथा में गोवर्धन पूजन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया है। यह बात अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने शहर के बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल धर्मशाला में अग्रवाल महिला मंडल के तत्वावधान में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन कही। गुरुवार को कथा के दौरान नंद महोत्सव एवं गोवर्धन पूजन का आयोजन आस्था और उत्साह के साथ किया गया। भगवान को छप्पन भोग अर्पित कर श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई। कथा पंडाल में भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भक्तिभाव में डूबे रहे। शुक्रवार को कथा के छठवें दिन भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह उत्सव की आकर्षक झांकी सजाई जाएगी। साथ ही तुलसी विवाह के धार्मिक महत्व का वर्णन किया जाएगा।


दान से धन, स्नान से तन और हरिनाम से मन की शुद्धि

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पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि अविरल भक्ति मनुष्य को परमात्मा के करीब ले जाती है। ईश्वर की प्राप्ति अच्छे विचारों, सादगी और सत्कर्मों के माध्यम से होती है। उन्होंने कहा कि दान देने वाला व्यक्ति महान होता है। दान से धन की शुद्धि, स्नान से तन की शुद्धि और हरिनाम के स्मरण से मन की शुद्धि होती है। मनुष्य का जीवन सत्संग से महान बनता है, लेकिन आधुनिक जीवनशैली में व्यक्ति धीरे-धीरे सत्संग से दूर होता जा रहा है और मोह-माया तथा ऐश्वर्य में स्वयं को भूलता जा रहा है। यही कारण है कि जीवन में अशांति और दुख बढ़ते जा रहे हैं।


शिव ही जीवन का आधार और सनातन धर्म की जड़

उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा और करुणा के बिना भक्ति की प्राप्ति संभव नहीं है। भगवान शिव और श्रीकृष्ण प्रत्येक जीव के रोम-रोम में विद्यमान हैं। परमात्मा हमारी धड़कन में और शिव हमारी दृष्टि में हैं। जब तक शरीर में सांस चलती है, तब तक जीवन है और जब सांस रूपी शिव शरीर से चले जाते हैं तो शरीर शव बन जाता है। शिव ही प्रथम हैं और शिव ही अंतिम हैं। पंडित मिश्रा ने कहा कि शिव सनातन धर्म के मूल आधार हैं। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति भी शिव की शरण से होती है। समस्त जगत शिव की शरण में है और धर्मग्रंथों में भी शिव के प्रति समर्पण को जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है।


गोवर्धन पूजन के साथ सुनाईं भगवान की बाल लीलाएं

कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया गया। नंद महोत्सव और गोवर्धन पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। भगवान को छप्पन भोग अर्पित कर प्रसादी का वितरण किया गया। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरा वातावरण भक्ति एवं धार्मिक उल्लास से सराबोर नजर आया।

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