- आश्विन मास नवरात्रि में होगी मां भगवती के नो स्वरूपों की साधना
- सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग में होगा इस बार 10 दिवसीय शारदीय नवरात्रि शक्ति पर्व का आयोजन
वर्ष में चार बार मनाया जाता है नवरात्रि शक्ति महापर्व-
नवरात्रि शक्ति महापर्व को लेकर पंडित सुनील शर्मा ने बताया की वर्ष में चार नवरात्रि होती है इसमें दो प्रकट प्रत्यक्ष नवरात्रि चैत्र मास व अश्विन मास में होती है तथा दो अप्रत्यक्ष गुप्त नवरात्रि माघ मास व आषाढ मास में होती है। नवरात्रि में साधक साधनाए अपने घर मंदिर व अपनी व्यवस्थानुसार एकांत मे करते है। इस बार मां दुर्गा की कलश स्थापना रविवार को होगी l नवरात्रि में साधक अपनी आध्यत्मिक व मानसिक शक्तियों में वृद्धि करने के लिए अनेक प्रकार के उपवास, संयम, नियम, भजन, पूजन, योग साधना आदि करते है।
नवरात्रि में 9 स्वरुपो की होगी पूजा -
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार अश्विन मास शारदीय प्रकट नवरात्रि में माँ भगवती के नौ स्वरुपो की साधना की जाती है नवरात्रि शक्ति पर्व के अंतर्गत माँ शैलपुत्री , माँ ब्रह्मचारिणी , माँ चंद्रघंटा , माँ कुष्मांडा, माँ स्कंदमाता , माँ कात्यायनी, माँ कालरात्रि , माँ महागौरी और माँ सिद्धिदात्री देवी की विशेष साधना की जाती है । नवरात्रि में शिव शक्ति की साधना सभी मनोकामनाए पूर्ण करती है। इस समय की जाने वाली साधना को गुप्त बनाये रखना चाहिए। शास्त्र अनुसार मानव के समस्त रोग दोष व कष्टो के निवारण के लिए नवरात्र से बढ़कर कोई साधना नही है। नवरात्रि के साधनाकाल में शिव शक्ति का जप तप ध्यान करने से साधक का जीवन मंगलमय हो जाता है।
नवरात्रि पूजा विधि- पूजा विधि के संबंध में पंडित सुनील शर्मा ने बताया की शास्त्रों में घट स्थापना, अखंड ज्योत प्रज्जवलित करना व जावरे स्थापित करने का उल्लेख किया गया है l श्रदालुजन अपने सामर्थ्य अनुसार उपरोक्त कार्य करते है। नवरात्रि के समय अन्य नवरात्रि की तरह ही साधक को पूजा ध्यान करना चाहिए। नौ दिनों का संकल्प लेते हुए प्रतिप्रदा प्रथम दिवस घट स्थापना करना चाहिए, घट स्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह शाम शिव शक्ति व भैरव महाराज की पूजा करनी चाहिए। नवमी के दिन कन्या पूजन भोजन व हवन के साथ नवरात्र पूर्ण करना चाहिए। पूर्णाहुति हवन मां दुर्गा के मंत्रों व दुर्गा सप्तशती के मंत्रों से सम्पन्न करना चाहिए। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती दुर्गा चालीसा का पाठ करने से शिव शक्ति प्रसन्न होकर साधक की मनोकामनाऐं पूर्ण करती है।

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