- मंदी के बीच भदोही के कालीनों ने दुनिया को खींचा, 500 करोड़ का ग्लोबल बाजार
- 45 देशों से 216 विदेशी खरीदार पहुंचे भदोही, 231 बाइंग हाउस प्रतिनिधियों ने परखे भारतीय कालीनों के हुनर
- चार दिन में 500 करोड़ के सैंपल नेगोशिएशन और कारोबारी पूछताछ के अवसर
मंदी के बीच बाजार ने दिखाई उम्मीद
CEPC अध्यक्ष कैप्टन मुकेश कुमार गोम्बर ने कहा कि चार दिवसीय आयोजन में मिले करीब 500 करोड़ रुपये के सैंपल नेगोशिएशन ऑर्डर और कारोबारी पूछताछ आने वाले वर्षों में वास्तविक व्यवसाय में बदल सकते हैं। उनके अनुसार एक्सपो छोटे और मध्यम भारतीय निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बना है। यह पहल उन निर्यातकों के लिए खास मायने रखती है, जो विदेशों में होने वाली बड़ी प्रदर्शनियों में अपने उत्पाद ले जाने का खर्च नहीं उठा सकते। भदोही में विदेशी खरीदारों को एक ही छत के नीचे भारतीय कालीनों के विविध डिजाइन, बुनाई, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता देखने का अवसर मिला। यही वजह है कि एक्सपो को भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग और वैश्विक खरीद बाजार के बीच सेतु के रूप में देखा जा रहा है।45 देशों से आई दुनिया, 223 निर्यातकों ने खोले हुनर के दरवाजे
अर्जेंटीना से लेकर अमेरिका तक और ऑस्ट्रेलिया से लेकर जापान तक करीब 45 देशों के खरीदारों ने एक्सपो में भाग लिया। अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, बेलारूस, बेल्जियम, ब्राजील, कनाडा, चिली, चीन, डेनमार्क, मिस्र, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, इजराइल, इटली, जापान, कजाकिस्तान, केन्या, लेबनान, मैक्सिको, नेपाल, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड, ओमान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, स्पेन, स्वीडन, थाईलैंड, तुर्की, यूएई, ब्रिटेन, यूक्रेन, अमेरिका, उरुग्वे और उज्बेकिस्तान समेत अनेक देशों से खरीदार पहुंचे। इनके साथ 231 विदेशी खरीदारों, बाइंग हाउसों, डिजाइनरों और आर्किटेक्ट्स के प्रतिनिधियों ने भी उत्पादों को देखा। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर समेत विभिन्न राज्यों के 223 छोटे, मध्यम और बड़े निर्माता-निर्यातकों ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए।
बीस लाख हाथों की रोजी से जुड़ा है यह कारोबार
भदोही के कालीन उद्योग की चमक के पीछे उन लाखों हाथों की मेहनत है, जिनका जीवन धागों और गांठों से जुड़ा है। CEPC के अनुसार यह श्रमप्रधान ग्रामीण एमएसएमई-कुटीर उद्योग करीब 20 लाख बुनकरों और कारीगरों की आजीविका से जुड़ा है। इसलिए एक्सपो में होने वाला प्रत्येक कारोबारी संवाद सिर्फ निर्यात के आंकड़े नहीं बढ़ाता, बल्कि गांवों तक रोजगार और आमदनी की संभावनाएं भी पहुंचाता है। CEPC का लक्ष्य आयातकों और निर्माता-निर्यातकों के बीच ऐसा व्यावसायिक वातावरण तैयार करना है, जिसमें दोनों पक्ष दीर्घकालिक कारोबारी संबंध बना सकें। एक्सपो में मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया ने प्रदर्शकों में भी नए बाजारों को लेकर उम्मीद जगाई।
गोल्डन जुबली ने मजबूत की अंतरराष्ट्रीय पहचान
50वां गोल्डन जुबली इंडिया कार्पेट एक्सपो भारतीय हस्तनिर्मित कालीन और फ्लोर-कवरिंग उद्योग की यात्रा का अहम पड़ाव बनकर सामने आया। CEPC के उपाध्यक्ष असलम महबूब और COA सदस्यों ने विदेशी खरीदारों की भागीदारी और प्रदर्शित कलेक्शनों को मिली प्रतिक्रिया पर संतोष जताया। मेले के दौरान विंध्याचल मंडल के मंडलायुक्त राजेश प्रकाश, जिलाधिकारी शैलेश कुमार, पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी और BIDA के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी निखिल यादव भी पहुंचे। अंतिम दिन दिल्ली के मालवीय नगर विधायक सतीश उपाध्याय ने एक्सपो का दौरा कर अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन के लिए की गई व्यवस्थाओं की सराहना की। चार दिन के इस आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि भदोही की पहचान केवल कालीन बुनने वाले शहर की नहीं, बल्कि भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने वाले कारोबारी केंद्र की भी है। धागे भले छोटे हों, मगर उनसे बुना बाजार अब दुनिया के नक्शे पर बड़ा होता जा रहा है।


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