सीहोर : भागवत कथा के श्रवण मात्र से पापों का नाश होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है : भागवत भूषण पं. अरविंद व्यास - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026

सीहोर : भागवत कथा के श्रवण मात्र से पापों का नाश होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है : भागवत भूषण पं. अरविंद व्यास

  • भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के मंगल परिणय की सजी मनोहारी झांकी, आज किया सात दिवसीय कथा का विराम

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सीहोर। भागवत कथा का श्रवण मनुष्य के जीवन को पवित्र करने वाला है। जन्म-जन्मांतर के पुण्य उदय होने पर ही मनुष्य को श्रीमद्भागवत कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। भागवत कथा के श्रवण से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस संसार में भागवत कथा के श्रवण से बढ़कर ज्ञान एवं मोक्ष प्राप्ति का कोई सरल साधन नहीं है। यह विचार शहर के बस स्टैंड स्थित गीता मानस भवन में जारी सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिवस भागवत भूषण पंडित अरविंद व्यास ने व्यक्त किए। शुक्रवार को कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण विवाह, महारास, कंस वध एवं उद्धव प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया गया। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी का मंगल विवाह उत्साह और श्रद्धा के साथ कराया गया। कथा स्थल पर आकर्षक वेशभूषा में भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मिणी की मनोहारी झांकी सजाई गई तथा विवाह संस्कार की विभिन्न रस्में विधि-विधान से संपन्न कराई गईं। झांकी के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।


सत्य और प्रेम का मिलन है भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह

उन्होंने कहाकि श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुनाते हुए कहा कि सत्य और प्रेम का मिलन ही भगवान का विवाह है। माता रुक्मिणी को भगवान श्रीकृष्ण द्वारका लेकर आए और विधिपूर्वक उनका पाणिग्रहण किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं मनुष्य को प्रेम, समर्पण, धर्म और भक्ति का संदेश देती हैं।


गुरु के बिना जीवन का सार समझना कठिन

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पंडित श्री व्यास ने गुरु की महिमा बताते हुए कहा कि हमारे जीवन में गुरु का स्थान अनुपम है। गुरु के बिना हम जीवन के वास्तविक सार को नहीं समझ सकते। गुरु के समक्ष हमेशा विनम्र और अनुशासित रहना चाहिए। अनावश्यक चंचलता नहीं करनी चाहिए और जितनी आवश्यकता हो उतना ही बोलना चाहिए। अधिक से अधिक गुरु की वाणी का श्रवण कर उनके बताए मार्ग को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संतों का सत्संग केवल सांसारिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति के लिए नहीं करना चाहिए। ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि सत्संग करने से बीमारी नहीं आएगी, परिवार हमेशा खुशहाल रहेगा या व्यापार में सदैव लाभ होगा। यह सब प्रारब्ध और जीवन की परिस्थितियों का हिस्सा है। जो इस संसार में आया है, उसे एक दिन जाना भी है और जहां लाभ है, वहां हानि भी निश्चित है।


सत्संग जीवन की धारा बदल देता है

पंडित श्री व्यास ने कहाकि सत्संग का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य के जीवन की दिशा और धारा को बदलना है। सत्संग के माध्यम से मनुष्य ज्ञान और भक्ति की धारा में आगे बढ़ता है, लेकिन केवल सत्संग सुन लेना ही पर्याप्त नहीं है। उसके मूल संदेश को समझकर अपने आचरण और जीवन में उतारना आवश्यक है। यदि मनुष्य जीवनभर सत्संग करता रहे, लेकिन उसके मूल तत्व को नहीं समझे और आचरण में नहीं उतारे, तो उसे उसका वास्तविक लाभ प्राप्त नहीं हो सकता।


अंतिम दिवस होगा सुदामा चरित्र का वर्णन

यजमान केएन आचार्य, ईश्वर जोशी एवं देवेंद्र जोशी के परिवार ने बताया कि सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिवस भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता सहित अन्य महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। कथा का आयोजन प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक बस स्टैंड के समीप स्थित गीता मानस भवन में किया जा रहा है। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर धर्मलाभ ले रहे हैं। कथा श्रवण के लिए ग्राम खंडवा से राजाराम मंदिर के महंत बालक दास महाराज, विधायक सुदेश राय, भाजपा नेता सन्नी महाजन सहित बड़ी संख्या में संतों और जनप्रतिनिधियों ने लाभ लिया। 

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