बयान के अनुसार, बाढ़ का पानी अपने साथ मिट्टी, गाद और मलबा बहाकर बूढ़ी गंडकी नदी के रास्ते नीचे की ओर ले गया। इसमें कहा गया कि इसके बाद अधिकारियों ने बूढ़ी गंडकी, त्रिशूली और नारायणी नदियों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी, क्योंकि जलस्तर में उतार-चढ़ाव हो रहा था और खतरा बढ़ रहा था। शुरुआती खबरों के अनुसार, कई लोग लापता हैं, अनेक घर बह गए हैं, पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं और नदी किनारे स्थित ढांचों को नुकसान पहुंचा है। काठमांडू स्थित आईसीआईएमओडी एक अंतर सरकारी संगठन है, जो हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र में सतत विकास और पर्यावरण संबंधी चुनौतियों पर काम करता है। इसके आठ सदस्य देशों में भारत, नेपाल और चीन शामिल हैं।
काठमांडू स्थित एक अंतर सरकारी संगठन ने कहा कि रविवार तड़के नेपाल की बूढ़ी गंडकी नदी प्रणाली में अचानक आई बाढ़ का कारण भूस्खलन और नदी में अस्थायी रूप से बने अवरोध का हटना हो सकता है। नेपाल में स्थानीय समयानुसार, तड़के करीब चार बजे आई बाढ़ गोरखा जिले में कई घरों और पुलों को बहा ले गई तथा जलविद्युत परियोजना के ढांचे को नुकसान पहुंचाया। नेपाली अधिकारियों के अनुसार, कम से कम 10 लोग अब भी लापता हैं, जबकि करीब 50 लोगों को बचा लिया गया है। अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (आईसीआईएमओडी) ने एक बयान में नेपाल के अधिकारियों से मिली शुरुआती जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि बाढ़ का कारण गोरखा जिले के चुमचेत के पास नदी में बने अस्थायी अवरोध का भूस्खलन की वजह से हटना हो सकता है।

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