‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की नेता आइशी घोष, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विराज देवांग और अभिनेता प्रकाश राज समेत अन्य लोगों के साथ एक प्रेसवार्ता में दीपके ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनों में लोगों को शामिल होने से रोकने के लिए राजधानी में असाधारण प्रतिबंध लगाए गए हैं। कॉजपा, छात्र संगठनों और युवा संगठनों ने कुमार के तत्काल इस्तीफे, कॉजपा सदस्यों आशुतोष रांका और सौरव दास तथा हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों की रिहाई, पुलिस की बर्बरता पर रोक लगाने, और जंतर-मंतर को फिर से प्रदर्शन स्थल के रूप में बहाल करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई को लेकर दीपके ने कहा, ‘‘पूर्व मुख्यमंत्रियों, सांसदों और विपक्ष के नेताओं, सभी को हिरासत में ले लिया गया। भारत के इतिहास में पहली बार, ज्ञानेश के लिए रेलवे और मेट्रो सेवाएं बंद कर दी गईं।’’ उन्होंने पूछा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को सरकार क्यों बचा रही है। दीपके ने कहा, ‘‘ज्ञानेश कुमार मोदी को ऐसा क्या दे रहे हैं कि वह उनके लिए दिल्ली को ठप करने को तैयार हैं? नरेन्द्र मोदी और अमित शाह अपने ही देशवासियों के खिलाफ लड़ाई क्यों छेड़ रहे हैं?’’ उन्होंने सवाल किया, ‘‘नरेन्द्र मोदी के लिए ज्ञानेश कुमार इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं? हम यह क्यों न मानें कि ज्ञानेश कुमार नरेन्द्र मोदी को चुनाव जितवा रहे हैं?’’ कॉजपा नेता ने 2024 के लोकसभा चुनाव के संदर्भ में कहा, ‘‘वर्ष 2024 में जीत का अंतर सिर्फ दो प्रतिशत था। 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जहां दो प्रतिशत वोट परिणाम तय कर रहे हों, वहां आप 13 करोड़ वोट हटा रहे हैं। अगर यह ‘मिलीभगत’ नहीं है, तो फिर क्या है?’’ वर्ष 2024 में, भारतीय जनता पार्टी ने 36.56 प्रतिशत मतों के साथ लोकसभा की 543 में से 240 सीट जीती थीं, जबकि भाजपा-नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 293 सीट हासिल कीं और 43 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के दलों को कुल मिलाकर लगभग 40.6 प्रतिशत वोट मिले थे। दीपके ने भाजपा के ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के नारे को किसी अन्य राजनीतिक उद्देश्य को छिपाने का जरिया बताते हुए कहा, ‘‘...‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ तो बस एक नारा है। असल इरादा ‘एक राष्ट्र, एक पार्टी, एक नेता’ का है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जिन्होंने कभी तिरंगे को नहीं अपनाया, वे ही अब उस पर हमला कर रहे हैं। हमारे साथी कनॉट प्लेस में तिरंगा लेकर चल रहे थे, और उन सभी को हिरासत में ले लिया गया। तिरंगा थामना कब से अपराध हो गया?’’ कॉजपा ने शुक्रवार को दिल्ली में कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘‘लहरा दो तिरंगा’’ मार्च की घोषणा की है। दीपके ने नागरिकों से प्रदर्शन में शामिल होने का आग्रह किया और कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना एक लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने राजनीतिक दलों से भी इसमें शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘‘(नरेंद्र) मोदी (महात्मा) गांधी और (जवाहरलाल) नेहरू से बड़े नहीं हो सकते।’’ बोरा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों को कवर कर रहे पत्रकारों को निशाना बनाया; उनके पास प्रेस पहचान-पत्र होने के बावजूद उन्हें हिरासत में ले लिया और उनके कैमरे छीन लिये।
उन्होंने एक पत्रकार से जुड़ी कथित यौन उत्पीड़न की घटना का भी जिक्र किया, जिसमें प्राथमिकी दर्ज की गई है। बोरा ने पुलिस पर आरोप लगाया कि वह चुनावी अधिकारों को लेकर चिंता जताने वाले लोगों के खिलाफ बल प्रयोग कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय जनता पर सख्ती कर रही है। हमने जो देखा है, यह उसका एक बेहतरीन उदाहरण है।’’ बोरा ने कहा, ‘‘आप वोट देने के अधिकार का समर्थन करने वाली आवाज़ को जेल भेज देते हैं। जब आप आम लोगों को घसीटते हैं, तो आप उन 13 करोड़ लोगों को घसीट रहे होते हैं।’’ आइशी घोष ने नागरिकों से लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होने का आग्रह किया और कहा कि उन्हें सत्ताधारी भाजपा के बजाय लोगों पर भरोसा है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ज्ञानेश ने पूरा देश जीतने में उनकी (भाजपा की) मदद की है।’’ घोष ने कहा, ‘‘हमें भाजपा से कोई उम्मीद नहीं है, हमें अपने नागरिकों से उम्मीद है। अब हम सभी के लिए एकजुट होने का समय आ गया है। जिस देश के लिए भगत सिंह लड़े और गांधीजी ने बलिदान दिया, हमें उस देश को बचाना है।’’ उन्होंने रिसॉर्ट रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ हुए बर्ताव का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि उन्हें घसीटा गया तथा उनके साथ बेरहमी से पेश आया गया। भंडारी की 2022 में उत्तराखंड में हत्या कर दी गई थी। घोष ने कहा, ‘‘बलात्कारियों को माला पहनाई जा रही है।’’ प्रेसवार्ता में उस समय कुछ देर के लिए बाधा आई, जब एक रिपोर्टर ने कथित तौर पर बोरा की बात के बीच में दखल देने का प्रयास किया। इसके बाद उसे वहां से बाहर ले जाया गया।

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