प्रमंडल स्तर से क्षेत्रीय अपर निदेशक एवं क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक तथा जिला स्तर से अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी एवं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, जिला औषधि भंडार प्रशिक्षण में ऑनलाईन के माध्यम से जुड़े थे। उक्त प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को डॉ0 इंदु ग्रेवाल, अपर आयुक्त, परिवार नियोजन प्रभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार तथा उनके तकनीकी सलाहकार श्री ध्रुव कुमार एवं श्री श्रीकांत गौतम तथा राज्य स्तर से डॉ0 सरिता, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, श्री निशांत कुमार, उपनिदेशक, परिवार नियोजन एवं परिवार नियोजन कोषांग के तकनीकी सलाहकार के द्वारा प्रशिक्षित किया गया। राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान, पटना के सभागार में डॉ0 अनुपमा सिंह, भा0प्र0से0, अपर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार की अध्यक्षता में दीप प्रज्वलित कर प्रशिक्षण का शुभारंभ किया गया तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 में परिवार नियोजन कार्यक्रम में सबसे बेहतर कार्य करनेवाले प्रमंडल, जिला, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, स्वास्थ्य उपकेन्द्र-HWC, चिकित्सक, परिवार नियोजन परामर्शी, आशा फैसिलिटेटर एवं आशा को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
अपर कार्यपालक निदेशक के द्वारा बताया गया कि परिवार नियोजन कार्यक्रम जनसंख्या स्थिरीकरण के साथ हीं मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए भी अहम है। ये आवश्यक है कि सही उम्र में शादी, पहले बच्चे में देरी, बच्चों के बीच सही अंतर तथा छोटा परिवार के लाभ के बारे में आमजन के मध्य चर्चा कर, माँ और शिशु स्वास्थ्य को बेहतर करने तथा गर्भनिरोधक उपायो को अपनाने हेतु परामर्श दिया जाय तथा साथ हीं दम्पतियों के द्वारा चयनित गर्भनिरोधकों की उपलब्धता अथवा सेवा सुनिश्चित किया जाय। अपर आयुक्त, परिवार नियोजन प्रभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा बताया गया कि परिवार नियोजन कार्यक्रम के सफलता का आधार योग्य दम्पतियों को परामर्श तथा मांग के अनुरूप गर्भनिरोधक अथवा सेवा उपलब्धता है। इस हेतु आवश्यक है कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों एवं समुदाय में आशा के पास गर्भनिरोधक सामग्रियों की उपलब्धता, ससमय पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो। इस हेतु आवश्यक है कि गर्भनिरोधक सामग्रियों की आपूर्ति श्रंखला प्रबंधन राज्य स्तर, जिला स्तर, प्रखंड स्तर पर सुदृढ़ करते हुये स्वास्थ्य उपकेन्द्र तक के सभी स्वास्थ्य संस्थानों एवं समुदाय में कार्यरत ए.एन.एम. एवं आशा के पास हमेशा उपलब्धता सुनिश्चित हो। लाभार्थी स्वंय निर्णय लेकर उनका उपयोग कर सकें।

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