- एनीमिया मुक्त गर्भावस्था की दिशा में मधुबनी की पहल, 2,122 महिलाओं को मिला एफसीएम का लाभ
वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 2,122 लाभार्थियों तक पहुंच गई है।
जिले में एफसीएम कार्यक्रम का शुभारंभ 26 मार्च 2026 को किया गया था। इसके बाद इसकी पहुंच को लगातार विस्तारित किया गया। लक्षित गर्भवती महिलाओं की पहचान, लाइन लिस्टिंग, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला, चिकित्सकों एवं नर्सिंग कर्मियों का क्षमता वर्धन तथा दैनिक फॉलोअप की व्यवस्था को मजबूत किया गया है। इन प्रयासों से एफसीएम सेवा का दायरा तेजी से बढ़ा है और अधिक संख्या में जरूरतमंद गर्भवती महिलाएं इससे लाभान्वित हो रही हैं।गर्भावस्था के दौरान आयरन की कमी होने पर महिला को कमजोरी, थकान, चक्कर आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर एनीमिया की स्थिति में महिला के स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होती है। ऐसे में समय पर जांच के माध्यम से एनीमिया की पहचान और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार महत्वपूर्ण है।
गंभीर एनीमिया एवं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी पर विशेष ध्यान
जिले में गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान एनीमिया से प्रभावित महिलाओं को चिन्हित किया जा रहा है। गंभीर एनीमिया वाले मामलों में आवश्यकतानुसार चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाले मामलों में भी विशेष निगरानी रखते हुए संबंधित महिलाओं को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जा रहा है। एफसीएम सेवा के बेहतर क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक आपूर्ति बनाए रखने के साथ चिकित्सकों एवं नर्सिंग कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है। लाभार्थियों का नियमित फॉलोअप भी किया जा रहा है, ताकि उपचार की निरंतरता बनी रहे और जरूरत पड़ने पर समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
डीएम ने प्रभावी क्रियान्वयन के दिए निर्देश
जिलाधिकारी श्री आनंद शर्मा ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया है कि गर्भवती महिलाओं को उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ सहज एवं समयबद्ध रूप से मिले। उन्होंने एनीमिया से प्रभावित गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, आवश्यक जांच तथा चिकित्सकीय परामर्श के अनुरूप उपचार सुनिश्चित करने को कहा है। जिलाधिकारी ने एफसीएम की सुविधा को पात्र एवं जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य संस्थानों में इसकी उपलब्धता एवं सुचारु क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। उन्होंने लाभार्थियों के नियमित फॉलोअप, स्वास्थ्य कर्मियों के क्षमता वर्धन तथा हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में विशेष निगरानी रखने पर भी जोर दिया है।जिलाधिकारी ने कहा कि गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी और एनीमिया की समय पर पहचान सुरक्षित मातृत्व के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि ग्रामीण एवं सुदूरवर्ती क्षेत्रों की महिलाओं तक भी उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि जरूरतमंद महिलाएं समय पर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों से उपचार प्राप्त कर सकें।
महिलाओं के लिए जनोपयोगी सुविधा
एफसीएम की सुविधा विशेष रूप से उन गर्भवती महिलाओं के लिए उपयोगी है, जिनमें चिकित्सकीय जांच के बाद आयरन की कमी एवं गंभीर एनीमिया की स्थिति सामने आती है। स्थानीय सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के माध्यम से पात्र महिलाओं को आवश्यक उपचार से जोड़ने से समय पर प्रबंधन में सहायता मिलती है। जिला प्रशासन ने गर्भवती महिलाओं से नियमित प्रसवपूर्व जांच कराने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने की अपील की है। कमजोरी, अत्यधिक थकान, चक्कर, सांस लेने में परेशानी अथवा अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच एवं चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी गई है। मधुबनी में एफसीएम की पहुंच का 25 से बढ़कर 2,122 लाभार्थियों तक पहुंचना मातृ एनीमिया प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति है। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं को समय पर जांच, उचित परामर्श और आवश्यकतानुसार उपलब्ध हो।

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