अभिषेक ने विशेष रूप से सतगछिया का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय उनकी पार्टी करीब 11,000 से 12,000 मतों से आगे चल रही थी, लेकिन उसके मतगणना एजेंटों को बाहर निकाल दिया गया और उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने कहा, ‘‘जिस सीट पर (तत्कालीन) तृणमूल कांग्रेस करीब 12,000 मतों से आगे चल रही थी, वहां अंततः भाजपा करीब 400 मतों से जीत गई। यही वजह है कि हम पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।’’ ममता गुट के नेता ने जून में अलीपुर स्थित एक सरकारी इमारत में आग लगने से ईवीएम नष्ट होने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह घटना चुनाव परिणाम घोषित होने के करीब एक महीने बाद हुई और इसमें करीब 4,000 बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट और वीवीपैट मशीन शामिल थीं। बनर्जी ने सवाल किया कि आग बीच की मंजिलों को पार कर उस जगह तक कैसे पहुंच गई, जहां चुनावी उपकरण रखे गए थे। उन्होंने कहा, ‘‘इस घटना को तीन महीने बीत चुके हैं। फिर भी, हमारे पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक किसी को भी जवाबदेह नहीं ठहराया गया है।’’ अभिषेक ने दावा किया कि करीब 150 विधानसभा क्षेत्रों में एसआईआर के दौरान नाम हटाए जाने, तार्किक विसंगतियों या निर्णय के लिए लंबित मामलों की संख्या अंततः जीत के अंतर से अधिक थी।
कोलकाता । निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर जारी विवाद के बीच ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बृहस्पतिवार को मतगणना प्रक्रिया में कथित विसंगतियों का हवाला देते हुए पश्चिम बंगाल के मतगणना केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज की सार्वजनिक जांच की मांग की। अभिषेक ने राज्य में विधानसभा चुनाव के बाद आग लगने से करीब 4,000 ईवीएम के नष्ट होने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में निर्वाचन आयोग को चुनौती देते हुए कहा कि वह करीब 100 निर्वाचन क्षेत्रों के उन मतगणना केंद्रों का सीसीटीवी फुटेज जारी करे, जहां ममता-नीत तृणमूल ने मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा, ‘‘राजारहाट-गोपालपुर, भवानीपुर, सतगछिया या उस सूची में शामिल किसी भी अन्य निर्वाचन क्षेत्र को लें और दोपहर से रात आठ बजे, साढ़े आठ बजे या नौ बजे तक का सीसीटीवी फुटेज जारी करें। आपको इसे हमें दिखाने की भी जरूरत नहीं है। पत्रकारों को बुलाएं, अपने कार्यालय में उनके सामने फुटेज दिखाएं और उन्हें देखने दें कि उन मतगणना केंद्रों के अंदर क्या हुआ।’’

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