अठारहवीं सदी के मणिपुर के शासक भाग्यचंद्र को रासलीला को शुरू करने और स्थापित करने का श्रेय दिया जाता है। रासलीला राज्य की सबसे प्रमुख सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है। उन्होंने इंफाल घाटी में वैष्णव संप्रदाय पर आधारित सांस्कृतिक एवं धार्मिक सुधार भी किए। सिंह ने कहा कि मणिपुर के कई पूर्व राजा साल में लगभग 100 दिन पहाड़ी क्षेत्रों में बिताते थे। उन्होंने कहा कि पिछली पीढ़ियों ने अलग-अलग समुदायों के बीच बातचीत और समझ बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सिंह ने इस व्यापक ऐतिहासिक पहचान को गर्व की बात बताते हुए कहा कि मणिपुर के लोगों को राज्य को अलग-थलग करके नहीं देखना चाहिए, क्योंकि पड़ोसी राज्यों और विभिन्न समुदायों के साथ उसके लंबे समय से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। सौहार्द के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य तभी स्थायी विकास हासिल कर सकता है, जब उसके अलग-अलग समुदाय शांति से एक साथ रहें। सिंह ने लोगों से शांति, सह-अस्तित्व और विकास के संदेश को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने की अपील की और कहा कि इससे मणिपुर को प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने मंगलवार को कहा कि राज्य के निरंतर विकास के लिए अलग-अलग समुदायों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और साझा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखने की जरूरत है। सिंह ने यह बात मुख्यमंत्री सचिवालय में राजर्षि भाग्यचंद्र की 228वीं पुण्यतिथि के अवसर पर बर्मी और मणिपुरी भाषाओं में प्रकाशित एक द्विभाषी स्मारिका के विमोचन के दौरान कही। यह स्मारिका मणिपुर की राजर्षि भाग्यचंद्र सांस्कृतिक फाउंडेशन ने ‘‘इंडो-म्यांमा फ्रेटर्नल अलायंस’’ के सहयोग से प्रकाशित की है। यह 13 अक्टूबर को म्यांमा के मांडले में पूर्व शासक की पुण्यतिथि के अवसर पर होने वाले कार्यक्रम में वितरित की जाएगी।

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