इसे लेकर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि दोपहर के भोज का फैसला मंगलवार देर रात लिया गया और उसी समय इसकी जानकारी दी गई, इसलिए स्वाभाविक था कि कुछ दलों के प्रतिनिधि इसमें शामिल नहीं हो सके। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज के भोज के लिए ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी दलों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन भोज का फैसला कल देर रात लिया गया और उसी समय इसकी जानकारी दी गई। इसलिए स्वाभाविक था कि कुछ दलों के प्रतिनिधि इसमें शामिल नहीं हो सके।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कुछ मीडिया संस्थानों में इसे लेकर बेवजह टिप्पणी की जा रही है। ‘इंडिया’ गठबंधन और अन्य विपक्षी दल वोट चोरी, एसआईआर और परिसीमन के खिलाफ एकजुट हैं तथा पूरी मजबूती से एक-दूसरे के साथ खड़े हैं।’’ भोज के बाद खरगे ने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी सहयोगी दल जंतर-मंतर पर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। खरगे ने आरोप लगाया, ‘‘निर्वाचन आयोग जो भी कर रहा है, उसके पीछे नरेंद्र मोदी हैं। इसका मतलब है कि मोदी जी खुद लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि विपक्षी दल मिलकर देश की जनता को यह बताना चाहते हैं कि उसके अधिकार छीने जा रहे हैं। खरगे ने कहा कि जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए विपक्षी नेताओं और सांसदों पर कितने भी मामले दर्ज किए जाएं, वे डरने या रुकने वाले नहीं हैं। वहीं, राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष के करीब 300 सांसद बुधवार को चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘करीब 300 सांसद कल निर्वाचन आयुक्तों से मिलना चाहते थे, लेकिन वे हमसे नहीं मिले। दिल्ली पुलिस ने हमें रोका और कहा कि यहां प्रदर्शन नहीं कर सकते।’’ उन्होंने कहा कि इसलिए अब विपक्षी सांसद प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल जंतर-मंतर जाकर बैठेंगे और देश को बताएंगे कि ज्ञानेश कुमार ‘‘देश के वैध मुख्य निर्वाचन आयुक्त नहीं हैं।’’ राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और ज्ञानेश कुमार ने लोकतंत्र को खत्म किया है। उन्होंने कहा कि ‘‘इन पर कार्रवाई होगी’’ और ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना पड़ेगा। विपक्षी सांसदों के जंतर-मंतर जाने के कार्यक्रम को मंगलवार के घटनाक्रम की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा था कि विपक्ष के करीब 300 सांसद मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं। उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया था। ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों ने मंगलवार को संसद से निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया था, लेकिन पुलिस ने संसद मार्ग के पास बैरिकेड लगाकर मार्च रोक दिया था। इसके बाद कई विपक्षी नेताओं और सांसदों ने वहीं धरना दिया था। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कम से कम 260 लोगों को हिरासत में लिया था, जिनमें ‘इंडिया’ गठबंधन के 10 सांसद भी शामिल थे। बाद में सभी को छोड़ दिया गया। प्रदर्शन में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए थे। विपक्ष का कहना है कि एसआईआर और कथित ‘वोट चोरी’ समेत निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर उसकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

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