मुंगेर : बिहार की नाज़िया ने आठ साल बाद पुनः शुरू की पढ़ाई, 10वीं में हासिल किए 81 प्रतिशत अंक - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026

मुंगेर : बिहार की नाज़िया ने आठ साल बाद पुनः शुरू की पढ़ाई, 10वीं में हासिल किए 81 प्रतिशत अंक

  • एजुकेट गर्ल्स के प्रगति कार्यक्रम की मदद से सिलाई और घर की ज़िम्मेदारियों के साथ पूरी की पढ़ाई

Munger-nazia
मुंगेर, 01 अक्टूबर (रजनीश के झा) : परिवार की आर्थिक मदद के लिए 12 वर्ष की उम्र में पढ़ाई छोड़ने वाली नाज़िया परबीन ने बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड (बीबोस) से 10वीं की परीक्षा 81 प्रतिशत अंकों के साथ पास की है। आठ साल के अंतराल के बाद एजुकेट गर्ल्स के प्रगति कार्यक्रम से जुड़कर उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की। इस दौरान, वे सिलाई करके घर के खर्च में योगदान देती रहीं और परिवार की ज़िम्मेदारियाँ भी संभालती रहीं। मुंगेर जिले के मिर्ज़ापुर गाँव की रहने वाली नाज़िया का जन्म 1 जनवरी, 2005 को हुआ था। चार बहनों में सबसे बड़ी नाज़िया को आर्थिक कठिनाइयों के कारण वर्ष 2017 में स्कूल छोड़ना पड़ा। परिवार में कोई और कमाने वाला नहीं था। ऐसे में, वे घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर लुधियाना चली गईं, जहाँ उन्होंने एक फैक्टरी में सात हज़ार रुपए महीने की नौकरी की। अपनी कमाई का लगभग पूरा हिस्सा वे माता-पिता और छोटी बहनों की ज़रूरतें पूरी करने के लिए घर भेज देती थीं।


पढ़ाई पुनः शुरू करने का अवसर उन्हें तब मिला, जब वे छुट्टी के दौरान घर आई थीं। उसी दौरान उनके गाँव में एजुकेट गर्ल्स का प्रगति कार्यक्रम शुरू हुआ था। उनकी परिस्थितियों से परिचित गाँव की प्रेरक, यानि सामुदायिक कार्यकर्ता ने घर जाकर उन्हें दोबारा पढ़ाई शुरू करने का रास्ता बताया। नाज़िया ने शुरुआत में मना कर दिया। परिवार की अकेली कमाने वाली सदस्य होने के कारण उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि काम और पढ़ाई एक साथ कैसे कर पाएँगी। प्रेरक ने बताया कि वे अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाते हुए प्रगति शिक्षण शिविर और मुक्त विद्यालय के माध्यम से 10वीं की तैयारी कर सकती हैं। उन्हें नियमित स्कूल जाने की बाध्यता नहीं होगी और पढ़ाई का खर्च भी नहीं उठाना पड़ेगा। नाज़िया ने कहा, “मैं सोचकर बताती हूँ।” उस रात उन्होंने इस बारे में विचार किया। उन्हें सिलाई आती थी। उन्होंने तय किया कि गाँव में रहकर सिलाई का काम करेंगी, जिससे घर के खर्च में मदद भी होगी और पढ़ाई के लिए समय भी निकाल सकेंगी। दिनभर के काम की योजना बनाने के बाद उन्होंने प्रेरक से कहा, “मैं कैम्प में पढ़ूँगी।”


वर्ष 2025 में नाज़िया ने आठ साल बाद दोबारा पढ़ाई शुरू की। अब वह कपड़े सिलतीं, प्रगति शिक्षण शिविर में पढ़ने जातीं और घर के काम भी संभालतीं। कमाई और परिवार की ज़िम्मेदारियों के बीच उन्होंने पढ़ाई के लिए समय निकाला। कुछ महीनों बाद परिवार में उनकी शादी की तैयारियाँ शुरू हो गईं और तारीख भी तय कर दी गई। नाज़िया ने स्पष्ट कहा कि वे पहले परीक्षा की तैयारी पूरी करना चाहती हैं, उसके बाद ही शादी की बात आगे बढ़ेगी। उनके होने वाले पति ने उनकी बात स्वीकार की और उनके फैसले में उनका साथ दिया।प्रगति कार्यक्रम के सहयोग और लगातार तैयारी से नाज़िया ने 10वीं की परीक्षा में 81 प्रतिशत अंक हासिल किए। इस सफलता से परिवार में खुशी और गर्व का माहौल बना। छोटी बहनों को भी अपनी पढ़ाई आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिली। नाज़िया अब आगे पढ़ना चाहती हैं और एक अच्छी नौकरी पाना चाहती हैं, ताकि परिवार को आर्थिक रूप से मज़बूत बना सकें। सिलाई ने उन्हें कमाई के साथ पढ़ाई जारी रखने का रास्ता दिया। अब 10वीं पास करने के बाद वह अपने भविष्य के लिए अगला कदम उठाने को तैयार हैं।

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