उन्होंने कहा, “गैलरी देखते समय मुझे 1920 के उस दौर की जानकारी मिली, जब सुभाष चंद्र बोस भी इसी परीक्षा से गुजरे थे। मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि उस समय अंग्रेजों का शासन होने के बावजूद संस्कृत का एक प्रश्नपत्र हुआ करता था और सुभाष बाबू ने अपनी परीक्षा संस्कृत में दी थी।” मोदी ने ब्रिटिश शासन के दौर में संस्था की शुरुआत और स्वतंत्रता के बाद के उसके विकास की तुलना करते हुए कहा कि इस तंत्र ने एक आजाद देश के सपनों को पूरा करने की ओर सफलतापूर्वक अपना ध्यान केंद्रित किया। प्रधानमंत्री ने तहा कि यूपीएससी ने अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारियां तो निभाई हैं, लेकिन अब ध्यान अगले 25 वर्ष पर होना चाहिए। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल (आजाद भारत के पहले गृह मंत्री) को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने देश को शासन-व्यवस्था का एक मजबूत ढांचा प्रदान किया। मोदी ने पटेल की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने इस संस्था को बदलकर और मजबूत बनाकर इसे आजाद भारत का एक अहम स्तंभ बनाया। प्रधानमंत्री ने कहा, “देश के पुनर्निर्माण के लिए जिस मजबूत ढांचे की जरूरत थी, वह सरदार वल्लभभाई पटेल ने ही दिया था।”
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने 1920 में संस्कृत में सिविल सेवा परीक्षा दी थी, जब देश में अंग्रेजों का शासन था। राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम परिसर में आयोजित संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के शताब्दी समारोह में अपने संबोधन में मोदी ने इस कार्यक्रम को लाखों युवाओं की आकांक्षाओं का जश्न बताया। उन्होंने कहा, “यह उस भरोसे का जश्न है, जो हर भारतीय इस संस्था (यूपीएससी) पर रखता है। एक सदी लंबी इस यात्रा के दौरान पीढ़ियां बदलीं, सरकारें बदलीं, प्रौद्योगिकी बदली और पाठ्यक्रम बदले, लेकिन यूपीएससी पर भरोसा आज भी उतना ही अटूट है और यही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है।” मोदी ने सभी से कार्यक्रम स्थल पर स्थापित गैलरी देखने का भी आग्रह किया।

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