भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 2016 बैच के अधिकारी गंगवार को केंद्रीय एजेंसी ने 18 सितंबर को उस समय गिरफ्तार किया था जब वह उसी मामले की जांच कर रही कर्नाटक सीआईडी की हिरासत में थे। वह वर्तमान में ईडी की हिरासत में हैं। अधिकारी या उनकी कानूनी टीम से उनके खिलाफ लगाए गए ईडी के आरोपों पर टिप्पणी के लिए संपर्क नहीं किया जा सका। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज किया गया ईडी का मामला राज्य पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई प्राथमिकी से जुड़ा है, जिनमें कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) द्वारा 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच की जा रही है। कथित बिचौलिए बसवराज कन्नाले को भी ईडी ने 17 सितंबर को उस वक्त गिरफ्तार किया था जब वह सीआईडी मामले के तहत न्यायिक हिरासत में था। ईडी ने एक बयान में कहा कि गंगवार को केपीएससी भर्ती परीक्षाओं के पारदर्शी और निष्पक्ष संचालन को सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपा गया था और वह प्रश्नपत्रों की छपाई को अंतिम रूप देने और उसकी निगरानी करने तथा गोपनीय परीक्षा सामग्री की अभिरक्षा बनाए रखने के लिए जिम्मेदार थे। एजेंसी ने दावा किया कि कुछ उम्मीदवारों को बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित एक रिसॉर्ट में ले जाया गया, जहां उन्हें सही उत्तरों वाला “लीक” हुआ प्रश्न पत्र मिला। उसने कहा कि उम्मीदवारों को कन्नाले और उसके सहयोगियों की निगरानी में उत्तरों को याद कराया गया था।
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को आरोप लगाया कि कर्नाटक पीएससी के पूर्व परीक्षा नियंत्रक और आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार ने कथित तौर पर रिश्वत के बदले पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र को परीक्षा से एक दिन पहले एक कथित बिचौलिए तक लीक करने में “सहायता” की। ईडी ने यह भी कहा कि उसकी जांच में पता चला कि लीक हुए प्रश्नपत्र तक पहुंच के लिए परीक्षा के उम्मीदवारों से 30-40 लाख रुपये लिए गए थे।

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