दिल्ली :अवमानना मामले में केंद्रीय गृह सचिव ने उच्चतम न्यायालय से बिना शर्त माफी मांगी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026

दिल्ली :अवमानना मामले में केंद्रीय गृह सचिव ने उच्चतम न्यायालय से बिना शर्त माफी मांगी

Hme-secretery-say-sorry-to-court
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने 10 अक्टूबर को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में मेट्रो और रेल सेवाएं ‘‘पूरी तरह बंद नहीं करने’’ के उच्चतम न्यायालय के निर्देश का कथित तौर पर उल्लंघन किए जाने से जुड़े अवमानना मामले में बिना शर्त माफी मांगी है। मोहन ने न्यायालय में दाखिल एक हलफनामे में कहा कि दिल्ली पुलिस से 10 अक्टूबर को रात 10 बजे तक एक दिन के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने का अनुरोध मिला था। उन्होंने कहा, ‘‘इस अनुरोध पर कानून के अनुसार विचार किया गया और स्थिति की गंभीरता एवं राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने से रोकने की जरूरत को देखते हुए इसे उचित और जरूरत के अनुरूप पाया गया।’’ 


गृह सचिव ने बताया कि नौ अक्टूबर को रात 10 बजे से 10 अक्टूबर को रात 10 बजे तक रायसीना हिल के चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद रखी गई थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाबंदी केवल मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर लगाई गई थी तथा वाई-फाई या ब्रॉडबैंड जैसी अन्य इंटरनेट और दूरसंचार सेवाओं पर कोई रोक नहीं थी। मोहन ने कहा, ‘‘मैं यह कहना चाहता हूं कि जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीमित अवधि और एक तय क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं बंद करना एक मान्य कदम है, बशर्ते इस दौरान कानून में निर्धारित सुरक्षा उपायों और प्रावधानों का पालन किया जाए।’’  उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मैं न्यायालय से सम्मानपूर्वक अनुरोध करता हूं कि वह 11 अक्टूबर के अपने आदेश में आवश्यक सीमा तक संशोधन करे, ताकि कानून और उसमें निर्धारित सभी शर्तों एवं सुरक्षा उपायों का पालन करते हुए जरूरत पड़ने पर इंटरनेट सेवाएं बंद करने की अनुमति मिल सके।’’ प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ बृहस्पतिवार को इस मामले पर सुनवाई करेगी। उच्चतम न्यायालय ने 11 अक्टूबर को कहा था कि अवमानना याचिका दायर करने वालों ने अपना मामला साबित करने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार पेश किए हैं। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के कारण दिल्ली में मेट्रो और रेल सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं करने के अदालत के निर्देश का उल्लंघन किया गया। पीठ ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली के पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) की अध्यक्ष डी. थारा को नोटिस जारी किए थे। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) ने चुनाव में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए 10 अक्टूबर को प्रदर्शन का आह्वान किया था।

कोई टिप्पणी नहीं: